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संविधान बनाने में था इन 15 महिलाओं का अहम योगदान

संविधान बनाने में था इन 15 महिलाओं का अहम योगदान

  • संविधान सभा में सदस्य 15 महिलाओं के योगदान के बारे में जानिए

देश अपना 72वां गणतंत्र मना रहा है। इस मौके पर हम आपको उन महिलाओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी संविधान बनाने में अहम भूमिका थी, मगर उन्हें बहुत पहचान नहीं मिली। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ, लेकिन इसे बनाने के लिए जुलाई 1946 में संविधान सभा का गठन किया गया और इस सभा में 389 सदस्य। इन सदस्यों में 15 महिलाए भी थीं। आइए, जानते हैं उनके बारे में

1. अम्मू स्वामीनाथन

केरल के पालघाट जिले की रहने वाली अम्मू स्वामीनाथन ने 1917 में मद्रास में वुमन्स इंडिया एसोसिएशन की स्थापना की और बाद में 1946 में संविधान सभा का हिस्सा बनी। वह 1952 में लोकसभा के लिए और 1954 में राज्यसभा के लिए चुनी गई।

2. दक्षिणानी वेलायुद्ध

दक्षिणानी वेलायुद्ध का जन्म कोचीन के छोटे से आइलैंड बोल्गाटी में 4 जुलाई 1912 को हुआ था। वह दलित वर्ग की नेता थीं और 1946 में संविधान सभा में चुनी गई पहली और एकमात्र दलित महिला थी।

3. बेगम एजाज रसूल

बेगम एजाज रसूल मालरकोटला के शाही परिवार में पैदा हुई थीं। उनकी शादी युवा भूमि मालिक नवाब अजाज रसूल से हुई थी। दोनों मुस्लिम लीग में शामिल हो गए थे। बेगम एजाज संविधान सभा की एकमात्र मुस्लिम महिला सदस्य थी।

4. दुर्गाबाई देशमुख

दुर्गाबाई देशमुख का जन्म 15 जुलाई 1909 को राजमुंदरी में हुआ था। 12 साल की छोटी उम्र में 1930 में मद्रास उन्होंने गैर-सहभागिता आंदोलन और नमक सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया। साल 1936 में उन्होंने आंध्र महिला सभा की स्थापना की।

5. हंसा जिवराज मेहता

हंसा एक समाज सुधारक, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षिका और लेखिका थीं।  उनका जन्म 3 जुलाई 1897 को बड़ौदा हुआ था। वह 1926 में बॉम्बे स्कूल कमिटी के लिए चुनी गईं। बाद में वह अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की अध्यक्ष बनीं।

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6. कमला चौधरी

कमला चौधरी ने 1930 में गांधी जी द्वारा शुरू किए नागरिक अवज्ञा आंदोलन में सक्रियता से भाग लिया था। वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के 54वें सत्र में उपाध्यक्ष और बाद में लोकसभा की सदस्य बनीं।

7. लीला रॉय

1923 में अपने दोस्तों के साथ उन्होंने दीपाली संघ और स्कूलों की स्थापना की जो राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गए। बाद में 1926 में उन्होंने छत्री संघ, दक्का और कोलकाता में महिला छात्रों के एक संगठन की स्थापना की थी।

15 महिलाओं का अहम है योगदान | इमेज : इंडियाटूडे

8. मालती चौधरी

मालती चौधरी का जन्म पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) में हुआ था। 16 साल की उम्र में विश्व भारती में उनका दाखिला कराया गया। बाद में सत्याग्रह आंदोलन के दौरान अपने पति के साथ मिलकर उन्होंने आंदोलन के प्रति माहौल तैयार करने के लिए लोगों से बातचीत की और उन्हें शिक्षित किया।

9. पूर्णिमा बनर्जी

वह इलाहाबाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस समिति की सचिव थी। वह कई कट्टरपंथी महिलाओं में से एक थीं, जो स्वतंत्रता आंदोलन में सबसे आगे थीं। उन्होंने सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में भी हिस्सा लिया था।

10. राजकुमारी अमृत कौर

वह भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री थी और 10 साल तक इस पद पर थी। वह ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) की संस्थापक थी। वह शिक्षा, खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी की पक्षधर थीं।

11. सरोजनी नायूड

‘नाइटिंगेल ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर सरोजनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष थी और इंडियन स्टेट की गवर्नर बनने वाली पहली महिला थी।

12.      रेणुका रॉय

उनकी राजनीतिक पारी बहुत लंबी थी और उन्होंने कई ज़िम्मेदारिया उठाई। 1943 से 1946 तक वह केंद्रीय विधान सभा, संविधान सभा और अस्थायी संसद की सदस्य थीं। फिर वह राहत और पुनर्वास मंत्री और लोकसभा की सदस्य बनीं।

13. सुचेता कृपलानी

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भूमिका के लिए उन्हें याद किया जाता है। उन्होंने 1940 में कांग्रेस पार्टी में महिला विभाग की स्थापना की और नई दिल्ली से सांसद बनीं। उसके बाद उत्तर प्रदेश की श्रम, सामुदायिक विकास और उद्योग मंत्री बनीं।

14. विजयलक्ष्मी पंडित

वह कैबिनेट मंत्री बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं। वह जवाहरलाल नेहरू की बहन थी और इलाहाबाद म्यूनिसिपल इलेक्शन से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। वह 1936 में संयुक्त प्रांत की असेंबली के लिए चुनी गई और 1937 में स्थानीय सरकार और सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री बनीं।

15. एनी मास्कारेन

एनी मास्कारेन का जन्म केरल के तिरुवनंतपुरम में एक लैटिन कैथोलिक परिवार में हुआ था। वह त्रावणकोर राज्य से कांग्रेस में शामिल होने वाली पहली महिला थी। मास्कारेन 1951 में पहली बार लोकसभा के लिए चुनी गयी थी| वह केरल की पहली महिला सांसद थी|

इन 15 महिलाओं की मेहनत, सत्यनिष्ठा उनकी भूमिका को यादगार बना देता है।

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