क्रिसमस पर दें खुद को ये तोहफा

कभी-कभी खुद को तोहफा देना भी है ज़रूरी
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क्रिसमस के मौके पर पूरी दुनिया में एक-दूसरे को तोहफा देने की परंपरा है। यह त्योहार खुशियां बांटता है। आप दूसरों को तो हमेशा ही ही गिफ्ट देते हैं, क्यों न इस बार कुछ अलग ट्राई करिए और दूसरों की बजाय खुद को कुछ तोहफा दीजिए। ये तोहफा कोई सामान हो यह ज़रूरी नहीं है, ज़रूरी है कि उससे आपको खुशी और आत्मसंतुष्टि मिले।

नेगेटिव लोगों से दूर रहें

आपके घर या आस पड़ोस में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें आपकी तरक्की और जीवन में कुछ भी अच्छा होता देख जलन होती है। ऐसे लोग कभी भी प्रेरणादायी बातें नहीं करते, बस नकारात्मक बातें ही करते रहते हैं। जैसे आपने यदि वज़न कम किया है, तो आपकी तारीफ करने की बजाय कहेंगे ‘अरे ये क्या तुम तो बिल्कुल बीमार लग रही हो, चेहरा बिल्कुल सूख गया है।’ ऐसे लोगों का साथ आपको भी नकारात्मक बना देगा क्योंकि संगति का असर तो पड़ता ही है। इसलिए बेहतर होगा कि आप खुद को ऐसे लोगों से दूर ही रखें।

हर पल को जीना

‘कल जो हुआ वह बहुत बुरा हुआ’ या ‘परसो न जाने बॉस मेरे सिर पर और क्या ज़िम्मेदारी डालने वाले हैं’ जैसी बीते कल और आने वाले कल की बातें सोचकर आप अपना आज एंजॉय नहीं कर पाते हैं। आप फिलहाल बीच किनारे सुनहरी रेत पर बैठकर लहरों की अटखेलियां देख रहे हैं, ऐसे में भविष्य और बीते कल के बारे में सोचकर वर्तमान के हसीन पलों को क्यों ज़ाया कर रहे हैं। आप अभी जहां, जिस परिस्थिति में है उसमें जीना और जीवन का आनंद लेना सीखिए। तो खुद को यही गिफ्ट करिए कि आप वर्तमान पल को जिएंगे।

खुद से प्यार

अपने परिवार, बच्चों, दोस्तों, रिश्तेदारों से आप बहुत प्यार करते हैं और उनकी ज़रूरत के वक्त हमेशा खड़े होते हैं, लेकिन क्या कभी खुद से पूछा कि आप अपने आप से कितना प्यार करते हैं, अपनी खुशी के लिए क्या करते हैं? खासतौर पर महिलाएं खुद को कभी प्राथमिकता नहीं देती, न तो खुशी को और न ही सेहत को जिससे उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है। दूसरों की परवाह करना और खुशियों का ख्याल रखना अच्छा है, लेकिन सबसे पहले आपको अपनी खुशियों का ख्याल रखना चाहिए, खुद से प्यार करिए और अपनी परवाह करिए।

क्रिसमस पर दें खुद को ये तोहफा
खुद से करें प्यार |इमेज : फाइल इमेज

ना कहना सीखें

महिलाओं के लिए यह गिफ्ट खुद को देना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि वह हर काम के लिए हां बोलकर बेकार का ही तनाव ले लेती हैं। याद रखिए हर इंसान की एक सीमा होती है और इस सीमा से बाहर जाकर जब आप काम करते हैं तो इसका आपके जीवन पर असर पड़ने लगता है। इसलिए जो काम आप नहीं कर सकतें, या जो ज़िम्मेदारी उठाना आपके लिए संभव न हो उसके लिए निःसंकोच ‘ना’ बोलना सीखें। जैसे आप बैंक अकाउंट में जितने पैसे है उससे अधिक खर्च नहीं कर सकते, उसी तरह जितनी आपकी एनर्जी और क्षमता है उससे अधिक काम नहीं कर सकतें, इसलिए ‘ना’ बोलना ज़रूरी है।

नींद पूरी करें

शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहने के लिए नींद पूरी होना ज़रूरी है। काम और जिम्मेदारियों के बोझ की वजह से यदि आप नींद से समझौता करते हैं, तो यह आदत बदल लीजिए। नींद पूरी करने पर न सिर्फ आप दिन भर एनर्जेटिक रहते हैं, बल्कि तनाव और मोटापा भी दूर रहता है।

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