महिलाओं के हौसले को सलाम

महिलाओं के हौसले को सलाम

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कुछ साल पहले तक पश्चिम बंगाल का छोटा सा गांव कॉलोनीपाड़ा बाहरी दुनिया से पूरी तरह से कटा हुआ था। यहां के लोगों के लिए गांव ही पूरी दुनिया थी। बाहरी लोगों का इस गांव तक पहुंचना बड़ा मुश्किल था क्योंकि गांव में सड़क नाम की कोई चीज़ नहीं थी। लोगों को भी गांव से बाहर जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में गांव की महिलाओं ने खुद अपने बलबूते सड़क बनाने की ठानी। पिछले चार सालों में इन महिलाओं ने करीब दस किलोमीटर से अधिक पक्की सड़क का निर्माण कर दिया। इस कारण कई गांव आपस में जुड़ गए और लोगों को पहुंचने में आसानी होने लगी।

महिलाएं होती थीं ज़्यादा परेशान

सड़क न होने से गांव की महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था, क्योंकि गांव के ज्यादातर पुरुष रोज़ी-रोटी कमाने के लिए गांव से बाहर रहते हैं। ऐसे में अस्पताल तक किसी तरह की कनेक्टिविटी न होने ने कारण प्रेग्नेंट महिलाओं की डिलीवरी कराना बेहद मुश्किल और जानलेवा होता था। किसी भी तरह की मेडिकल सुविधा न मिल पाने के कारण महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। सड़क न होने के कारण सरकारी सहायता भी नहीं मिल पाती थी।

एनजीओ ने दिया हौसला

दरअसल, महिलाओं में सड़क बनाने का यह हौसला साल 2010 में उस वक्त मिला था, जब एक अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवी संस्था ने इस गांव में काम करना शुरू किया। संस्था ने सड़क निर्माण के लिए महिलाओं को प्रेरित किया। गांवों की महिलाओं का कहना है कि जब एनजीओ के लोगों ने सड़क बनाने की योजना का प्रस्ताव दिया, तो हमें अपने जीवन में भी रोशनी आने की उम्मीद जगी। हमने काम किया और इसका रिजल्ट आज सबके सामने है।

महिलाओं ने किया कमाल | इमेज: ईएनएन

एक और एक बने ग्यारह

हालांकि, गांवों को आपस में जोड़ने के लिए दस किलोमीटर से अधिक लंबी ईंट वाली सड़कों का निर्माण करना कोई आसान काम नहीं था लेकिन जब महिलाएं एकजुट हुईं, तो ‘एक और एक  ग्यारह’ की कहावत साकार हो गई। महिलाओं की मेहनत की वजह से सिर्फ चार साल में दूर दराज के गांवों को जोड़ने वाली दस किलोमीटर से भी लंबी ईंट वाली सड़क का निर्माण हो गया।

जीवन हुआ काफी हद तक आसान

कॉलोनीपाड़ा में ईंट की सड़क पर चलना लोगों के लिए एक सपना था। हालात यह थी कि एक बार शादी करके इस गांव में कदम रखने वाली महिला को सड़कों के अभाव में अपने जीवन में मायका जाना भी नसीब नहीं हो पाता था। लेकिन, अब इस गांव की बेटियां गांव से पांच किलोमीटर दूर स्कूल साइकिल से जाती है। अच्छी सड़कों के कारण महिलाओं के लिए जीवन काफी हद तक आसान हो गया है।

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