ऐसे बदलें ज़रूरत से ज़्यादा सोचने की आदत

ज़्यादा सोचने की आदत नहीं है अच्छी
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आपने हमेशा सुना और पढ़ा होगा कि हमें कोई भी काम बहुत सोच-समझकर करना चाहिए और ऐसे ही बोलना भी चाहिए, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा सोचने या चिंता करने की आदत अच्छी नहीं है। जो लोग छोटी-छोटी बातों और बदलाव को लेकर गहरी सोच में डूब जाते है वह समस्याओं का हल जल्दी नहीं ढूंढ़ पाते। ज़्यादा सोचने की आदत एक बीमारी है और इससे उबरना ज़रूरी है। आइए जानते हैं कैसे आप अपनी यह आदत बदल सकते हैं।

प्रोफाइल पिक्चर की तरह बदल दें विचार

जिस तरह प्रोफाइल पिक्चर पसंद न आने पर आप उसे तुरंत बदल देते हैं, वैसे ही अपने बेकार के विचारों को भी बदल दें। जैसे ही दिमाग में कोई फालतू विचार आए है तो एक पल ठहरकर सोचें कि क्या यह ज़रूरी है यदि नहीं तो तुरंत सिर को झटककर उस विचार को अपने दिमाग से डिलीट कर दें।

खुद को व्यस्त रखें

इंसान ज़्यादा तभी सोचता है जब वह खाली बैठा होता है यानी कोई काम नहीं रहता। इसलिए ज़्यादा सोचने की आदत बदलने के लिए ज़रूरी है कि आप हमेशा खुद को व्यस्त रखें। यदि घऱ और ऑफिस के काम से समय मिलता है तो उसमें अपना कोई शौक पूरा करे, किताब पढ़ें, किसी क्रिएटिव काम में खुद को व्यस्त रखें इससे दिमाग को ज़्यादा सोचने का मौका ही नहीं मिलेगा।

दायरा बढ़ाएं

यदि कोई विचार आपको बार-बार परेशान कर रहा है और उसे दिमाग से हटा नहीं पा रहे हैं तो एक बार सोचिए कि उस बात की एक हफ्ते बाद, महीने बाद या एक साल बात क्या कोई अहमियत रहेगी? यदि नहीं तो दिमाग अपने आप उसके बारे में सोचना बंद कर देगा, लेकिन इसके लिए उसे सोच को व्यापक दायरे में लाना ज़रूरी है।

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शांत मन से सोचिए | इमेज : फाइल इमेज

शांत जगह पर चले जाएं

जब कभी एक ही बात के बारे में आप ज़्यादा सोचकर परेशान होने लगें, तो किसी ऐसी जगह पर चले जाएं जहां कुदरत को करीब से महसूस किया जा सके और आपका मन शांत हो सके जैसे समुद्री किनारा, बगीचा आदि। जब आप खुली जगह पर कुछ देर घूमते हैं तो दिमाग से बेकार की बातें भी निकल जाती हैं।

सुबह की अच्छी शुरुआत

शुरुआत पॉज़िटिव हो तो पूरा दिन अच्छा गुजरता है और आपको किसी तरह का तनाव और चिंता नहीं होती है और जब तनाव और चिंता नहीं होगी तो आप किसी चीज़ के बारे में ज़रुरत से ज़्यादा सोचते भी नहीं है। सुबह उठकर हल्की-फुल्की कसरत करें, हेल्दी नाश्ता करें और फिर पॉज़िटिव विचारों के साथ अपने काम की शुरुआत करिए।

एक बार में एक ही काम करें

ज़रूरत से ज़्यादा सोचने की एक वजह है मल्टीटास्किंग यानी एकसाथ कई काम करना। इस तरीके से न सिर्फ तनाव बढ़ता है, बल्कि आप कोई भी काम अच्छी तरह से नहीं कर पाते है और फिर दिमाग में अलग-अलग विचार घूमने लगते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि एक बारे में एक ही काम करें और फिर थोड़ा आराम करने के बाद दूसरा काम करें।

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