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आसानी से कम करें अपनी चिंता करने की आदत

आसानी से कम करें अपनी चिंता करने की आदत

  • जिन चीज़ों पर नियंत्रण न हो, उनकी चिंता करना व्यर्थ है
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चिंता एक ऐसी चीज़ है जिसका सामना ज़्यादातर लोग करते हैं और यह उम्र को नहीं देखती। अगर आपको चिंता होती है कि बच्चों के भविष्य के लिए पर्याप्त धन कैसे जोड़ेंगे, या कल ऑफिस में होने वाली मीटिंग में आपका प्रदर्शन कैसा रहेगा, तो बच्चों को क्लास में अच्छा करने की चिंता हो सकती है, या किसी खेल में अपने प्रदर्शन को लेकर चिंता हो सकती है, या किसी दोस्त से हुए झगड़े के बाद दोस्ती टूट जाने की चिंता हो सकती है। जहां ज़िम्मेदारी होती है, वहां थोड़ी सी चिंता होना भी लाज़मी है। अब इससे यह तो समझ आ जाता है कि चिंता आम व्यक्ति के जीवन का एक छोटा सा हिस्सा है, लेकिन परेशानी तब हो सकती है जब यह छोटा सा हिस्सा आपके जीवन में बड़ी जगह लेने लगे और आपके दैनिक कार्यों में अड़चन पैदा करने लगे। इसलिए आपको सबसे पहले समझना होगा कि आखिर चिंता के पीछे के कारण क्या हैं।

चिंता के पीछे के कारण

  1. रोज़मर्रा के काम से होने वाले तनाव से जुड़ी चिंता
  2. किसी चीज़ को खोने के डर से जुड़ी चिंता
  3. अपने भविष्य के डर के कारण चिंता
  4. किसी विशेष चीज़ से डर के कारण चिंता

चिंता के पीछे कारण कुछ भी हो सकता है लिकिन उस से मुक्ति पाना आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रूरी है। अगर आपने गौर किया हो तो जब भी आप तनाव में होते हैं तो आपकी सांसे तेज़ हो जाती हैं। इससे आपको हाई ब्लडप्रैशर हो सकता है, सिर दर्द की परेशानी सामने आ सकती है, पेट में दर्द की समस्या हो सकती है आदि।

चलिए आपको बताते हैं कुछ आसान लेकिन कारगर तरीके, जिनको अपना कर आप अपनी चिंता को अपने कंट्रोल में ला सकते हैं।

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मेडिटेशन करे

अगर चिंता को काबू में करना है, तो आपको मेडिटेशन करना होगा। आपको अपनी सांस, या छाती की मूवमेंट पर या घांस पर बैठकर अपने पैरों पर ध्यान केंद्रित करनी होगा। अपनी चिंता को दिमाग से निकलता हुआ महसूस करें। जब भी आप खुद को किसी चीज़ की ज़रूरत से ज़्यादा चिंता करते पाएं, तुरंत अपनी सांसो पर फोकस कर के संयम बनाएं। रिसर्च बताती हैं कि मात्र 10 दिन के मेडिटेशन से जीवन में 7.5% संटुष्टि में वृद्धि हो सकती है।

चिंता करने के लिए समय निर्धारित करें

सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन दिन में बीस से तीस मिनट चिंता करने के लिए निकालें, हर दिन समय एक ही रखें। जितनी चिंता करनी है करें, और फिर दिन के बाकी समय चिंता को आपकी अड़चन न बनने दें।

सुलझाने योग्य और न सुलझ पाने वाली चिंताओं के बीच अंतर करना सीखें

आप अपने फाइनेंस की चिंता कर सकते हैं क्योंकि आप बजट बना कर अपने कंट्रोल में कर सकते हैं, या अपने कॉलेस्ट्रोल की चिंता कर सकते हैं, क्योंकि उसे खान-पान की बेहतर च्वाइस से कंट्रोल में किया जा सकता है। लेकिन अगर आप इस बात से चिंता कर के तनाव में आ जाते हैं कि कहीं मौसम बिगड़ने की वजह से आपके घूमने का प्लान खराब न हो जाए या कोई आपसे दोस्ती क्यों नहीं कर रहा है, तो इस बात को समझें कि यह आपके नियंत्रण में नहीं है और चिंता का कोई परिणाम नहीं निकलेगा।

अपनी चिंता के कारण को लिखें

जब भी आपके मन में किसी चीज़ को लेकर चिंता हो, तो उसे तुरंत लिख लें और हफ्ते में एक बार बैठ कर पढ़ें। इससे आपको समझ आएगा कि जिन बातों पर आप चिंता कर रहे हैं, वो आपके कंट्रोल में हैं भी या नहीं।

जिन चीज़ों के लिए आभारी हैं, लिखें

हर दिन तीन चीज़ों के बारे में लिखें जिनके लिए आप आभारी हैं। शोध बताते हैं कि जब आपके अंदर आभार व्यक्त करने का तरीका आ जाता है, तो आप पहले से ज़्यादा सकारात्मक जीवन जीते हैं और खुशहाल हो जाते हैं।

अगली बार जब आप चिंता करें तो खुद से पूछें कि इसका परिणाम क्या होगा।

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