इस दशहरा अपने अंदर के गुणों पर दें ध्यान

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बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है दशहरा। यह बुराई सिर्फ बाहरी ही नहीं होती, बल्कि अपने अंदर की बुराई का भी नाश करना होता है। इस बार दशहरे के मौके पर अपने अंदर के अवगुणों को दूर करके अच्छे गुण अपनायें। इन गुणों को अपनाकर आप अपने अंदर की बुराई पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

साहस

जब आपको लगता है कि किसी चीज़ को किया जाना ज़रूरी है, तो वह साहस है। साहस का मतलब यह नहीं है कि आप बिना डरे कुछ करते हैं, बल्कि किसी चीज़ से डरने के बावजूद वह काम करना साहस है। इसका मतलब है अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर डर पर जीत हासिल करते हुए वह काम पूरा करना।

दयालु

आप दूसरों से जिस तरह के व्यवहार की उम्मीद रखते हैं, दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए। दयालु होने के मतलब सिर्फ मुंह से अच्छा बोलना ही नहीं है, बल्कि कुछ ऐसा करना है जिससे सामने वाले का जीवन कुछ बेहतर बन जाएं। दूसरों को ऊपर उठाना और उन्हें यह एहसास दिलाना कि वह अकेले नहीं है, दयालुता है।

इस दशहरा अपने अंदर के गुणों पर दें ध्यान
खुशियां बांटें |इमेज : फाइल इमेज

धैर्य

जब आप कोई काम खत्म करना चाहते हैं, लेकिन कोई बार-बार आपको डिस्टर्ब कर रहा है। कोई आपके जीवन को और मुश्किल बनाने की कोशिश करता है। ऐसे में खुद को उस इंसान की जगह रखकर उसकी परिस्थितियों और उसके दृष्टिकोण को समझकर आप उसके साथ दया और सम्मान के साथ पेश आ सकते हैं और यही धैर्य है।

ईमानदारी

ईमानदारी का मतलब है अपने विश्वास के अनुसार बोलना और व्यवहार करना।  यदि आप बोलते कुछ हैं और करते कुछ और हैं, तो आपको ईमानदार नहीं कहा जायेगा। अपने विश्वास के विपरीत काम करना और बोलना दोनों ही आपको झूठा या पाखंडी बना देता है। ऐसे में ज़रूरी है कि या तो आप अपना विश्वास बदलें या फिर अपना काम।

इस दशहरा अपने अंदर के गुणों पर दें ध्यान-
खुशियां बांटें |इमेज : फाइल इमेज

आभार

कृतज्ञता का भाव या आभार व्यक्त करना भी ज़रूरी है। आप हर दिन अपने शब्दों, व्यवहार या लिखकर किसी के प्रति आभार प्रकट कर सकते हैं। आप रोज़ाना कृतज्ञता सूची लिखने की आदत डाल सकते हैं। सुबह से लेकर शाम तक जीवन में मिली अच्छी चीज़ों के बारे आभार व्यक्त करें। इसके साथ ही दूसरों द्वारा किए किसी काम या मदद के लिये उनकी सराहना करना भी आपके गुणों में शामिल होना चाहिये।

क्षमा

जिन लोगों ने आपको दुख या चोट पहुंचाई हो, उनके प्रति गुस्सा और नफरत की भावना को खत्म करना ही क्षमा है। अगर बार बार उसी बारे में सोचते रहेंगे, तो आपको दुख होगा और इससे खुद तभी बचाया जा सकता है, अगर आप उस इंसान को क्षमा कर देंगे। प्रेम- प्यार वह भावना है जो आपके मन को शुद्ध कर देती है। हम जिसे प्यार करते हैं, उसकी सिर्फ अच्छाई ही हमें नज़र आती है। खुद को बुराई से दूर रखने के लिये सबके प्रति प्रेम की भावना रखें, ताकि आपका ध्यान अवगुणों पर न जाये। तो फिर इस दशहरे पर प्रण करें कि आप इन गुणों को अपनायेंगे, ताकि जीवन एक बेहतर दिशा की ओर जा सकें।

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