ऐसी पेंटिंग, जिसे छूकर किया जाता है महसूस

ब्रेल पेंटिंग से सिद्धांत शाह दे रहे हैं नेत्रहीनों को महसूस करने का नया एहसास
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क्या आप किसी पेंटिंग एग्जीबिशन में गये और वहां की पेंटिंग को हाथ लगाया है? नहीं न। लेकिन एक ऐसा कलाकार है, जो लोगों को अपने पेंटिंग हाथ लगाकर महसूस करने को कहता है। ऐसी चित्रकारी जिसे देखने के लिए आप को आंखों की नहीं, बल्कि उंगलियों, नाक और कानों की ज़रूरत है। नेत्रहीन लोगों के कला महसूस करने के सपने को सच बना रहे हैं, मुंबई के सिद्धांत शाह।

क्या खास है इस आर्ट वर्क में ?

इस आर्ट वर्क का मकसद एक व्यक्ति को उसकी शारीरिक और मानसिक बाधाओं से आज़ाद करना और कला को हर किसी तक पहुंचाना है। इसी को ध्यान में रखकर सिद्धांत ने पेंटिंग को एक नई परिभाषा दी है।

सिंद्धात जब भी पेंटिंग करते हैं, तो वह ऑरिजनल सामान का इस्तेमाल करते हैं। जैसे उन्हें पेंटिंग में महिला को साड़ी में दिखाना है, तो वह पेंटिंग में असल साड़ी का इस्तेमाल करते हैं।

ऐसी पेंटिंग, जिसे छूकर किया जाता है महसूस
पेंटिंग को छूकर करें महसूस |इमेज : फेसबुक

कहां से मिली प्रेरणा ?

दरअसल सिंद्धात की प्रेरणा उनकी मां है, जिनकी नज़र बेहद कमज़ोर है। उनकी इस समस्या को अक्सर एक कमी के तौर पर देखा जाता था, लेकिन सिंद्धात ने इसे पॉज़िटिव तरीके से लिया और अपनी इसी सोच से बड़े मिशन की शुरूआत की। इस मिशन को साकार करने में उनकी मां ने सिद्धांत का साथ दिया। इस कला को ब्रेल पेंटिंग के नाम से भी जाना जाता है।

ब्रेल पेंटिंग की ली शिक्षा

सिद्धांत शाह हेरिटेज मैनेजमेंट में मास्टर्स करने ग्रीस गये थे। वहां नेत्रहीनों का म्यूज़ियम और आर्ट गैलरी देखी, तो उन्होंने भारत में नेत्रहीनों के लिए आर्ट गैलरी खोलने का लक्ष्य बना लिया। 2015 में उन्होंने नेशनल म्यूज़ियम के लिए वॉलंटियर के तौर पर ब्रेल लिपि में पेंटिंग बनाने का काम शुरू किया।

ऐसी पेंटिंग, जिसे छूकर किया जाता है महसूस
पेंटिंग को छूकर करें महसूस |इमेज : फेसबुक

ब्रेल पेंटिंग की थी जानकारी कम

सिद्धांत शाह ने जब ब्रेल पेंटिंग शुरू की, तो सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि देश में लोगों को इस बारे में पता ही नहीं था। हर म्यूज़ियम तरह-तरह के कारण बताकर टालता रहा। सामान्य पेंटिंग में आप देख सकते हैं कि पेंटिंग किस  बारे में है, जबकि ब्रेल पेंटिंग में पेंटिंग को छूकर समझा जा सकता है।

नेत्रहीनों के लिए रंग का अधिक महत्व नहीं होता। फिर भी पेंटिंग में चटख रंग रखते हैं, ताकि आम दर्शक भी समझ सकें। ब्रेल पेंटिंग महंगी होती है क्योंकि उसमें थ्री डी तकनीक का इस्तेमाल होता है। अब कई स्कूलों ने ब्रेल पेंटिंग का कोर्स शुरू किया है।

ब्रेल लिपि दे रही नई दिशा

यह पहल ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को ये समझाने में मदद करेगी कि नेत्रहीनों के लिए आर्ट एजुकेशन कितना ज़रूरी है। इस तकनीक से वह नेत्रहीन अपने सपनों को पूरा कर पाएंगे, जो कला के इस क्षेत्र में आना चाहते हैं।

इमेज : फेसबुक

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