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निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा दे रहे हैं ये लोग – 31 मई से 4 जून

निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा दे रहे हैं ये लोग – 31 मई से 4 जून

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देश की सेवा करना हमारा धर्म है। हमारे समाज में बहुत से ऐसे लोग हैं, जो समाज के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं। आपको ऐसे ही कुछ लोगों की कहानी बतायेंगे, पढ़िए ये लेख-

शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल की पत्नी निकिता ने दिया समाज को संदेश

साल 2019 में जम्मू कश्मीर में हुए पुलवामा हमले में शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की पत्नी निकिता कौल ने भारतीय सेना ज्वाइन कर ली है। वह सेना में लेफ्टिनेंट बनी हैं। उन्होंने भारतीय सेना की वर्दी पहन अपने पति मेजर विभूति शंकर को श्रद्धांजलि दी है। पति के शहीद होने पर उन्होंने लोगों से सहानुभूति के बजाय खुद को मज़बूत बनाने और अपने पति के सपनों को साकार करने का फैसला लिया। निकिता ने दिल्ली में अपनी नौकरी छोड़कर शार्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) परीक्षा और सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) का इंटरव्यू पास किया और फिर वह पिछले साल से ही चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकेडमी में ट्रेनिंग ले रही थी। लेफ्टिनेंट निकिता कौल चाहतीं तो वह आराम की ज़िंदगी जी सकतीं थीं लेकिन उन्होंने ऐसा न करके मुश्किल रास्ते को चुना। उनके दृढ़ संकल्प और हौसले की तारीफ हरेक देशवासी कर रहा है। उनके इस सरहानीय कदम के लिए दिल से सलाम 🙏

200 छात्रों की फीस भरने के लिए प्रिंसिपल ने उठाया सरहानीय कदम

समय भले ही बुरा है लेकिन अच्छे लोगों की कमी भी नहीं हैं। बुरे वक्त में बहुत से लोग हैं जो असमर्थ लोगों की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं। ऐसे समय में महाराष्ट्र के मुम्बई के पवई में एक राज्य बोर्ड स्कूल की प्रिंसिपल ने निजी व्यक्तियों और कॉर्पोरेट घरानों से 40 लाख रुपये जुटाने में कामयाबी हासिल की है। इस रकम से करीब 200 ज़रूरतमंद छात्रों की स्कूल फीस भर दी गई है। पवई इंग्लिश हाई स्कूल की प्रिंसिपल शर्ली पिल्लई ने मार्च 2020 में कोविड लॉकडाउन लागू होने के तुरंत बाद क्राउडफंडिंग की पहल की थी। शर्ली ने कहा मुझे खुशी है कि कोशिश रंग लाई। कुल एकत्रित राशि से लगभग 200 छात्रों की फीस का भुगतान किया जा चुका है। अब हम साल 2021-22 के लिए अपने छात्रों के लिए स्पॉन्सर्स की तलाश कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि स्कूल के सभी छात्रों को ऑनलाइन क्लास में भाग लेने का निर्देश दिया गया है और बच्चों से ये भी कहा गया है कि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें, फीस का मुद्दा बड़ों पर छोड़ दें। उनकी यह पहल काफी अच्छी है।

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10 रुपये में इलाज कर डॉ. विक्टर ने पेश की मिसाल

कोरोना महामारी के दौरान देश में गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को अस्पतालों में महंगे इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में हैदराबाद के डॉ. विक्टर ने मिसाल पेश करते हुए कोरोना मरीजों का इलाज महज 10 रुपये में कर रहे हैं। डॉक्टर विक्टर ने बताया है कि वह हर रोज 100 से ज़्यादा मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जबकि पिछले साल उन्होंने 20 से 25 हजार से अधिक कोरोना मरीजों का इलाज किया था। डॉ. विक्टर इमैनुएल कोरोना के अलावा डायबिटीज, हृदय समेत अन्य बीमारियों का इलाज करते हैं। हैदराबाद के बोद्दुप्पल इलाके में क्लिनिक चलाने वाले डॉ. विक्टर इमैनुएल ने बताया कि वह 10 रुपये में कोरोना मरीजों का इलाज करते हैं। वह डायबिटीज, हृदय से संबंधी बीमारी समेत अन्य बीमारियों का इलाज करते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वह 2018 से मरीजों का इलाज मात्र 10 रुपये फीस लेकर कर रहे हैं। डॉ. विक्टर ने बताया कि उन्होंने क्लिनिक की शुरुआत असहाय लोगों की मदद के लिए की थी। उन्होंने कहा कि एक बार मैंने एक महिला को अपने पति की दवा खरीदने के लिए भीख मांगते देखा था। उसके बाद से मैं भावुक हो गया और ज़रूरतमंद और गरीबों का सस्ता इलाज करने की ठान ली थी।

पिछले एक साल से रोज़ाना 200 आवारा कुत्तों का ज़िम्मा संभाल रही है आर्ची

रांची के मुरहाबादी ग्राउंड में आर्ची सेन स्ट्रीट कुत्तों को खाना खिलाने का नेक काम कर रही हैं। आज के वक्त में जब अधिकांश लोग महामारी के बीच घर से निकलना भी पसंद नहीं कर रहे हैं, ऐसे में आर्ची द्वारा अपनाया गया मदद का यह तरीका तारीफ के काबिल है। सबसे पहले आर्ची ने अपने घर के आसपास रहने वाले दो-तीन कुत्तों को खाना खिलाने की शुरुआत की। उसके बाद धीरे-धीरे इन कुत्तों की संख्या बढ़ती गई। फिलहाल वे 200 आवारा कुत्तों को रोज खाना खिला रहीं हैं। आर्ची ने इन कुत्तों के लिए वैक्सीनेशन का भी पूरा प्रबंध किया है। आर्ची के इस नेक काम को पूरा करने में उनके पिता संजीत कुमार सेन मदद करते हैं, जो रिटायर्ड मैकेनिकल इंजीनियर हैं। 25 वर्षीय आर्ची ने शहर के अलग-अलग लोकेशन में आवारा कुत्तों के लिए 50 वॉटर पॉट्स रखे हैं। उन्होंने 150 कुत्तों की सुरक्षा के लिए उन्हें कॉलर बेल्ट्स भी बांधे हैं। आर्ची ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान जब आवारा कुत्ते घर से फेंके गए खाने पर पूरी तरह निर्भर हैं, मैंने उन्हें अपने घर का बना खाना खिलाने की जिम्मेदारी उठाई है।

हर्ष और उनकी मां हिना ने पेश की इंसानियत की मिसाल

मुंबई के कांदिवली इलाके में हर्ष मंडाविया और उनकी मां हिना मंडाविया मिलकर ‘हर्ष थाली और पराठे’ का काम करते हैं। जब कोरोना ने दस्तक दी तो मज़दूरों और बेरोज़गार प्रवासी लोगों को खाना खिलाने की मुहिम शुरू की। अब तक दोनों मां-बेटे की जोड़ी 26,000 से अधिक भोजन की थालियां, 62,000 रोटियां, 7,000 घर की बनी मिठाइयाँ और 1000 इम्युनिटी बूस्टर मिठाइयां बांट चुके हैं। महामारी के दौरान श्रमिक, नौकरानी, ​​कूड़ा उठाने वाले, रिक्शा चालक, अनाथालय और वृद्धाश्रम में रोज़ाना 150-200 लोगों को खाना खिलाते हैं। हिना कहती हैं, “मैं हमेशा हर्ष को बताती हूं कि हमारे दादा-दादी हमें हमेशा यही सिखाते थे कि ‘हाथ देने वाला रखना, लेने वाला नहीं। हिना ने इस लॉकडाउन के दौरान अपने नियमित ग्रहकों में से एक अभिनव चौधरी के साथ मिलकर उस इलाके की मध्यमवर्गीय महिलाओं को खाना बनाने के काम में शामिल किया। हिना खुद रोटी बना सकती थी, या अपने रसोइये से करवा सकती थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इन महिलाओं को शामिल किया ताकि उन्हें अपना घर चलाने में मदद मिल सके। आज, प्रत्येक परिवार पूरे सप्ताह में लगभग 100 रोटियां और वीकेंड में 50 पूरियां बनाता है, जिससे उन्हें औसतन 15,000 रुपये प्रति माह की कमाई हो जाती हैं । हिना और उनके बेटे हर्ष का यह काम काफी सराहनीय है।

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