क्या आप अपने बच्चों को हर बात पर टोकती हैं ?

बच्चों को हर बात पर टोकने की आदत को आप ऐसे बदल सकते हैं।
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‘नहीं, तुम इसे छू नहीं सकते।’ ‘मैंने कहा है ना नहीं।’ ‘नहीं, तुम वहां नहीं बैठ सकते।’

इसी तरह दिन में आप कितनी बार अपने बच्चे से ना बोलती हैं? और कितनी बार आपका बच्चा भी बदले में आपको इसी तरह ना बोलता है?

आजकल की जनरेशन के पैरेंट्स और दादा-दादी के लिए ना शब्द बोलना जैसे सबसे ज़रूरी शब्द बन गया है। दरअसल, हम बच्चे के हर काम को अप्रूव करना चाहते हैं। हम जानना चाहते हैं कि वह ऐसा क्यों करना चाहता है, क्योंकि इससे हमारा काम बढ़ जाता है। और इस प्रक्रिया में बच्चों को जो सीखना चाहिए वह सीख नहीं पाते हैं। यदि आप भी चाहती हैं कि बच्चा मोबाइल/टीवी स्क्रीन पर कम समय बिताए, तो मेरी तरह ही उसे घर को एक्सप्लोर करने की छूट दे दीजिए।

नियम कायदों में न बांधें

यदि वह किचन, फ्रिज, बर्तनों के पीछे, अलमारी के अंदर कुछ तलाशने की कोशिश कर रहा है तो रोकिए मत। हां, इसकी वजह से आपका सामान ज़रूर बिखर जाएगा, तो आप बच्चे को बाद में इसे साफ करने या सफाई में आपकी मदद के लिए बोल सकती हैं, मगर पहले उसे अपनी जिज्ञासा शांत कर लेने दीजिए। बच्चों को बहुत ज़्यादा नियम कायदों में बांधने से उनके अंदर की जिज्ञासा खत्म हो सकती है।

यही है सही परवरिश का तरीका | इमेज : फाइल इमेज

लॉकडाउन का करें सही इस्तेमाल

मुझे लगता है लॉकडाउन बिल्कुल सही समय  है जब हम ‘ना’ से ‘हां’ पैरेंट्स बन सकते हैं, यानी बात-बात में ‘ना’ नहीं बोलें और कभी यदि आप उनकी बात नहीं मान सकती हैं, तो मना करने के लिए सीधे ना की बजाय कुछ इस तरह बोल सकती हैः

  • तुम इसे फिर कभी कर सकते हो
  • हमारे पास अभी इसके लिए वक्त नहीं है
  • यह हमारे बजट में नहीं है
  • मुझे पता है तुम यह करना चाहते हो, लेकिन यह खतरनाक है
  • क्या हम इसे किसी और तरीके से करने की कोशिश करें?

अपनी ना को हां में बदलिए

ना को हां में बदलने पर मैंने देखा कि जब मैं काम में व्यस्त रहती हूं, तो मेरे बच्चे ने खुद ही अपनी बोरियत दूर करने का तरीका ढूंढ लिया। उसकी क्रिएटिविटी पहले से बहुत निखर गई और मुझे यह सब देखकर बहुत हैरानी होती है। कई बार वह मेरे साथ बहुत कुछ करना चाहता है, लेकिन मेरे पास वक्त नहीं होता, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि वह अकेले यह सब नहीं कर सकता।

जो बच्चे जिज्ञासु और बार-बार सवाल करते हैं वह आपकी थोड़ी सी मदद से अपने लिए बहुत सारी चीज़ें तलाश सकते हैं। आपकी एक ‘हां’ से बच्चे और आपके लिए भी छोटी-छोटी चीज़ों से मिलने वाली खुशी बढ़ जाएगी, इससे बच्चा खुद को बिज़ी रखना सीख जाएगा, लेकिन कई बार अपनी पसंद की चीज़ें न कर पाने पर उसे थोड़ी मायूसी भी हो सकती है।

अनन्या दिल्ली में रहने वाली एक कामकाजी मां हैं। यहां बताएं गए तरीकों को उन्होंने अपने पांच साल के बेटे पर आज़माया है।

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