गणपति की धूम लेकिन पर्यावरण का भी है ख्याल

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छोटा हो या बड़ा, आजकल पूरा देश गणपति बप्पा के रंग में रंगा हुआ है। जगह जगह गणेश जी के पंडाल दिख रहे हैं और लोगों ने भी पूरी श्रध्दा के साथ अपने घरों में गणपति की प्रतिमा स्थापित कर दी है। हालांकि यह त्योहार खासतौर से महाराष्ट्र में मनाया जाता है लेकिन अब तो इस त्योहार की धूम पूरे देश में देखने को मिलती है।

ज्ञान और विघ्नविनाशक के रूप में पूजे जाने वाले गणेशजी की प्रतिमा को गणेश चतुर्थी के 10 वें दिन समुद्र, नदी और झीलों में विसर्जित किया जाता है। जब गणपति की प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाता है, तो केमिकल की वजह से पानी दूषित हो जाता है।

पर्यावरण बचाने की खातिर अब साल दर साल गणेश जी की प्रतिमाओं को इको फ्रेंडली किया जा रहा है। लोग नये नये आइडिया लेकर आते है, जिससे न सिर्फ पर्यावरण का खास ख्याल रखा जा रहा है बल्कि मानवता की मिसाल भी कायम की जा रही है।

तो आइये, आज हम आपको ऐसे गणपति प्रतिमाओं के बारे में बतायेंगे, जो लोगों के बीच बहुत पॉपुलर है।

फिटकरी वाले गणेश

पुणे के आर्टिस्ट विवेक कांबले ने पर्यावरण को बचाने का अनोखा तरीका निकाला है। उन्होंने फिटकरी के गणेश जी बनाये हैं, जिसे विसर्जित करने से कोई नुकसान नहीं होगा। सबसे अच्छी बात यह है कि मूर्ति की साज सजावट में जिन रंगों का इस्तेमाल किया गया है, वे खाद्य रंग हैं। इस तरह की प्रतिमाओं को पानी में विसर्जित करने से कोई नुकसान नहीं होता है क्योंकि यह पानी में तेजी से घुल भी जाती है। इस तरह की मूर्तियों को लोगों ने घरों में ही नहीं बल्कि पंडालों में भी सजाया हैं।

इमेज: डीएनए, नवभारत, आजतक, द हिंदू

ट्री गणेश

इस बार कई लोगों के घर गणेश जी गमले में विराजमान होकर आए हैं, जो गमले में विसर्जन के बाद पौधे के रूप में नया जन्म लेंगे। इसे इग्लिंश में ट्री गणेश भी कहा जाता है।

इसमें गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमा गमले में ही स्थापित की जाती है, जिसके भीतर बीज रखा जाता है। गमले में विराजमान गणेश जी की मूर्ति के बेस में खाद युक्त मिट्टी भरी जाती है। प्रतिमा विसर्जन के दिन इन पर पानी अर्पित किया जाता है और इसमें रखा बीज अपने आप रोपित हो जाता है। फिर कुछ दिनों बाद बीज से पौधा निकल आता है।

फिश फ्रेंडली गणेश

अगर ऐसा हो कि विसर्जित की जाने वाली गणेश जी की मूर्ति से मछलियों को खाना मिल जाये, तो एक पंथ दो काज हो जायेगा, यानी कि समुद्र या झील को भी नुकसान नहीं और मछलियों को भी भोजन मिल गया। ऐसी अनोखी मूर्तियों को क्ले और मछलियों के खाने जैसे मक्का, पालक, गेहूं , सब्जी और पाउडर जैसे भोजन के साथ तैयार किया गया है। मूर्तियों को आकार देने के लिए बायोडिग्रेडेबल कार्बनिक कलर्स जैसे हल्दी, चंदन और गेरू का इस्तेमाल किया है।

चॉकलेट गणपति 

कुछ लोग चॉकलेट के गणपति बनाकर उन्हें दूध में विसर्जित करते हैं और फिर उस दूध को गरीब बच्चों में बांट दिया जाता है। कई लोग चॉकलेट की गणेश प्रतिमा बाज़ार से खरीदते हैं तो कुछ घर पर ही गणपति बनाते हैं।

तो इस बार गणेशोत्सव ईको फ्रेंडली प्रतिमाओं के साथ हो रहा है और विघ्नहर्ता भगवान गणेश अपने भक्तों को पर्यावरण की समृध्दि का आशीर्वाद जरूर देंगे क्योंकि उसकी बनाई कुदरत को बचाकर रखना हमारा सबसे बड़ा धर्म है।

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