जाबांजी की मिसाल लांस नायक संदीप सिंह

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दिन रात सरहद की रखवाली करने वाले हमारे सैनिक ज़रूरत पड़ने पर देश के लिये अपनी जान तक न्यौछावर कर देते हैं। देश सेवा में अपने घर-परिवार तक को भूल जाते हैं, ऐसे ही एक बहादुर सिपाही थे लांस नायक संदीप सिंह।

समर्पण और त्याग की मिसाल

समर्पण और त्याग क्या होता है, यह कोई हमारी सेना और सैनिकों से सीखे। देश के प्रति उनका समर्पण और त्याग ही है, जिसके लिये वह मुस्कुराते हुये अपनी जान तक दे देते हैं। चाहे युद्ध हो या कोई भी आम दिन सीमा पर डटे जवान पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी करते हैं।

30 साल की उम्र में शहीद होने वाले लांस नायक संदीप सिंह ने भी बड़ी बहादुरी से आतंकियों का सामना किया था और तीन आतंकियों को ढ़ेर करते हुये खुद भी शहीद हो गये। 24 सितंबर 2018 को जम्मू-कश्मीर के तंगधार सेक्टर में हुये एनकाउंटर में पैरा कमांडो संदीप सिंह देश रक्षा में शहीद हो गये।

अपनी परवाह किये बिना बचाई साथियों की जान

संदीप सिंह के बारे में कहा जाता है कि एनकाउंटर के वक्त जब आतंकी गोलियां बरसा रहे थे, तो उन्होंने अपनी जान की परवाह किये बिना अपने कई साथियों की जान भी बचाई। जम्मू-कश्मीर में अक्सर ही इस तरह की मुठभेड़ होती रहती है, जिसमें हमारे कई बहादुर जवान शहीद हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद सेना में जाने के लिये लोगों का जज़्बा कम नहीं होता। यहां तक कि यदि किसी परिवार का एक बेटा शहीद हो जाता है, तो वह दूसरे बेटे को देश की सेवा के लिए सेना में भेजने को तैयार रहते हैं। ऐसे बेटे और उनके परिवार को हर देशवासी सिर झुकाकर नमन करता है।

जाबांजी की मिसाल लांस नायक संदीप सिंह
जाबांज को नमन | इमेज : फेसबुक

परिवार के पास रह जाती है बस यादें

लांस नायक संदीप सिंह के परिवार में उनकी पत्नी और 6 साल का बेटा है। बेटे को शायद अभी शाहदत का मतलब भी समझ नहीं आता होगा। यकीनन इतनी कम उम्र में पिता का साथ छूट जाने का दर्द उसे उम्रभर रहेगा, लेकिन जब वह हर किसी के मुंह से अपने पिता की बहादुरी के किस्से सुनेगा, तो उसे भी बहादुर सैनिक का बेटा कहलाने में बहुत फख्र होगा।

देश के प्रति आपका कर्तव्य

– हमारे सैनिक तो सरहद पर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं, लेकिन क्या देश के प्रति आप अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं

– ईमानदारी से टैक्स भरने से लेकर, सभी नियम-कायदों का पालन करते हैं?

– पब्लिक प्रॉपर्टी की रक्षा करने से लेकर, उसकी सफाई का ध्यान रखते हैं?

– देश को बाहरी दुश्मनों से बचाने की ज़िम्मेदारी अगर सेना की है, तो अपने देश को सभ्य, स्वच्छ और सुंदर बनाने की ज़िम्मेदारी हर नागरिक की होती है।

इमेज : फेसबुक 

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