जिसने संभाली देश की धड़कन

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96 साल की डॉ. शिवरामकृष्ण अय्यर पद्मावती ने  देश में कार्डिलॉजी को जन्म देकर लाखों लोगों के लिए भगवान का रूप बन गई हैं। डॉ. पद्मावती पिछले साठ सालों से मरीजों का उपचार कर रही हैं और आज भी उतनी ही फिट हैं जितनी साठ साल पहले थीं। उन्होंने अपना जीवन कार्डियोलॉजी की पढ़ाई और मरीजों के उपचार में बिता दिया, जिसके साथ-साथ वह इस क्षेत्र में रिसर्च भी करती आ रही हैं। वह भारत की पहली और सबसे बड़ी उम्र की हार्ट स्पेशलिस्ट हैं, जिन्होंने ना सिर्फ यूके और यूएसए से कार्डियोलॉजी की पढ़ाई की बल्कि अपने देश के बेहतरीन कार्डियोलॉजिस्ट्स को पढ़ाया भी हैं।

डॉ. पद्मावती की पहल

डॉ. पद्मावती ने कार्डियोलॉजी के क्षेत्र को बहुत करीब से जाना भी है और बढ़ते हुए भी देखा है। विदेश की कई प्रसिद्ध युनिवर्सिटीस में चिकित्सा की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने देश का पहला कार्डियोलॉजी क्लिनिक स्थापित किया।  उन्होंने भारतीय मेडिकल कॉलेज में पहला कार्डियोलॉजी विभाग बनाया और भारत में पहला डीएम कोर्स शुरु किया। दिल की बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए भारत के पहले ऐसे संस्थान की स्थापना की और इस क्षेत्र संबंधी कई असाधारण काम किए, जिसके लिए उन्हें बहुत बार सम्मानित भी किया गया हैं।

अपने योगदान के लिए मिला बहुत सम्मान

डॉ. पद्मावती को न सिर्फ नागरिकों को दिए जाने वाले देश के दूसरे सबसे बड़ा पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया बल्कि वह देश के नागरिकों को दिए जाने वाले तीसरे सबसे बड़े पुरस्कार पद्म भूषण से भी सम्मानित हुई हैं।

इमेजः हंस इंडिया

डॉ. पद्मावती का कार्यभार

पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. पद्मावती ने यूएसए जाकर प्रैक्टिस शुरु करने का मन बनाया था, लेकिन उन्होंने एक बार भारत आकर अपनी किस्मत आज़माने के बारे में सोचा और यकीनन उनका यह फैसला भारतवासियों के लिए एक वरदान जैसा रहा। सबसे पहले उन्होंने दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर पद संभाला और एक साल में प्रोफेसर बन गई। इसी जगह उन्होंने सबसे ज़्यादा रिसर्च की थी।

कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में किए गए बेहतरीन एक्सपेरिमेंट्स और रिसर्च की वजह से प्रॉफेसर और एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर उनकी बहुत मांग थी, जिसकी वजह से दिल्ली सरकार ने उन्हें एमएएमसी की डॉयरेक्टर-प्रिसिंपल का पद संभालने का आमंत्रण दिया। इसके अलावा डॉ. पद्मावती ने इर्विन हॉस्पिटल में डीएम कोर्स की शुरुआत की, जो उस समय की बहुत बड़ी उपलब्धि थी।

सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट के बाद भी वह काम करती रहीं और नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट सेट-अप करवाने में मदद की। गांव-देहात तक हृदय रोग और उनके कारणों के बारे में जानकारी पहुंचाने के लिए उन्होंने  ‘ऑल इंडिया हार्ट फाउंडेशन’ का गठन किया।

लंबी उम्र का मंत्र

फिट रहने के लिए डॉ. पद्मावती साल के छह महीने हर रोज़ स्विमिंग करती हैं और बाकी के महीनों में लंबी सैर के लिए जाती है। उनकी दादी की एक सौ तीन साल की लंबी उम्र रही है और शायद यह लंबा जीवन उनकी जीन्स में है।

उनकी ज़िंदगी वाकई में हम सभी को प्रेरणा देती हैं और अपने दिल का ध्यान रखने के लिए पौष्टिक खान-पान और रेग्युलर कसरत का महत्व सिखाती हैं।

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इमेजः ओपन द मैगज़ीन

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