जेब छोटी हुई तो क्या, दिल तो बड़ा है

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आजकल लोगों के अपने खर्चें ही पूरे नहीं होते ऐसे में किसी की मदद करना तो बहुत दूर की बात है। मदद के नाम पर अकसर लोग कह देते हैं कि आजकल खर्चे बहुत बढ़ गए हैं या फिर जितनी भी कमाई हो कम ही पड़ रही है। लेकिन कुछ लोगों के लिए तो मुसीबत में फंसे लोगों की मदद करने से बढ़कर कुछ नहीं होता। ऐसा ही कुछ झारखंड की डुमका डिस्ट्रिक्ट के बालिजोर गांव की कुछ महिलाओं ने केरल के बाढ़ग्रस्त लोगों के लिए किया।

कौन हैं ये महिलाएं

झारखंड के छोटे से गांव बालिजोर में करीब 300 महिलाएं ऐसी हैं जो डिस्ट्रिक्ट ऐडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर ‘बाली स्लिपर्स’ नाम के लोकल ब्रांड के लिए चप्पल बनाने का काम करती हैं। इन महिलाओं की दिन की कमाई करीब 250 रुपये होती है, जिससे यह अपने परिवार का पेट पालती हैं और साथ ही भविष्य के लिए थोड़ा बहुत जोड़ती हैं।

क्या भेजा बाढ़ पीड़ितों के लिए

चप्पल बनाने का काम कर रही महिलाएं केरल में आई बाढ़ के बारे में लगातार सुन रही थी और उन सब को सुनकर बहुत बुरा लग रहा था कि लाखों लोग बाढ़ से बेघर हो गए हैं। महिलाएं पीड़ितों की मदद करना चाहती थीं लेकिन आर्थिक तंगी के कारण रिलीफ फंड में पैसे नहीं भेज सकती थी। सारी महिलाएं कुछ ऐसा करना चाहती थी, जिसका इस्तेमाल बाढ़ पीड़ित कर सके। काफी सोचने के बाद सभी ने चप्पलें बनाकर भेजने पर काम करना शुरू किया। इस काम को पूरा करने के लिए हर महिला ने अपना एक दिन का वेतन लिए बगैर काम किया और 1000 जोड़ी चप्पल केरल भेजने के लिए तैयार की।

एक दिन की कमाई बाढ़ पीड़ितों के नाम

एक चप्पल बनाने में 70 रुपये लागत आती है, इसलिए 1000 जोड़ी चप्पलों का खर्चा 70,000 रुपये आया। 300 महिलाओं ने अपने एक दिन की आमदनी नहीं ली, जो करीब 75000 रुपये हुई थी और इन पैसे से बनी चप्पलों को केरल भेजा गया।

किसकी मदद से भेजा

डुमका के डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर (डी.डी.सी), वरुण रंजन ने ये 1000 जोड़ी चप्पलें एक गाड़ी से केरल भिजवाई। उनके मुताबिक बाढ़ पीड़ितों की मदद के इस अनोखे आइडिये का क्रेडिट गांव की महिलाओं को जाता है। प्रशासन ने इसमें केवल ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा उठाया है।

इन महिलाओं ने मदद का एक नया रास्ता दिखाकर दूसरों को भी प्रेरित किया है कि वह आगे आकर दूसरों की मदद करें। अगर कुछ करने की नीयत हो तो रास्ते अपने-आप खुल जाएंगे और झारखंड की महिलाओं ने यह करके भी दिखाया हैं। कभी-कभी छोटी सी की गई मदद भी किसी का सहारा बन सकती है और उसकी ज़िंदगी में रोशनी भर सकती है।

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