दुखी होने पर क्यों आता है गुस्सा?

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जीवन में जब कुछ मन मुताबिक नहीं मिलता या कोई अपना छोड़कर चला जाता है, तो उस दुख को शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। ये दुख कभी आंखों से आंसू, चेहरे पर उदासी तो कभी गुस्से के रूप में बाहर आता है। अक्सर दुखी होने पर हमें गुस्सा आता है, आखिर ऐसा क्यों?

स्वीकार नहीं कर पाते

सुख-दुख तो जीवन में लगे रहते हैं, लेकिन कई बार जब कोई अपना हमें छोड़कर चला जाता है तो हम उसके बगैर जीवन गुज़ारने की सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पाते। फिर गुस्से में कहते हैं ‘ये ठीक नहीं हुआ, भगवान को ऐसा नहीं करना चाहिये।’  दरअसल, गुस्से की यह भावना कई बार बाकी भावनाओं को छिपा देती है जैसे अकेले ज़िंदगी जीने का डर, हालात के आगे कमज़ोर पड़ना आदि। कुल मिलाकर सच्चाई को स्वीकार न कर पाने की वजह से ही गुस्सा आता है।

दुखी होने पर क्यों आता है गुस्सा?
भावनाओं का न होना ही गुस्सा है  | इमेज : फाइल इमेज

निराश होना

दिल को गहरी चोट पहुंचाने वाली घटना को लेकर जब हमारा गुस्सा शांत होता है, तो हम गहरी निराशा में चले जाते हैं। आसपास क्या हो रहा है उससे कोई मतलब नहीं रहता, बस ऐसा महसूस होता है कि हमारी ज़िंदगी में अब कुछ बचा ही नहीं है, उस जाने वाले के साथ हमारी सारी खुशियां और जीने का मकसद भी चला गया है।

तोल-मोल

एक मां दुर्घटना में अपना बेटा खो देती है। जाहिर है उसके लिए यह जीवन का सबसे बड़ा दुख है, जिससे जल्दी उबर पाना मुश्किल नहीं है। लेकिन दुख की इस घड़ी में भी उसके मन में बार-बार विचार आता है, ‘काश! हाथ-पांव टूट जाते, लेकिन वो बच जाता। भले ही हॉस्पिटल में महीनों पड़ा रहता लेकिन जिंदा तो रहता।’ अक्सर गहरे दुख में इंसान स्थितियों का मोल-भाव करने लगता है कि ऐसा नहीं होता तो कितना अच्छा होता, वैसा होता तो अच्छा रहता आदि।

स्वीकार करना

जीवन में कोई गहरा दुख आने पर कुछ लोग इस सच्चाई को जल्द स्वीकार करके उससे उबरने की कोशिश करने लगते हैं, पर कुछ ऐसे भी होते हैं, जिन्हें सच्चाई स्वीकारने में समय लगता है। जब एक बार वह सच्चाई स्वीकार कर लेते हैं, तो गुस्से की भावना अपने आप खत्म हो जाती है।

दूसरी चीज़ों पर करें फोकस

जीवन में सुख-दुख तो लगे रहते हैं, लेकिन दुख की घड़ी को हमेशा मन में बसाकर उदास रहने की बजाय उस दुख से खुद और अपनों को बाहर निकालने की कोशिश करें। इसके लिये ज़रूरी है कि हादसे से अपना फोकस दूसरी तरफ मोड़े। बेहतर होगा कि आप थोड़ा बाहर घूमने निकल जायें, बीच की सैर कर आयें, थोड़ी शॉपिंग कर लें, अपने किसी खास दोस्त से दिल की बातें शेयर करें आदि। इस तरह से आपके दिल का दर्द और दुख कम हो जायेगा। सच्चाई को जितनी जल्दी स्वीकार कर लिया जाए उतना अच्छा होता है।

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