परमवीर चक्र से सम्मानित राइफलमैन संजय कुमार

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हर कोई शांति चाहता है, लेकिन कई बार हालात युद्ध के लिए विवश कर दें, तो ऐसे में सेना अपने साहस का परिचय देती है। साल 1999 में कारगिल में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। हाल ही में कारगिल में हुये ऑपरेशन विजय को 20 साल पूरे हुये है और इस युद्ध में अदम्य साहस दिखाने वाले सैनिकों को सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में राइफलमैन संजय कुमार का नाम भी शामिल है।

चार को मिला परमवीर चक्र

कारगिल युद्ध में अपने साहस और सूझबूझ से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिये चार बहादुर सैनिकों को हाल ही में परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, मगर यह सम्मान पाने वाले संजय कुमार अकेले जीवित सैनिक हैं। अन्य तीन शहीद हो चुके हैं। जब कारिगल युद्ध हुआ था तो संजय राइफलमैन थे, फिलहाल वह सूबेदार हैं।

निडर और साहसी

सेना में आने वाला हर जवान निडर और साहसी होता है, तभी तो हथियारों से लैस दुश्मनों के सामने भी उन्हें निहत्था जाने से डर नहीं लगता। संजय कुमार भी बेहद निडर और साहसी हैं, कारगिल युद्ध के दौरान उनकी टीम को मश्कोह घाटी में पॉइंट 4875 पर कब्ज़ा करने की ज़िम्मेदारी दी गई थी। वह आगे बढ़ ही रहे थे कि दुश्मनों ने हमला कर दिया। अपने साहस का परिचय देते हुए संजय कुमार ने तीन घुसपैठियों को मार गिराया, हालांकि वह खुद भी घायल हो गये थे। हैरानी की बात है कि उन्होंने दुश्मन की ही मशीनगन छीनकर उनको मारा। छाती और बांह में गोली लगने के बाद भी संजय वहां से गये नहीं और अपने साथियों की मदद से मिशन पूरा किया।

परमवीर चक्र से सम्मानित राइफलमैन संजय कुमार
राइफलमैन संजय कुमार की बहादुरी पर सम्मान| इमेज : ट्विटर

देशभक्ति का जज़्बा

संजय कुमार को देशभक्ति का जज़्बा ही सेना में खींच लाया। सेना में आने से पहले वह टैक्सी ड्राइवर की नौकरी करते थे और सेना में भर्ती के लिये उनकी एप्लीकेशन तीन बार खारिज हुई थी। चौथी बार में जाकर उनका सिलेक्शन हुआ। इससे पता चलता है कि उनमें अपने लक्ष्य को लेकर कितना दृढ निश्चय हैं। एक बार जो मन में ठान लिया, उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं। वैसे सैनिक जितने बहादुर होते हैं, उनका परिवार भी उतना ही साहसी और बहादुर होता है। परिवार के सहयोग की बदौलत ही तो सैनिक अपने पिता, बेटे और पति होने का धर्म छोड़ सबसे पहले भारत माता के सपूत का फर्ज़ निभाते हैं।

सैनिकों के लिये आप कर सकते हैं

– किसी युद्ध या आतंकी घटना में शहीद हुये सैनिकों के परिवार और बच्चों की आर्थिक और सामाजिक रूप से मदद की जानी चाहिये।

– शहीदों के बच्चों की शिक्षा और नौकरी सुनिश्चित की जानी चाहिये।

– देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले किसी सैनिक का परिवार एक अच्छी ज़िंदगी जी सके, यह सुनिश्चित करना भी बेहद ज़रूरी है।

इमेज : ट्विटर

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