बच्चे के अनोखे तरीके ने सरकारी स्कूल को बनाया बेहतर

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हालांकि हमारे देश के सरकारी स्कूलों की हालत बहुत अच्छी नहीं है, मगर अमेरिका में रहने वाले एक 16 साल के बच्चे ने भारत के एक सरकारी स्कूल की तस्वीर ही बदल दी और उसने जो काम किया है, वाकई हैरान करने वाला है।

दादाजी के स्कूल की हालत देख दुख हुआ

अमेरिका के डेनवर में रहने वाला 16 साल का कृतिक रमेश जब भारत में अपने गांव आया, तो वह उस स्कूल को देखना चाहता था, जिसमें उसके दादाजी ने पढ़ाई की थी। जब वह अटूर के देवीयाकुरुची सरकारी स्कूल में दाखिल हुआ, तो स्कूल की हालत देखकर कृतिक के होश उड़ गए। स्कूल की खस्ता हालत देखकर कृतिक को बहुत दुख हुआ। स्कूल में न सिर्फ गंदगी फैली थी, बल्कि कोई ज़रूरी सुविधा भी नहीं थी। स्कूल की टीचर ने कृतिक से जब कहा कि देश के सभी सरकारी स्कूलों की स्थिति कमोबेश यही है, तो कृतिक ने स्कूल की दशा सुधारने की ठान ली।

खुद दिए छह हज़ार डॉलर

स्कूल की मदद के लिए कृतिक ने अपने पिता और दादा जी की सहायता से एक एनजीओ बनाया, लेकिन जल्द ही उसे समझ आ गया कि बिना फंड के कोई काम नहीं हो सकता। उसके परिवार वालों ने उसे स्पॉन्सर ढूंढ़ने की सलाह दी, लेकिन कृतिक के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। उसे पीट्सबर्ग में हुए साइंस फेयर में जीतने पर तीन हज़ार डॉलर ईनाम में मिले थे, साथ ही उसने अपने बचाये हुए तीन हज़ार डॉलर भी स्कूल की मदद के लिए खर्च करने का फैसला किया।

स्कूल को दिया तोहफा | इमेज: वायएसजी सोलर

स्कूल में सोलर पैनल

फंड का बंदोबस्त होने के बाद कृतिक ने स्कूल प्रशासन ने बात की, उन्होंने कहा कि स्कूल में यदि एक सोलर पैनल लग जाता, तो उनकी बहुत मदद हो जाती क्योंकि वहां अक्सर बिजली की कटौती होती रहती है। कृतिक ने परिवार वालों के साथ मिलकर सोलर पैनल लगाने वाली कई कंपनियों से बात की। आखिर में एक से बात पक्की हो गई। स्कूल में सोलर पैनल लग जाने से न सिर्फ बिजली जाने की समस्या खत्म हो गई, बल्कि स्कूल का बिजली बिल भी बच गया।

हर दो महीने में स्कूल को करीब 15000 का बिल भरना पड़ता था। कृतिक की मदद से स्कूल की बहुत बड़ी समस्या हल हो गई। अब बिजली से बचे पैसे का इस्तेमाल स्कूल की दूसरी ज़रूरतें पूरी करने के लिए किया जा सकता है। सोलर पैनल से दो केवी बिजली पैदा होती है, जो स्कूल की ज़रूरत से कहीं ज़्यादा है। कृतिक ने स्कूल को अतिरिक्त बिजली तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को बेचने की भी सलाह दी है। कृतिक चाहता है कि वो ज़्यादा से ज़्यादा प्रतियोगिता जीते ताकि उसमें मिली ईनाम की राशि से सरकारी स्कूलों की मदद कर सके।

ऐसे नेक काम के लिए कृतिक रमेश को हमारा सलाम।

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इमेज: चेरीक्रीक

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