बहुत आसान है वर्क-लाइफ बैलेंस करना

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‘बेहतर लाइफ के लिए, बेहतर काम’ आज ये हर किसी की ज़रूरत है। अगर वर्क और लाइफ को एक ही सिक्के के दो पहलू कहा जाये, तो गलत नहीं होगा, लेकिन वर्क के साथ लाइफ को बैलेंस करना खुद की सेहत और दूसरों के लिये बहुत ज़रूरी है।

क्यों जरूरी है ये बैलेंस?

कॉम्पटीशन के इस दौर में पहले काम पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है और जब काम मिल जाता है, तो कुछ ही समय में क्वालिटी लाइफ के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में वर्क और लाइफ के बीच बैलेंस बना पाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसी बातें, जो इसे बैलेंस करने में आपकी मदद करेंगी-

बदलाव को स्वीकार करके

कुछ सफल लोगों का मानना है कि अनुशासन जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है और यह भी सच है कि अधिकतर लोगों के जीवन में अनुशासन कभी भी नैचुरली नहीं आता। इसलिए इसके लिए किसी भी बदलाव की जरूरत पड़े, तो आपको उससे पीछे नहीं हटना चाहिए।

प्राथमिकता निर्धारित करें

अक्सर देखा जाता है कि लोगों की पसंद के अनुसार उनका झुकाव होता है, जैसे किसी का झुकाव काम के प्रति तो किसी का फैमिली, फ्रेंड्स या खेल के प्रति होता है लेकिन कुछ लोग शर्म या संकोच के चलते प्राथमिकताओं को ज़ोर नहीं दे पाते, इसलिए बेहतर बैलेंस के लिए प्राथमिकताओं को निर्धारित करें।

बहुत आसान है वर्क-लाइफ बैलेंस करना
सुकून के लिये वर्क लाइफ करें बैलेंस  | इमेज: फाइल इमेज

समय का सही बंटवारा

अगर हमें टाइम का सही इस्तेमाल करना है, तो इसके लिए ज़रूरी है कि समय का सही बंटवारा किया जाये। इसके लिए डेली रूटीन को डायरी में लिखना, सोने से पहले अगले दिन के टारगेट निर्धारित करना आदि शामिल होना चाहिए।

खरगोश नहीं बल्कि कछुए की स्पीड अपनायें

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अगर आप बेहतर बैलेंस चाहते हैं, तो लम्बी छलांग की जगह छोटे क़दमों को तरहीज़ दें। जैसे कि एक हफ्ते में ज़्यादा से ज़्यादा दो छोटे बदलाव करें और फिर उन्हें अपने रूटीन में लाने की कोशिश करें।

टेक्नोलॉजी से दूरी बनायें

भले ही आज टेक्नोलॉजी का ज़माना है, लेकिन यह भी याद रखें कि इससे दूरी बनाना भी उतना ही ज़रूरी है। इसलिए हफ्ते में एक दिन जब काम से रिलीफ हो, तो मोबाइल और लैपटॉप से दूरी रखें और सारा समय परिवार और दोस्तों के साथ बितायें।

ना कहने की आदत डाले

यह एक ऐसा टर्म जो वर्क के साथ साथ दैनिक जीवन में भी उपयोगी होता है। ना कहने की आदत कई बार आपको परेशानी से तो बचाती ही है, साथ ही ज़्यादा मेच्योर भी बनाती है।

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