मुंबई बनेगी ईकोफ्रेंडली

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नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने कूड़े को छांटने और कंपोस्ट करने, बारिश के पानी को हार्वेस्ट करने और सोलर पावर जनरेट करने की दिशा में कई कदम बढ़ाए हैं। इसका मकसद साल 2019 में होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण सर्वे में अपनी रैंकिंग सुधारने का है। इस सर्वे में भारत के शहरों को स्वच्छता और सफाई के कई मानको पर आंका जाता है।

जाने कैसी है यह पहल?

नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की इस स्कीम के तहत 200 सोसायटी को टार्गेट किया जा रहा है और इसकी अवधि दो साल है। इस स्कीम को दो भागों वेस्ट सेग्रीगेशन एंड कंपोसिटिंग और एनर्जी एंड वॉटर कंज़र्वेशन में बांटा गया है। दोनों कैटेगरी में से किसी में भी जीतने वाली सोसायटी में अगर पांच सौ फ्लैट होंगे, तो उसे पच्चीस हज़ार का इनाम मिलेगा। जिस सोसायटी में 200-499 फ्लैट होंगे, उसे बीस हज़ार, 50-199 फ्लैट वाली सोसायटी को 15 हज़ार और पचास फ्लैट की सोसायटी को दस हज़ार रुपये का इनाम मिलेगा।

कैसी होगी आइडियल सोसायटी?

किसी भी सोसायटी को आइडियल बनने के लिए इन मानकों पर खरा उतरना होगा।

  • वेस्ट ट्रीटमेंट – सोसायटी को अपने ही कंपाउंड में कचरे को वर्मी और कंपोस्ट तरीके से ट्रीट करना होगा। इस प्रक्रिया से बने कंपोस्ट को आसपास के बगीचों के लिए इस्तेमाल करना होगा।
  • पावर जेनरेशन – सोसायटी में बिजली पहुंचाने वाली लाइन में सोलर पैनल कनेक्ट करना होगा। नगर निगम के साथ जुड़कर अपने बिजली बिल में से उतनी रकम कम करवानी होगी, जितने का सोलर पैनल बिजली उत्पादित करेगा।
  • वॉटर हार्वेस्टिंग – टैंक बनाकर या किसी प्राकृतिक जगह पर बरसात का पानी इकट्ठा करना होगा, जिसे पाइप के ज़रिए इस्तेमाल में लाना होगा। इस पानी को टॉयलेट्स, पौधों की सिंचाई या फिर फायर-फाइटिंग के लिए इस्तेमाल करना होगा।
पर्यावरण को बेहतर करने की कोशिश | इमेज: हिंदुस्तान टाइम्स

इस योजना को ‘ग्रीन एंड क्लीन ड्राइव’ के तहत बनाया जा रहा है, जिससे लोग पर्यावरण के अनुकूल तरीकों को अपनाएं। पिछले साल नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए, पूरे देश में पहले स्थान पर आई थी। इस साल सर्वे होने से पहले म्युनिसिपलटी का लक्ष्य शहर को ‘ज़ीरो गार्बेज एरिया’ बनाने का है।

सोसायटी बनी मिसाल

केवल नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ही नहीं बल्कि बीएमसी की भी कोशिश है कि शहर को साफ-सुथरा और ईकोफ्रैंडली बनाया जाए। यहां भी ऐसी दो सोसायटी हैं, जो स्वच्छता में दूसरों के लिए मिसाल बन सकती हैं।

  • मैराथन एरा – यह सोसायटी लोअर परेल में है और इस के 236 फ्लैट्स से निकलने वाला कूड़ा हर दिन माइक्रो सेग्रीगेट होता है। सूखे कचरे को अलग करने के लिए यहां डेडीकेटिड स्टाफ को भी नियुक्त किया गया है।
  • शतदाल सोसाइटी – अंधेरी की इस सोसाइटी में 99 फ्लैट हैं, जहां से निकले कूड़े को वर्मी और बायो कंपोस्ट से ट्रीट किया जा सकता है।

हालांकि नवी मुंबई और मुंबई का यह कदम बेहद सराहनीय है लेकिन इसे सिर्फ सरकार या नगर निगम पर ही नहीं छोड़ना चाहिए बल्कि सभी को इस ज़िम्मेदारी का एहसास होना चाहिए।

इमेज: हिंदुस्तान टाइम्स

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