मुश्किलों से लड़कर बने लाखों की प्रेरणा

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इस दुनिया में ना जाने ऐसे कितने लोग होंगे, जो छोटी-छोटी परेशानियों से हार मानकर उदास हो जाते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो असाधारण तरीके से मुश्किलों का सामना करते हुए दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। ऐसे लोग यह नहीं कहते कि ‘मैं ही क्यों’’ बल्कि डॉ. साई कौस्तुभ दासगुप्ता जैसे लोग मानते हैं कि ‘मैं क्यों नहीं’। जी हां, डॉ. साई कौस्तुभ दासगुप्ता का 90 प्रतिशत शरीर काम नहीं करता। उनकी सिर्फ एक अंगुली काम करती हैं और  उसी एक अंगुली की मदद से आज न सिर्फ उन्होंने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है बल्कि दूसरों को खुशी से जीने की एक उम्मीद दिखाई हैं।

डॉ. साई कौस्तुभ दासगुप्ता

हर कोई तेज़ भागती ज़िंदगी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहता है और शायद इसी भागदौड़ के बीच लोग छोटी-छोटी खुशियों को नज़रअंदाज़ कर हंसना भूल जाते हैं। इन्हीं खुशियों से पहचान कराते हैं, हैप्पीनेस कोच डॉ. साई कौस्तुभ। कॉर्पोरेट्स से लेकर डॉक्टर्स और स्टूडेंट्स से लेकर पीएचडी होल्डर्स सभी डॉ. कौस्तुभ को फॉलो करते हैं। वह भारत में ही नहीं अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, इंडोनेशिया, नेपाल जैसे कई देशों में सेशन्स लेते हैं। डॉ. कौस्तुभ की माने तो चमत्कार उन्हीं के साथ होते हैं, जो कुछ करने की कोशिश करते हैं। मोटिवेशनल स्पीकर होने के साथ-साथ वह अंतरराष्ट्रीय ग्राफिक डिज़ाइनर, लेखक, सिंगर और कंपोज़र भी हैं। उनकी लिखी किताब ‘माई लाइफ, माई लव, माई डियर स्वामी’ 9 भाषाओं में ट्रांस्लेट की गई हैं।

इमेजः फाइल इमेज

क्या हुआ था?

बचपन में डॉ. कौस्तुभ को डांस करने का शौक था और वह केवल 5 साल के थे, जब उनको डॉक्टर ने डांस करने से मना कर दिया। इतनी छोटी उम्र में उन्हें समझ ही नहीं आया कि वह ब्रिटिल बोन डिज़ीज़ से पीड़ित हैं। इस बीमारी की वजह से उनकी कोई भी हड्डी आसानी से टूट सकती है और फिलहाल 27 साल की उम्र तक पहुंचते पहुंचते उनकी अब तक 50 से ज्यादा बार हड्डियां फ्रैक्चर हो चुकी हैं। इसके साथ उन्हें सुनने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और शरीर की सिर्फ एक अंगुली काम करती है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय डिज़ाइन बनाते हैं। हालांकि वह इलेक्ट्रिक व्हील चेयर से ही कहीं जा सकते हैं लेकिन उनके काम ने उनकी पहचान को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा दिया हैं।

साई के नाम खिताब

डॉ. कौस्तुभ ने उल्टे हाथ की एक अंगुली से माउस और ऑन-स्क्रीन की-बोर्ड चलाकर फास्टेस्ट वर्चुअल टाइपिंग स्पीड के साथ करीब 10 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड्स बनाए हैं। उन्हें लीडरशिप ट्रेट्स के लिए चौथे ग्लोबल आईकन की उपाधि से नवाज़ा गया हैं। वह अपने माता-पिता को प्रेरणा और ताकत मानते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के उनके रोज़ाना के कामों में मदद करते हैं। माता-पिता के साथ-साथ डॉ. कौस्तुभ का छोटा भाई भी उन्हें काफी उत्साहित करता है।

डॉ. कौस्तुभ की सोच है कि हर इंसान को खुश रहने का और सपने देखने का हक है और अगर आपके अंदर किसी चीज़ को करने का ढृढ़ संकल्प है, तो कोई भी आपको आसमान की ऊंचाई छूने से नहीं रोक सकता।

और भी पढ़े: पॉज़िटिव सोचिए और खुश रहिए

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