यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल हुआ ओरछा

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हमारा देश ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध है। तभी तो अब तक यहां की कई इमारतें और स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल हो चुकी है। मध्यप्रदेश का ओरछा भी जल्द ही इस लिस्ट में शामिल हो सकता है, फिलहाल इसे यूनेस्को की अस्थाई सूची में जगह मिली है।

खूबसूरत पर्यटन स्थल

ओरछा मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड का बेहद सुंदर पर्यटन स्थल हैं। यहां कई ऐतिहासिक महल और प्राचीन मंदिर हैं। यही वजह है कि इस जगह को यूनेस्को की विश्व धरोहरो की अस्थायी सूची में जगह मिली है। दरअसल किसी भी ऐतिहासिक विरासत या स्थल का विश्व धरोहर स्थलों की सूची में जगह पाने से पहले अस्थायी सूची में शामिल होना ज़रूरी है। अस्थायी सूची में शामिल होने के बाद अब एक मुख्य प्रस्ताव यूनेस्को को भेजा जायेगा। ओरछा अपने राजा महल या रामराजा मंदिर, शीश महल, जहांगीर महल, राम मंदिर, उद्यान और मंडप आदि के लिए प्रसिद्ध है।

यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल हुआ ओरछा
ओरछा की सुंदरता  | इमेज : फाइल इमेज 

श्रीराम का अनोखा मंदिर

ओरछा बेहद शांत और सुंदर पर्यटन स्थल है। यहां कई मंदिर है, जिसमें से श्रीराम का मंदिर बहुत खास है क्योंकि यहां भगवान के साथ ही उन्हें राजा भी माना जाता है। ओरछा में वीर हनुमान का मंदिर भी राजा राम के मंदिर के पास ही है।

मंदिर व महलों का नगर

ओरछा में 6 महल और 12 बड़े प्राचीन मंदिर है। रामराजा, चतुर्भुज व लक्ष्मीनारायण मंदिर के अलावा किले के अंदर बने राधाबिहारी, वनवासी, पंचमुखी महादेव, जानराय, कल्यान राय, राधावल्लभ, छारद्वारी, मकड़ारिया मंदिर , विंध्यवासिनी मंदिर, बेतवेश्वर का मंदिर शामिल हैं। किले के अंदर स्थित मंदिरों के समूह में पंचमुखी महादेव के मंदिर की स्थापत्य व चित्रकला का बेजोड़ नमूना है। राधावल्लभ मंदिर का सिंहद्वार 15वीं और 16वीं सदी की धार्मिक भवनों की भव्यता दर्शाते हैं।

यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल हुआ ओरछा
ओरछा की सुंदरता  | इमेज : फाइल इमेज 

नदी, जंगल और इतिहास का संगम

ओरछा की खासियत यह है कि यहां सांस्कृति और ऐतिहासिक इमारतें तो हैं ही, साथ ही खूबसूरत जंगल और नदियों का अनोखा संगम पर्यटकों को इसकी ओर खींचता है। ऐसा अनोखा मेल कम ही देखने को मिलता है। बेतवा नदी भी ओरछा का मुख्य आकर्षण स्थल है। नदी के किनारे बनी बुंदेल राजाओं की छतरियां व नदी के चित्रकूट नाम के टापू पर चतुर्भुज मंदिर की नकल करके बनाया गया प्राचीन मंदिर आज भी चारों ओर से जंगल और पानी से घिरे होने के कारण लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

इसके अलावा फूलबाग में पालकी के आकार का बना महल, पत्थर का चंदन कटोरा, लाल पत्थर से बना अठखंभा महल भी स्थापत्य के बेजोड़ नमूने हैं। कुल मिलाकर ओरछा सांस्कृति और ऐतिहासिक रूप से पूरी तरह समृद्ध है और यहां सैलानियों के लिए बहुत कुछ है। यदि आप भी ओरछा जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो अक्टूबर से मार्च तक का समय यहां घूमने के लिए बेस्ट है।

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