वॉलेंटियर बनने से बढ़ता है आत्मविश्वास

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आज के ज़माने में हर कोई बस अपने आप में बिज़ी है। उन्हें अपने आसपास के लोगों और समाज के दुख-दर्द से ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो स्वयंसेवक (वॉलेंटियर) बनकर सुविधाओं से वंचित लोगों की मदद कर रहे हैं। यदि हर संपन्न इंसान वॉलेंटियर बनकर दूसरे लोगों और समुदाय की मदद करने लगे, तो यकीनन लोगों की तकलीफें कम हो जायेगी।

क्यों बनें वॉलेंटियर?

वॉलेंटियर बनने पर आपको कोई आर्थिक लाभ तो नहीं होगा, हां यह सच है कि दूसरों की मदद करके दिल को जो सुकून मिलेगा, वह पैसों से नहीं मिल सकता। वॉलेंटियर बनकर न सिर्फ आप अभावों में जी रहे लोगों की मदद करते हैं, बल्कि इससे आपका व्यक्तिगत विकास भी होता है। आप अधिक सहनशील और दयालु बनते हैं। बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की सेवा करके आप समाज के विकास और भलाई में योगदान देते हैं और यह भावना आपको अच्छा महसूस कराती है।

स्कूल/कॉलेजों में कराई जा रही वॉलेंटियरिंग

वॉलेंटियरिंग एक संवेदनशील और सहनशील समाज बनाने के लिए कितना ज़रूरी है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आजकल स्कूल और कॉलेजों में बच्चों से वॉलेंटियरिंग करवाई जा रही है। इससे बच्चे समाज के वंचित तबकों की मदद करके खुद को उससे जुड़ा हुआ महसूस कर सके और उनकी तकलीफें दूर करने में मदद करें।

वॉलेंटियर बनने से बढ़ता है आत्मविश्वास
वॉलेंटियर बनने के फायदे  | इमेज: फाइल इमेज

समाज का हिस्सा हैं

दुनिया में कुछ लोग जहां सारी सुख-सुविधाओं से लैस होते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी है जिन्हें जीवन की बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे लोग भी हमारे समाज का ही हिस्सा है और उनकी अनदेखी नहीं की सकती। इसलिए सुविधा संपन्न लोगों की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वह ऐसे लोगों की मदद करें। कुछ लोगों को लगेगा कि यह तो सरकार का काम है, लेकिन ऐसा नहीं है एक ज़िम्मेदार नागरिक के भी तो समाज और लोगों के प्रति कुछ कर्तव्य होते हैं।

निःस्वार्थ सेवा

वॉलेंटियर (स्वयंसेवक) बनने का मतलब है कि आप लोगों की सेवा बिना किसी स्वार्थ के करेंगे। किसी की मदद करके मुझे क्या मिलेगा वाला भाव मन में नहीं होना चाहिये। निःस्वार्थ सेवा का भाव मन में आने पर ही कोई सही मायने में वॉलेंटियर बन सकता है।

बढ़ता है आत्मविश्वास

स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़ने के बाद आपको अपने आसपास की असल दुनिया को जानने-पहचानने का मौका मिलता है। अलग-अलग जगहों पर जाकर लोगों से मिलकर ढ़ेर सारे अनुभव मिलते हैं। कई संस्थाओं के काम करने का तरीका पता चलता है। इन सबसे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है, साथ ही इस काम को करने से मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। अध्ययन के मुताबिक वॉलेंटियरिंग के काम से लोग ज़्यादा सोशल बनते है, जिससे एंग्ज़ाइटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं दूर हो जाती हैं।

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