शहर को हराभरा और सेहतमंद बनाने का सपना

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राह में आने वाली मुश्किलों से पार पाने का हौसला हो, तो कोई भी काम असंभव नहीं होता। कुछ ऐसा ही किया है, चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल के पोस्ट पर काम कर रहे देवेंद्र सूरा ने, जो पिछले छह साल से अपने शहर सोनीपत को ‘ग्रीन सोनीपत, हेल्दी सोनीपत’ बनाने की दिशा में जी-जान से जुटे हैं। इसकी प्रेरणा उन्हें चंडीगढ़ से मिली है, जो अपनी शानदार हरियाली के लिए देशभर में जाना जाता है।

सारी सैलरी कर देते हैं खर्च

हालांकि, देवेंद्र सूरा ने जो बीड़ा उठाया है, उसमें वक्त के साथ पैसे की भी पर्याप्त जरूरत है, लेकिन देवेंद्र ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने साल 2012 में इस पहल की शुरूआत की थी और तब से वह अपनी जेब से 28 से 30 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। उनकी कोशिशों की वजह से आज यह पहल सोनीपत मुख्य शहर के अलावा जिले की 152 गांव पंचायतों तक पहुंच गई है। वह जिले और उसके आसपास के इलाके के 2000 से अधिक यूथ से जुड़े हुए हैं और ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर पेड़ लगाने का काम कर रहे हैं।

झेलना पड़ता है फैमिली का विरोध

दरअसल, देवेंद्र अपनी सारी सैलरी और समय इस पहल को पूरा करने में खर्च कर देते हैं और इसलिए उन्हें अपनी फैमिली का विरोध भी झेलना पड़ता है। उनकी महीने की पूरी सैलरी सोनीपत को हराभरा बनाने में चली जाती है और उनके पिता की पेंशन से घर चलता है।

इमेजः इंडिया टाइम्स

ग्रीनरी के लिए किया कॉर्बूसि को फॉलो

देवेंद्र सूरा को अपने शहर को हराभरा बनाने का ख्याल चंडीगढ़ शहर को देखकर आया। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ की हरियाली से प्रभावित होकर मैंने भी अपने होमटाउन सोनीपत को हराभरा बनाने का सोचा। इसके लिए कॉर्बूसि ने चंडीगढ़ में जो किया था, उसे फॉलो करने का फैसला किया, यानी एक सड़क पर एक ही तरह का पेड़ लगाना। कॉर्बूसियर ने ‘पिलखान’ को चुना था और मैंने भी ऐसा किया, क्योंकि पिलखान तेजी से बढ़ता है, जो क्षेत्र को ग्रीन बनाने में मदद करता है। इसी तरह पीपल भी एक ऐसा पेड़ है, जिसे लोग काफी पसंद करते हैं, क्योंकि यह न केवल एक बड़े क्षेत्र को कवर करता है, बल्कि घनी छाया देने के साथ वातावरण को पर्याप्त ठंडा रखने में मदद भी करता हैं।

लगाई अपनी नर्सरी

आज देवेंद्र सूरा के पास पौधों के सभी प्रकार हैं लेकिन, एक वक्त ऐसा भी था, जब उन्हें पौधे खरीदने के लिए लोन लेना पड़ा था। अब वह खुद अपने प्रयास से पौधों को विकसित करने लगे हैं। देवेंद्र ने किसानों के साथ रहकर नर्सिंग की बारीकियों को सीखा और उसके बाद 50 हजार रुपये सालाना किराये पर प्लॉट लेकर अपनी नर्सरी लगाई है।

अपने शहर को ग्रीन बनाने की देवेंद्न सूरा की इस कोशिश को हमारा सलाम।

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इमेजः ट्रिब्यून

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