शहीदों को श्रद्धांजलि, किसानों को पानी

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फरवरी में जम्मू-कश्मीर में हुये आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गये थे। इस घटना के बाद राजनेता से लेकर कई सेलिब्रिटीज़ तक ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुये अपने-अपने तरीके से उनके परिवारों की मदद करने की कोशिश की, लेकिन महाराष्ट्र के नागपुर जिले के लोगों ने जिस अंदाज़ में शहीदों को श्रद्धांजलि दी, ये जानकर आपको उन पर गर्व होगा।

किसानों की मदद

शहीदों की याद और सम्मान में कोई कैंडल जलाता है, तो कोई मोर्चा निकालता है, लेकिन नागपुर के जिला परिषद कर्मचारियों ने शहीदों को बहुत अनोखे अंदाज़ में श्रद्धांजलि दी। दरअसल, ये लोग किसानों की पानी की समस्या हल करने में जुटे हुये हैं क्योंकि इनका मानना है कि ज़्यादातर जवान गांव और किसान परिवार से आते हैं, इसलिये किसानों की मदद करने से बेहतर श्रद्धांजलि उन्हें और क्या हो सकती है।

रात भर किया काम

नागपुर जिला परिषद के कर्मचारियों ने हर शहीद जवान के सम्मान में एक गांव को गोद लिया है और पिछले चार महीने से काम पर लगे हुये हैं। ये हर सप्ताह आधी रात तक फ्लडलाइट्स की रोशनी में गड्ढे और छोटी-छोटी नहरें बनाते है ताकि बारिश का पानी जमा हो सके। दरअसल, जिला परिषद के कर्मचारियों ने एक मीटिंग के दौरान ये फैसला लिया। किसान पानी की भयंकर समस्या से जूझ रहे हैं, इसलिये बारिश के पानी को जमा करने का फैसला किया गया।

शहीदों को श्रद्धांजलि, किसानों को पानी
गांववालों ने अनोखे अंदाज़ में दी शहीदों को श्रद्धांजलि  | इमेज : फाइल इमेज

कर्मचारियों ने जुटाये फंड

इस काम के लिए नारखेड तालुका को चुना गया क्योंकि यह सूखे से सबसे ज़्यादा प्रभावित है। इस काम के लिये फंड शुरुआत में नगर परिषद कर्मचारियों ने खुद ही जुटाये। फिर जिला परिषद की योजनाओं के तहत भी फंड मिलता गया और प्रशासन से भी मदद मिली। हर गांव में बड़े-बड़े बैनर लगाकर एक शहीद की तस्वीर के साथ प्रॉजेक्ट के बारे में बताया गया है। गांववालों ने भी इस काम में मदद की। जिला परिषद कर्मचारी भी हर सप्ताह जाकर काम में जुट जाते थे। गर्मी के मौसम में तो कई बार सुबह तीन बजे तक काम होता रहता था।

मॉनसून का इंतजार

पहले चरण में गड्ढ़े और छोटी नहरों की खुदाई का काम तो हो चुका है और अब बारिश का इंतज़ार किया जा रहा है। इसके बाद काम आगे बढ़ेगा। बारिश में गड्ढ़े और नहरें यदि भर जाती हैं तो पानी की समस्या को काफी हद तक कम हो सकती है।

शहीदों को ऐसी श्रद्धांजलि शायद ही आज तक किसी ने दी होगी।

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