100 साल की दादी मां ने अपनी कला से बनाई पहचान

कला की कोई उम्र नहीं होती
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जहां लोग 70- 80 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते बिस्तर पकड़ लेते हैं या फिर सिर्फ अपने तक ही सीमित रहते हैं, वहीं एक दादी मां हर रोज़ बारीक से बारीक काम बड़े आराम से कर लेती है। उनके लिए कला ही उनकी सबसे अच्छी सहेली है। हम बात कर रहे हैं केरल के त्रिशूर जिले में रहने वाली पद्मावती नायर की। ये दादी 100 साल की उम्र में साड़ियों पर हाथ से पेंटिंग साड़ियां बनाकर न सिर्फ अपनी शौक पूरा करती है, बल्कि अपनी पहचान भी बना रही है। 

बचपन से ही पेंटिंग था शौक

पद्मावती दादी को बचपन से ही पेंटिग करती आई है, लेकिन कभी इतना ध्यान नहीं दिया था। शादी के बाद भी उन्हें हमेशा से ही सिलाई-कढ़ाई का शौक रहा और इस शौक को वह अपने बच्चों के कपड़े सिलकर पूरा करती थी। समय के साथ उनके हुनर और भी निखरता रहा। जब भी समय मिलता तो कपड़े पर पेटिंग करना शुरु कर देती थी।

कहां से मिली प्रेरणा

60 साल के बाद पद्मावती ने पेंटिंग करना फिर शुरू किया। उनकी इस खूबसूरत कला को देखकर उनकी बेटी लता ने उन्हें ये काम करने के लिए प्रेरित किया। पद्मावती की बेटी लता भी खुद डिज़ाइनर है।

पेंटिग के लिए समय है निर्धारित

पद्मावती दादी ने हर रोज़ पेंटिंग और डिजाइनिंग के लिए 3 घंटे का समय तय किया है। वह रोज़ सुबह 10:30 बजे साड़ी पर डिज़ाइन बनाने और उस पर पेंटिंग करने  में  बिताती है। उनका कहना है कि इस काम से उन्हें संतुष्टि मिलती है।

दादी मां की सुंदर कला की झलक | इमेज : ओंनमनोरना.कॉम

धैर्य और चुनौतीपूर्ण है काम

तुषार सिल्क की साड़ी या दुपट्टे पर हाथ से डिज़ाइन करने में काफी समय लगता है। यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण भी है क्योंकि इसके लिए सावधानी भी बरतनी होती है। उम्र में इस पड़ाव में भी पद्मावती अपने काम को बहुत ही धैर्य से करती है। वह पहले डिजाइन की रूपरेखा तैयार करती है और फिर उसे रंगों से भर देती है। एक साड़ी पर काम पूरा करने में लगभग एक महीने का समय लगता है।

नये ज़माने की होती है डिज़ाइन्स

दादी मां की बनाई गई साड़ियों की खास बात यह है कि उनके डिजाइन्स बिल्कुल मॉडर्न और संस्कृति से जुड़े होते हैं, जो लोगों को काफी पसंद आते हैं। वह सोशल मीडिया और व्हाट्सएप आदि के ज़रिए अपनी साड़ियों की प्रमोशन भी करती है। इस काम में वह जो पैसा कमाती है, वह खुशी से अपने पोते पर खर्च करती है।

हर समय एक्टिव रहने वाली 100 साली की दादी ने साबित कर दिया कि शौक आपकी बढ़ती उम्र के साथ खत्म नहीं होते। पद्मावती नायर हर उस शख्स के लिए प्रेरणा हैं, जो बढ़ती उम्र में अपने सपनों को पीछे छोड़ देते हैं।

इमेज : ओंनमनोरना.कॉम

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