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जीवन में कर्म के 12 नियम

जीवन में कर्म के 12 नियम

  • कर्म का जीवन पर पड़ता है प्रभाव
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जीवन में कोई भी मनुष्य, किसी भी अवस्था में, कर्म किये बिना नहीं रह सकता यानी हर पल कर्म कर रहा है। कभी विचारों के माध्यम से, शब्दों के माध्यम से, क्रियाओं के माध्यम से जो हम खुद करते हैं और जो हमारे निर्देश पर दूसरे करते हैं। इसका मतलब यह है कि वह सब कुछ जो हमने सोचा, कहा ,किया या कारण बने – यह कर्म है यानी हमारा सोना, उठना, चलना, बोलना, खाना, कुछ करना सभी कर्म के अंतर्गत आते हैं।

कर्म क्या है?

कर्म की परिभाषा करना कठिन है, क्योंकि जो कुछ भी इंसान अपने जीवन में करता है वह सब कर्म है। ऐसा भी कह सकते हैं कि क्रिया को कर्म कहते हैं, क्योंकि संस्कृत में कर्म का शाब्दिक अर्थ है “क्रिया होता है। कर्म असल में क्या है और यह हमारे जीवन पर कैसे लागू होता है, इसे लेकर अक्सर गलतफहमियां होती है। हम अक्सर सुनते पढ़ते और बोलते हैं कर्म करते रहो, फल की इच्छा न कर, पर क्या हम जाते हैं कि कर्म है क्या और कर्म के नियम क्या है?

कर्म के नियम

कर्म पहला नियम जो बोया, वो पाया

इस नियम के अनुसार हम जो भी इस ब्रह्माण्ड को देते है, वो घूम फिर कर हमारे पास ही लौटकर आता है। इसलिए केवल वहीँ काम करे, जिसे स्वीकार कर सकते हैं। फिर चाहे वह विचार या ऊर्जा अच्छा या बुरा हो।

सृष्टि का नियम

जीवन में सब कुछ खुद से नहीं चलता, इसे चलाने के लिए हमारी भागीदारी की ज़रूरत होती है। अगर जीवन में सफलता हासिल करना है, तो मेहनत करें। सुखी जीवन चाहिए, तो दूसरों में खुशियां बांटें।   

विनम्रता का नियम

किसी चीज़ को बदलने के लिए उसे स्वीकार करना चाहिए। विनम्र बनें और निगेटिव व्यक्ति से दूर रहने के बजाय अपनी पॉज़िटिव ऊर्जा देकर उसमें पॉज़िटिविटी लाएं।

विकास का नियम

बदलाव हमारे अंदर होना चाहिए न कि बाहरी वातावरण में। जब हम खुद को बदलते हैं, तो हमारा जीवन भी उसी के अनुसार चलता है और बदल भी जाता है। जब शुरुआत खुद से करते हैं, तभी जाकर समाज में और हमारे आसपास में बदलाव देख सकेंगे।

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ज़िम्मेदारी का नियम

जो भी जीवन में है या होने वाला है, उसकी ज़िम्मेदारी लेना सीखें। तभी जाकर अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।

संबंध या जुड़ाव का नियम

मानो या न मानो हमारा भूत, भविष्य और वर्तमान एक दुसरे से जुड़ा हुआ है। जो भी कुछ कल आपने किया था, उसका परिणाम आज आप को दिख रहा है और जो आज आप करेंगे उसके परिणाम आपको कल जाकर मिलेंगे।

ध्यान केंद्रित का नियम

मल्टीटास्कर होना बहुत अच्छी बात है क्योंकि यह एक कौशल है। लेकिन जब एक ही समय पर एक से ज़्यादा चीज़ों को करते हैं या सोचते हैं, तो उसमे गलतियों की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए बहुत सारे काम एक ही समय पर करने से बेहतर है एक-एक करके करें ताकि उससे संतुष्टि भी मिले और हम अपना बेस्ट भी दे पाएं।

देने का नियम

आपके व्यवहार, सोच और कर्म से मिलना चाहिए। यह नियम आपको अपने कर्ता के महत्व को समझने में मदद करता है, जो आपके गहरे विश्वास को दर्शाता है। अगर आप एक शांतिपूर्ण जीवन की अपेक्षा करते हैं, तो दूसरों के जीवन में भी वही शांति लाने पर ध्यान देना होगा।

अब और आज में जीने का नियम

बीते पल को यादकर दुखी होंगे, तो आज या वर्तमान को गंवा देंगे, इसलिए इस पल में जिएं।

परिवर्तन का नियम

इतिहास खुद को तब तक दोहराता है, जब तक हम उससे सीख नहीं लेते और अपना रास्ता नहीं बदलते। संसार का एक अहम नियम परिवर्तन है। कुछ परिवर्तन इंसान को समय के साथ करने पड़ते हैं और कुछ परिवर्तन गलत को सही करने के लिए करने होते।

धैर्य और इनाम का नियम

सबसे मूल्यवान पुरस्कार ही धीरज है। धैर्यवान व्यक्ति आयी हुई मुसीबतों का सामना करने में ज़्यादा सक्षम होते हैं। धैर्य रखकर जीवन में आगे बढ़ते रहना, यही धैर्य और इनाम का नियम है।

महत्त्व और प्रेरणा का नियम

अपने काम को महत्व देना और प्रेरणा लेना और प्रेरणादायक काम करना कर्म का नियम है।

यह सभी जीवन के उन नियमों को दर्शाता है, जो हम अक्सर अपने-अपने जीवन में दोहराते हैं। लेकिन इसका सही अर्थ समझ नहीं पाते हैं।

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