अध्यात्म क्या है, जानिए इसका विज्ञान

खुद के बारे में जानना ही अध्यात्म है
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कुछ लोग अध्यात्म को धर्म से जोड़कर देखते हैं, लेकिन यह किसी धर्म से जुड़ा नहीं है। यह तो खुद एक तरीका है खुद को अंदर से समझने और जीवन को सुंदर बनाने का। आध्यात्मिक होने का मतलब घंटों पूजा पाठ करना नहीं है, बल्कि अपने मन और आत्मा को पवित्र करके अपने अंदर करुणा और दया का भाव भरना है।

अध्यात्म क्या है?

यह दो शब्दों अधि और आत्म से मिलकर अध्यात्म बना है। इसका अर्थ होता है ‘आत्म का ज्ञान’ यानी अपना ज्ञान। अध्यात्मक एक व्यवहार है जो व्यक्ति की सोच को पॉज़िटिव बनाता है ताकि उसे हर चीज़/व्यक्ति का सकारात्मक पहलू ही दिखे। यह आपके अंदर की एक यात्रा है जो आंतरिक शांति की खोज करती है और आपकी सीखने की क्षमता और प्रेम की भावना को बढ़ाती है। अध्यात्मकिता आंतरिक शांति, खुशी और समृद्धि पाने लिए चेतना में बदलाव की प्रक्रिया है। कुल मिलाकर यह आपको आंतरिक शांति का एहसास दिलाती है। आप में प्रेम, करुणा और सकारात्मक विचार लाती है जो आपको एक बेहतर इंसान बनाता है।

क्या है अध्यात्म और विज्ञान का संबंध

अध्यात्म को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए क्योंकि यह किसी कर्मकांड या अंधविश्वास को नहीं बढ़ाता। यह तो व्यक्ति को अंदर से निखारता है और ब्रह्मांड एक निरंकार परम शक्ति पर विश्वास करता है। अध्यात्म के मंत्र और श्लोकों में भी ब्रह्मांड की शक्ति का जिक्र है। विज्ञान भी समय-समय पर ब्रह्मांड के रहस्यों की खोज में लगा रहता है। ध्यान लगाते समय अक्सर ओम शब्द का जाप किया जाता है। इससे मन शांत होता है और अंदर से आपको एक नई ऊर्जा का एहसास होता है।

अध्यात्म हमें खुद से जोड़ता है | इमेज : फाइल इमेज

ओम शब्द का वैज्ञानिक महत्व

जब हम ओम का जाप करते हैं तो मस्तिष्क के कई हिस्सो में कंपन होती है और एक तरंग उठती है। यह मस्तिष्क की मांसपेशियों के लिए एक अच्छी कसरत साबित होती है। इसके जाप से दिमाग स्वस्थ और शांत रहता है। अध्यात्म हमें अपनी अंतरात्मा और मन से जोड़ता है, जबकि विज्ञान यह बताता है कि बाहरी दुनिया हमारे मन और शरीर को किस तरह प्रभावित करती है। अध्यात्म और विज्ञान दोनों हमें प्रकृति और मानवता से जोड़ते हैं और हमारी ज़िंदगी को बेहतर बनाते हैं।

मेडिटेशन से मन स्वस्थ रहता है

मन बहुत शक्तिशाली होता है और इस बात को अध्यात्म और विज्ञान दोनों ही मानते हैं। मेडिकल साइंस भी यह बात मानता है कि सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति किसी भी बीमारी से जल्दी उबर जाते हैं। इससे वह तनाव/डिप्रेशन आदि से भी बचे रहते हैं। मौजूदा हालात की बात करें तो कोविड-19 के मामले में भी बार-बार डॉक्टर यही कह रहे हैं कि पॉज़िटिव रहिए और मन को शांत रखिए। इससे यदि आप बीमार पड़ते भी हैं तो जल्दी ठीक हो जाएंगी और इसके विपरीत करने पर समस्या बढ़ जाएगी।

विज्ञान की तरह अध्यात्म में भी मन को बहुत ताकतवर माना जाता है। यही वजह है कि व्यक्ति के पूरे जीवन को बदलने के लिए शुरुआत उसके मन बदलने से ही होती है। इसे मेडिटेशन के ज़रिए किया जा सकता है। अपनी सोच को सकारात्मक बनाकर, मन को शांत रखकर, दूसरों के प्रति प्रेम, करुणा और दया का भाव लाकर आप भी अध्यात्म से जुड़ सकते हैं।

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