अपनी उपलब्धियों से अपना परिचय देती पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी: पारुल परमार

पोलियो को हराकर तीस गोल्ड अपने नाम करने वाली बैडमिंटन क्वीन बनीं पारुल परमार
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अगर मन में जीत का जज़्बा और अपनो का साथ हो तो बड़ी से बड़ी मुश्किलें आसान हो जाती है। फिर चाहे कोई भी चुनौती क्यों न हो। इसी कड़ी में एक ऐसा ही नाम है पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी पारुल दलसुखभाई परमार का, जिन्होंने शारीरिक और मानसिक चुनौतियों को पार किया और बैडमिंटन क्वीन के नाम से मशहूर हुई।

कौन हैं पारुल परमार?

पारुल परमार 47 साल की वुमन सिंगल एसएल 3 में पैरा बैडमिंटन की विश्व की नंबर 1 खिलाड़ी हैं। पारुल ने अब तक चार बार विश्व चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया है और अब तक तीस से ज्यादा गोल्ड मेडल जीते हैं। पारुल टोक्यो पैरालंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर चुकी हैं और अब इनका सपना है कि पैरा बैडमिंटन में इस बार देश को गोल्ड मेडल दिलाएं।

शारीरिक से ज्यादा मन की शक्ति है कारगर

पारुल मानती हैं कि इंसान जैसा सोचता है वैसा बन जाता है। और ये बात पूरी तरह सच है। पारुल को ही उदाहरण लिया जाए तो पहले बचपन में उन्हें पोलियो की बीमारी हो गई। इसके बाद तीन साल तक आते -आते एक दुर्घटना के कारण पारुल की गर्दन में बड़ी चोट आ गई लेकिन फिर भी पारुल ने हार नहीं मानी। अपने अंदर के जज़्बे को कायम रखते हुए पैरा बैडमिंटन प्लेयर बनी।

मिला अपनों का साथ तो राह हुई आसान

पारुल हमेशा ही कहती हैं ‘अगर मेरे पिता ने और भाई-बहनों ने मेरा सपोर्ट ना किया होता तो मैं खेलने का कभी नही सोच पाती। मेरे पिता राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन खेल चुके थे और चाहते थे कि मैं भी खेलूं। ये उन्ही का विश्वास है कि मैं आज विश्व स्तर की खिलाड़ी हूं।

अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं पारुल

उनके जीवन में इस पुरस्कार की भी बड़ी दिलचस्प कहानी है। पारुल बताती हैं जब मेरे साथी को 2002 में अर्जुन पुरस्कार मिला तो मैंने भी इस पुरस्कार को पाने का निश्चय किया। इसके बाद 2009 में पारुल के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।

पारुल के व्यक्तित्व से मिलती हैं कुछ सीखें

वह जब भी कुछ हासिल करती हैं, तो वे हमेशा अपने परिवार, सभी कोच, अपने सभी दोस्तों, प्रशासन, खेल अथॉरिटी और जिसने भी उनका हौसला बढ़ाया है, सबको शुक्रिया करती है। यह बात उनके थैंकफुल नेचर को दिखाती है। साथ ही हमें भी प्रेरणा मिलती है कि चाहे जीवन के किसी भी मुकाम पर पहुंच जाओ लेकिन उन लोगों को याद रखो जिन्होंने कभी आपकी मदद की है। यही सबसे अच्छा व्यक्तित्व है।

पारुल दलसुखभाई परमार जैसे अनेक खिलाड़ी हैं जो शारीरिक चुनौतियों से लड़ते हुए एक बेहतर, पॉजिटिव जीवन जीते हैं। हमारा कर्तव्य है इस पैरालंपिक में इन खिलाड़ियों का साथ दें और चाहे परिणाम कुछ भी आए इनके साथ हर हाल में खड़े हों।

इमेज : फेसबुक

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