आंसूओं को न रोकने के 5 फायदे

अगर आपका रोने का मन है, तो अपने आंसूओं को न रोकें, क्योंकि इसके कई फायदे हैं
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हंसना और आंसू आना दोनों ही कुदरती भावनाएं हैं। इन भावनात्मक तरीकों से हम अपनी खुशी और दुख व्यक्त करते हैं। फिर चाहे वो आंसू के रूप में ही क्यों न हो। कुछ ऐसी बातें भी होते है, जिसे कह नहीं पाते, लेकिन आंखों के आंसू के ज़रिये ये हमारे मन में दबी भावनाओं को बाहर निकालने में मदद करती है। इसलिए कहते हैं कि जब भी इंसान को रोना आए, तो रोकना नहीं चाहिए। उसी समय रो लेना चाहिए क्योंकि आंखों से आंसूओं का निकलना सेहत के लिए अच्छा है। 

शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद

आंसू का बहना एक सामान्य मानवीय क्रिया है जो अलग-अलग भावनाओं की वजह से ट्रिगर होता है। जब हम दुखी होते हैं, उदास होते हैं, किसी बात को लेकर तनाव में होते हैं, तो अलग-अलग भावनाओं की वजह से ही रोना आ जाता है। रोना या आंसू बहाना यह व्यक्ति के तन के साथ-साथ मन के लिए भी फायदेमंद है और इसकी शुरुआत तभी से हो जाती है जब बच्चा जन्म लेते समय पहली बार रोता है।

आंखो की सफाई

क्या आप जानते हैं कि आंसू में 98 प्रतिशत पानी होता है। यह आंखों में जमी धूल मिट्टी, धुआं या अन्य खतरनाक तत्व आंसूओं के साथ बह जाते हैं और आंखें नम और साफ हो जाती है। इससे आंखों को किसी भी प्रकार के संक्रमण का खतरा नहीं रहता। इसके अलावा यह आंखों में मौजूद मेमब्रेन को सूखने से बचाता है, जो आंखों की रोशनी के लिए बहुत ज़रूरी है।

आंसू बह जाने से होता है मन हल्का | इमेज : फाइल इमेज

मन शांत होने में करता है मदद

खुद को सांत्वना देने और शांत करने का सबसे अच्छा तरीका है रोना। एक रिसर्च में यह साबित हुआ है कि रोने से शरीर में पैरासिम्प्थेटिक नर्वस सिस्टम (पीएनएस) उत्तेजित हो जाता है और इसी पीएनएस की वजह से शरीर को आराम करने और डाइजेशन में मदद मिलती है। रोने के फायदे तुरंत नज़र नहीं आएंगे। लेकिन अगर कुछ देर के लिए आंसू को बहने दें, तो खुद में रोने के फायदे महसूस होने लगते हैं, मन हल्का हो जाता है और शांति का अनुभव होने लगता है।

​रोने से दर्द होता है कम

लंबे वक्त तक रोने से ऑक्सिटोसिन और इन्डॉर्फिन जैसे केमिकल्स रिलीज होते हैं। यह फील गुड केमिकल है जिससे शारीरिक और भावनात्मक दोनों ही तरह के दर्द को कम करने में मदद मिलती है।

​मूड होता है बेहतर

दर्द दूर करने के साथ-साथ रोने से मूड अच्छा और बेहतर महसूस होता है। जब आप रोते हैं या सिसकियां लेते हैं तो ठंडी हवा के कुछ झोंके शरीर के अंदर जाते हैं जिससे दिमाग का तापमान कम होता है और शरीर का तापमान भी नियंत्रण होने लगता है। जब दिमाग ठंडा हो जाता है तो मूड भी बेहतर हो जाता है।

आंसू से होती है नाक की सफाई

जब कोई रोता है, तो अक्सर नाक बहने लगती है। आंसू नलिकाओं से होकर नाक तक पहुंचते हैं, जिससे नाक में जमा गंदगी साफ हो जाती है।

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