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निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा दे रहे हैं लोग

निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा दे रहे हैं लोग

  • कोविड मरीज़ों के लिए बढ़ाया मदद का हाथ
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कोरोना के दूसरे कहर में, इस हफ्ते कई लोगों ने निस्वार्थ भाव से मदद का हाथ बढ़ाया है और कोरोना मरीज़ों की हर संभव परिस्थिति से मदद की। पढ़िये ऐसे ही 5 हीरोज़ के बारे में –   

कोविड मरीजों के लिए फरिश्ता बनीं दो बहनें

कोविड-19 की दूसरी लहर में कोविड मरीजों को खाना खिलाने की ज़िम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं बिहार की दो बहनें। बिहार के पटना में रहने वाली 32 साल की अनुपमा सिंह अपनी मां कुंदन देवी के साथ खाना बनाती है। वहीं उनकी 26 साल की बहन नीलिमा सिंह इस खाने को कोविड मरीजों के घरों तक पहुंचाती है। कुछ महीने पहले अनुपमा की मां और बहन दोनों कोरोना पॉज़िटिव थी। उस दौरान उन्हें महसूस हुआ कि जिनके घर में देखभाल के लिए कोई नहीं रहता या जो खाना बनाने में सक्षम नहीं है, वे लोग कैसे खाते होंगे। इन दिक्कतों के चलते दोनों बहनों ने उनकी मदद करने की ठानी।

अपने घर के बजट में कटौती कर घर खर्च पर खाना बनाकर मुफ्त में कोरोना मरीजों के लिए खाना पहुंचाने का नेक काम शुरु किया। शुरुआत में दोनों बहनों ने घर के आसपास खाना पहुंचाती थी। आज के नाजुक हालात को देखते हुए ये परिवार घर से 15 किलोमीटर के दायरे में खाना पहुंचाने का काम कर रहा है। ऐसी कोरोना वॉरियर्स को हमारा सलाम 🙏

मददगार बने मुंबई के स्कूल टीचर

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच मरीज़ों के लिए मददगार के लिए आगे आए, मुंबई के स्कूल टीचर दत्तात्रय सावंत। मरीज़ों को अस्पताल पहुंचने और ठीक होने के बाद घर जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। बढ़ते मरीज़ों की संख्या के आगे जब गरीब मरीज़ों को प्राइवेट एम्बुलेंस की फीस न देने पाने की मजबूरी और सही समय पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मदद न मिल पाने,जैसी हालत को देखते हुए दत्तात्रय ने कोरोना मरीज़ों की मदद करने का फैसला किया।

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दत्तात्रय मरीजों की मदद करने के दौरान पूरी सावधानी रखते हैं। मरीजों को पहुंचाने के बाद ऑटो को लगातार सैनिटाइज़ करते हैं और हर समय पीपीई किट पहने रहते हैं। अब तक वह करीब 26 कोविड मरीज़ों को मुफ्त सेवा दे चुके हैं। दत्तात्रय का कहना है कि जब तक यह कहर रूक नहीं जाता तब वह उनकी यह सेवा जारी रहेगी। दत्तात्रय के इस नेक काम के लिए हम उन्हें सलाम करते हैं।

मुम्बई में कोविड मरीज़ों तक पहुंचा सेहतमंद भोजन

कोरोना संक्रमण के दूसरे दौर में लोगों की मदद के लिए मुम्बई के बोरीवली इलाके के राजीव सिंघल बहुत ही नेकदिली का काम कर रहे हैं। राजीव सिंघल रोज़ाना 200 लोगों को दोपहर और रात का मुफ्त भोजन बांट रहे हैं, वह भी घर का बना हुआ सेहतमंद भोजन। कपड़ा कारोबारी राजीव सिंघल इन दिनों होम क्वारंटाइन हुए 200 लोगों की पेट की भूख मिटाने में व्यस्त हैं । सिंघल का कहना है कि पिछले साल जब खुद कोरोना पॉजिटिव होने पर होम क्वारंटाइन हुए थे तब अच्छे भोजन के लिए तरस गये थे। टिफिन में रोटी. चावल, दाल, दो सब्जी, पापड़, अचार और टिशू पेपर होता है । भोजन को अलग-अलग पते के हिसाब से पैक करके अलग-अलग कुरियर बॉयज़ के ज़रिये मुम्बई में मीरा रोड से लेकर माहिम तक पंहुचाया जाता है । उनकी इस सेवा को हमारा सलाम 🙏

लग्जरी कारों को बनाया एंबुलेंस

मध्य प्रदेश के बालाघाट के नक्सल प्रभावित बैहर में एक युवा व्यपारी बंटी जैन ने अपनी 5 लग्जरी गाड़ियों को एंबुलेंस में बदलकर बहुत ही सरहानीय काम किया है। कोरोना की वजह से लोगों को अस्पताल जाने में समस्या आ रही है। आदिवासी इलाका होने के कारण लोगों को एम्बुलेंस की कमी हो रही थी। इसी परेशानी को देखते हुए यहां के युवाओं ने गरीब मरीज़ों को निशुल्क अस्पताल लेकर जाने और वापस घर लाने की व्यवस्था तैयार की है।

बंटी जैन अपने दोस्तों के साथ मिलकर गरीब मरीजों को निशुल्क और सक्षम लोगों को सिर्फ डीजल के खर्च पर एंबुलेंस की सेवा दे रहे हैं। इनोवा, होंडा सिटी, इटियॉस जैसी लग्जरी कारों को बेड के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर भी लगाए गए हैं। युवा व्यापारियों की यह पहल कोरोना संक्रमण काल में गरीबों के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। यह पूरा काम गरीब मरीजों के लिए निशुल्क किया जा रहा है। बंटी जैन की इस पहल के लिए हम उन्हें दिल से सलाम करते हैं।

बेंगलुरु में ‘फूड टू योर डोरस्टेप’ की पहल

कोरोना संकट के बीच देश में संक्रमित मरीज़ों की मदद के लिए हर कोई अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। कई सामाजिक संस्थाएं और एनजीओ लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। ऐसे में बेंगलुरु शहर के निवासी भी कोरोना पीड़ितों को भोजन देने का काम कर रहे हैं। उनमें से कुछ युवा महिलाएं अपने दुपहिया वाहनों से, घर-घर जाकर आइसोलेशन में अकेले रहने वालों लोगों को मुफ्त में खाने के पैकेट बांट रही हैं । गुड क्वेस्ट फाउंडेशन और ‘फूड टू योर डोरस्टेप’ मिलकर करीब 80 परिवारों के 300 लोगों को खाना खिला रहे हैं। इसमें करीब 28 वालंटियर्स हैं, जिनमें से 18 पुरुष और दस महिलाएं शामिल है। यह खाने के साथ दवाइयां भी पहुंचाने का नेक काम भी कर रहे हैं।

घर-घर कोविड मरीज़ों को पहुंचा दवाइयां और खाना

झारखण्ड के संतोष कुमार पांडा, कोरोना की मुश्किल घड़ी में लोगों की मदद के लिए आगे आये हैं। कोरोना महामारी की चपेट में आने से कई मरीज अपने घर में ही होम आइसोलेशन में हैं। ऐसे में संतोष कुमार पांडा होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमित मरीज़ों को खाना और दवाइयां उनके घर तक पहुंचा रहे हैं। वह हर दिन पीपीई किट पहनकर अपनी बाइक से 5 से 6 लोगों को खाना पहुंचाते हैं। संतोष रोज़ व्हाट्सएप पर ऑर्डर लेते हैं और फिर उनके पते पर खाना और दवा पहुंचाते हैं। संतोष ने बताया कि उनकी इस पहल के बाद कई और लोग मदद के लिए आगे आये हैं और लोगों को मुफ्त दवा और राशन बांट रहे हैं। संतोष की इस पहल की लोग तारीफ कर रहे हैं।

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