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अगर बच्चों में आ रहा चिड़चिड़ापन तो अपनाएं ये उपाय

अगर बच्चों में आ रहा चिड़चिड़ापन तो अपनाएं ये उपाय

  • अगर बच्चों में है चिड़चिड़ापन तो हो सकती है विटामिन डी और आयरन की कमी
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बदलती जीवनशैली के साथ बच्चों में चिड़चिड़ापन का आना आजकल बहुत आम हो गया है। बच्चों में लक्षण जैसे- अचानक से सिर दर्द का होना, शरीर में सक्रियता न होना, जल्दी गुस्सा, चिड़चिड़ापन आना आदि ऐसे लक्षण हैं जिन्हें पैरेंट्स सामान्य तौर पर बच्चों में व्यवहार परिवर्तन से जोड़ते हैं। लेकिन असल में ये चिड़चिड़ापन सिर्फ व्यवहार का मुद्दा नहीं हैं, हो सकता है बच्चे में विटामिन डी और आयरन की कमी हो।

हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार ऐसे स्कूली बच्चों में भी पोषक तत्वों की कमी पाई गई, जो पूरी तरह स्वस्थ लग रहे थे, खासकर विटामिन डी और आयरन की कमी इनमें मुख्य रूप से थी।

अगर बच्चे में है चिड़चिड़ापन तो क्या करें

खून की जांच कराएं

एक स्वस्थ जीवनचर्या के लिए समय-समय पर खून की जांच कराना ज़रूरी होता है। साल में एक बार अपनी और अपने बच्चों की रक्त की जांच ज़रूर कराएं।

हेल्दी डाइट बनाएं

फास्ट फूड या कुछ भी खाने की बजाय एक हेल्दी डाइट प्लान बनाएं और नियमित रूप से फॉलो करें। खाने में विटामिन, आयरन और ऐसे पोषक तत्त्व ज़रूर शामिल करें, जो बच्चों की वृद्धि में अनिवार्य हैं।

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डॉक्टर की सलाह लें

चूंकि बच्चों में विकासशीलता के लक्षण होते हैं इसलिए उनके आहार अथवा रूटीन में अपने मन से कुछ भी शामिल न करें या न किसी दवा का प्रयोग करें।

आहार में वैरायटी रखें
खाने में वैरायटी
बच्चों के खाने को देखने में मज़ेदार बनाएं | इमेज : फाइल इमेज

बच्चों का स्वभाव ही ऐसा होता है जिससे वो नई चीजें देख कर आकर्षित होते हैं। वैसे भी खाने में वैरायटी का होना सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। भोजन में वैरायटी बनाने के लिए अपने आहार को हफ्ते में दो या तीन बार वैसी ही किसी चीज से बदलें। जैसे- आप प्रतिदिन रोटी के लिए गेहूं का आटा इस्तेमाल करते हैं लेकिन कभी-कभी रागी, जौ अथवा बाजरा का आटा भी इस्तेमाल करें।

डिब्बाबंद उत्पादों को कहें न

बच्चों के आहार में प्रोस्सेड उत्पादों या डिब्बाबंद आहार की जगह ताज़े फल, दही आदि इस्तेमाल करें।  खाने में आकर्षण पैदा करने के लिए फल की जगह उनका शेक आदि भी बना सकते हैं।

सूर्य की रोशनी में समय बिताएं

सूर्य की रोशनी विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत होती है। इसलिए दिन में कम से कम 20 मिनट सूरज की रोशनी में ज़रूर बिताएं।

कसरत का रूटीन बनाएं

अगर भूखे होने पर भी आपका बच्चा खाना नहीं खा रहा तो उसकी दिनचर्या में कसरत या योग को शामिल करें। शुरुआत में कसरत को रोचक बनाने के लिए आप भी बच्चे का साथ दें, इससे कुछ समय बाद बच्चे में कसरत की आदत बन जाएगी।

बच्चे इस समाज का एक अहम किरदार होते हैं, और वो इसलिए क्योंकि भविष्य इन्हीं पर निर्भर है। अगर आपका बच्चा स्वस्थ है और फिर भी उसमें चिड़चिड़ापन, गुस्सा ज़्यादा है, तो इन बातों का खास ध्यान दें।

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