कृति करंत को मिला वुमन ऑफ डिस्कवरी अवॉर्ड

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भारतीय महिलाएं पूरी दुनिया में अपनी मेहनत और लगन से नाम कमा रही है। देश का नाम रोशन करने वाली महिलाओं की फेहरिस्त में एक और नया नाम जुड़ गया है, डॉ. कृति के करंत का, जो एक सरंक्षणवादी वैज्ञानिक है। कृति को 2019 के वुमन ऑफ डिस्कवरी अवॉर्ड के लिए चुना गया है।

वन्यजीव से जुड़े क्षेत्र में रिसर्च

कर्नाटक के मैंगलुरु में जन्मी कृति ने ड्यूक और येल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। बंगलूरू स्थित सेंटर फॉर वाइल्‍ड-लाइफ स्‍टडीज़ के साथ ही वह न्‍यूयॉर्क स्थित वाइल्‍ड-लाइफ कन्‍जर्वेशन सोसाइटी और अमेरिका के निकोलस स्‍कूल ऑफ एन्‍वायरमेंट से भी जुड़ी हैं। कृति पिछले 20 सालों से वन्य जीवों के सरंक्षण, सरंक्षण के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाना, जानवरों की विभिन्न प्रजातियों के विलुप्त होने के पैटर्न, वन्यजीवो और मानव के टकराव आदि विषयों पर रिसर्च कर रही हैं।

वैज्ञानिकों की मदद

वन्यजीव सरंक्षण की दिशा में उल्लेखनीय काम के लिए ही कृति को विंग्स वर्ल्ड क्वेस्ट वुमन ऑफ डिस्कवरी अवॉर्ड के लिए चुना गया। यह अवॉर्ड अप्रैल 2019 में न्यूयॉर्क में दिया जाएगा। इसका मकसद समाज की भलाई की दिशा में काम कर रहे युवा वैज्ञानिकों की हौसलाफज़ाई और मदद करना है। यह अवॉर्ड साल 2003 में शुरू हुआ था और तब के अब तक यह संस्था अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली 84 महिलाओं को सम्मानित कर चुकी है।

जानवरों को बचाना है मकसद  | इमेज: फेसबुक

वन्यजीवों और इंसानों के टकराव का समाधान

वन्यजीवों और इंसानों में अक्सर ही टकराव होता रहता है। इस दिशा में भी डॉ. कृति ने काफी रिसर्च की है और उनके मुताबिक, वन्‍य जीवों से इंसानों के टकराव के समाधान के लिए लोगों और संगठनों को संरक्षण नीतियों के प्रति जागरुक करना होगा। साथ ही वन्यजीव वाले इलाकों में लोगों को पहले से ही सचेत कर दिया जाना चाहिए। उनका यह भी मानना है कि जानवरों से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए बीमा योजना और प्रकिया को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

मिल चुके हैं कई पुरस्कार

कृति के लिए वुमन ऑफ डिस्कवरी अवॉर्ड कोई पहला पुरस्कार नहीं है। इससे पहले उन्हें भारत सरकार के साइंड एंड टेक्नोलॉजी विभाग की ओर से 2011-16 तक रामानुज फेलोशिप मिल चुकी है। सोसाइटी ऑफ कंज़र्वेशन बायोलॉजी बेस्ट स्टुडेंट अवॉर्ड, कैम्ब्रिज हामिद अवॉर्ड, ड्यूट आउटस्टैंडिग पेपर और कई अन्य पुरस्कार मिल चुके हैं। फिलहाल वह सेंटर ऑफ वाइल्ड लाइफ स्टडीज़, नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंस एंड कोलंबिया यूनिवर्सिटी के साथ काम कर रही हैं।

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