कैसे करें कलरिंग से स्ट्रैस को दूर

कलरिंग से पाएं अच्छी नींद और रिलैक्स दिमाग
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यदि आपको लगता है कलरिंग सिर्फ बच्चों के लिए होती है, तो आपको एक बार फिर से सोचने की जरूरत है, क्योंकि पिछले कुछ समय से कलरिंग का इस्तेमाल एक थेरेपी की तरह हो रहा है। तो अगर आप काम में पूरी तरह डूबे हुए हैं क्योंकि आपको डेडलाइन पूरी करनी है, आप दिन-रात काम करते रहते हैं। फिर भी कई काम अभी और खत्म करने हैं जिसे लेकर आप तनावग्रस्त हैं, काम के अलावा घर की ज़िम्मेदारियां भी आपका स्ट्रेस बढ़ा देती है।

ऑफिस की मीटिंग के साथ ही अगले हफ्ते होने वाली पैरेंट्स टीचर मीटिंग को लेकर आपकी परेशानी और बढ़ गई है क्योंकि आप एक ही समय पर दो जगह नहीं रह सकते। इतनी ज़िम्मेदारियां निभाते-निभाते आपको खुद ही कई बार महसूस होता कि आपको पैनिक अटैक न आ जाए। ऐसी सिचुएशन में खुद को रिलैक्स करने का अच्छा तरीका है कलरिंग।

तनाव और एंग्जाइटी कम करता है

कलरिंग दिमाग के उस हिस्से को सक्रिय करता है, जो आपको तनावग्रस्त करता है। कलरिंग आपको रिलैक्स करने, एंग्ज़ाइटी कम करने और स्ट्रेैस घटाने में मदद करता है। कई अध्ययनों से यह पता चला है कि रंग मंडल नाटकीय रूप से एंग्जाइटी कम करता है और दिमाग के उस हिस्से को सक्रिय करता है जो रचनात्मकता को सपोर्ट करता है।

कैसे करें कलरिंग से स्ट्रैस को दूर
कलरिंग करने से मिलता है सुकून|इमेज : फाइल इमेज

नेगेटिव विचार होते है पॉज़िटिव

कलरिंग हमारे अंदर के बच्चे को बाहर लाता है और बचपन की यादें ताज़ा हो जाती है। कलरिंग के दौरान आप चित्र पर ध्यान लगाते हैं, जिससे नकारात्मक विचार धीरे-धीरे सकारात्मक बन जाते हैं। डॉक्टरों ने पाया कि कलरिंग का दिमाग पर न्यूरोलॉजिकल असर होता है और इससे मस्तिष्क की तरंगों और हृदय गति में बदलाव देखा गया।

माइंडफुलनेस पाने में मददगार

माइंडफुलनेस के ज़रिए स्ट्रेस लेवल कम होता है, जिसका मतलब है जागरुक होना और वर्तमान पल को जीना। चूंकि कलरिंग में ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती है जिसे हम उसी पल को जीने के साथ ही जागरुक होते हैं और इससे मानसिक सुकून मिलता है। हम खुद को कलरिंग में डुबो देते हैं और खुद को फोकल पॉइंट के रूप में देखते हैं। इससे माइंडफुलनेस पाने में मदद मिलती है।

कैसे करें कलरिंग से स्ट्रैस को दूर
कलरिंग करने से मिलता है सुकून|इमेज : फाइल इमेज

अच्छी नींद, मोटर स्किल और विजन का विकास

चूंकि कलरिंग करने से दिमाग रिलैक्स होता है, इसलिए यह मेलाटोनिन के स्तर को प्रभावित नहीं करता है, जिससे नींद अच्छी आती है। साथ ही इस क्रिया में आपको दिमाग के दोनों गोलाद्धों का इस्तेमाल करना पड़ता है। कलरिंग एक रचनात्मक प्रक्रिया है जबकि कलरिंग के दौरान लाइन के अंदर ही बने रहने के लिए लॉजिकल थिंकिंग की ज़रूरत होती है। यह विजन में मदद करके आपके मोटर स्किल को विकसित करता है।

क्रिएटिव मेडिटेशन का तरीका

यह पाया गया है कि कलरिंग मंडल आंतरिक शांति और आत्म बोध का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पूर्णता का एहसास होता है। दरअसल, कलरिंग के दौरान आप दूसरे विचारों से दूर हो जाते हैं जैसे मेडिटेशन के दौरान होता है, इसलिए दिमाग कलरिंग से दिमाग शांत होता है। तो आज ही पेंसिल और कलरिंग बुक लेकर बैठ जाइए, क्योंकि तनाव कम करने और मानसिक शांत का यही बेहतरीन तरीका है।

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