जैसी करनी वैसी भरनी

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हमारी ऊर्जा और भावनाएं लगभग एक जैसी होती है, क्योंकि यह एक से दूसरे को स्थानांतरित होती है। जब हमारे प्रयास पॉज़िटिव एनर्जी को बढ़ावा देते हैं, तो उसका परिणाम भी अच्छा होता है। इसी तरह यदि भावनाओं को ठीक से संभाला न जाये या किसी के प्रति दुर्भावना रखी जाये, तो उसका नतीज़ा भी बुरा ही होता है। कहने का मतलब यह है कि हम जैसा करेंगे और जैसी भावना रखेंगे, हमारे साथ भी वैसा ही होगा।

हम बार-बार यह सोचते हैं कि हमारे पड़ोसी के जीवन में कुछ अच्छा न हो, वह जिस काम के लिये जा रहा है वह पूरा न हो, तो असल में हमारी यह बुरी भावना हमें ही प्रभावित करती है और हमारा ही काम पूरा नहीं होता। इसलिये हमें कभी किसी के लिये बुरा नहीं सोचना चाहिये और न ही करना चाहिये। आपने वह कहावत तो सुनी ही होगी ‘बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय।’ जब आप किसी के साथ बुरा करेंगे, तो खुद आपके साथ भी अच्छा नहीं होगा। इसे इस कहानी के माध्यम से समझा जा सकता है।

कहानी

एक बहुत सफल बिज़नेसमैन ऑफिस जाने के लिये तैयार हो रहा था। जब वह अपनी कार के पास पहुंचकर दरवाज़ा खोलते हैं, वैसे ही उसकी कार के नीचे सो रहा कुत्ता अचानक बाहर आता और बिज़नेसमैन के पैर में चोट लग जाती है। गुस्से में वह शख्स कुछ पत्थर उठाकर कुत्ते पर फेंकता है, लेकिन कुत्ते को एक भी पत्थर नहीं लगता। वह भाग जाता है।

जैसी करनी वैसी भरनी
प्यार से बातों को सुलझायें | इमेज : फाइल इमेज

ऑफिस पहुंचने पर बिज़नेसमैन एक मीटिंग बुलाता है और कुत्ते का गुस्सा मैनेजर पर उतार देता है। बॉस के व्यवहार से दुखी मैनेजर फिर यह गुस्सा अपने नीचे काम करने वाले कर्मचारियों पर उतारता है और वह अपने नीचे के कर्मचारियों पर और इस तरह आखिरकार गुस्से की श्रृंखला ऑफिस के चपरासी तक पहुंच जाती है। चपरासी जब घर पहुंचता है, तो दरवाज़ा खोलते ही उसकी पत्नी पूछती है, ‘आज आप लेट हो गये’? कर्मचारियों के गुस्से से अपसेट चपरासी गुस्से में पत्नी को एक थप्पड़ जड़ देता है। फिर पत्नी यह गुस्सा टीवी देख रहे बेटे पर उतारती है। मां के थप्पड़ से नाराज़ बेटा बाहर जाकर कुछ पत्थर उठाता है और एक कुत्ते को मारता है, कुत्ते को चोट लगती है और वह भौंकता हुआ वहां से भाग जाता है। यह वही कुत्ता है, जिसने सुबह बिज़नेसमैन को चोट पहुंचाई थी।

सीख

कहानी से सीख मिलती है कि हम जो बोएंगे वही काटेंगे। यानी हम दूसरों के साथ जैसा व्यवहार करेंगे, हमारे साथ भी वैसा ही होगा। हमारा व्यवहार गुस्से की उसी चेन की तरह है, जो बिज़नेसमैन से चपरासी तक पहुंची।

करें सही

– दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करें।

– किसी के प्रति बुरी भावना न रखें।

– अपनी ऊर्जा पॉज़िटिव काम में लगायें।

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