भारतीय संविधान – कला का एक स्वरूप

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संविधान शब्द सुनते ही आपके दिमाग में क्या आता है? नियम, कानून, सिद्धांत या फिर ऐसा ही कुछ, जिसके आधार पर कोई भी देश चलता है। आज हम बात करने जा रहे हैं भारत के संविधान की, जो न सिर्फ आपको अपने सिद्धांतो के बारे में बताता है, बल्कि वह तो कला का एक स्वरूप भी है।

संविधान और कला

भारत के संविधान को 26 जनवरी 1950 में अपनाया गया था। जिस समय इसे लागू किया गया था, यह किसी कागज़ पर छपा दस्तावेज़ नहीं था, बल्कि शांति निकेतन के कलाकारों द्वारा आचार्य नंदलाल बोस के मार्गदर्शन में की गई दस्तकारी थी, जिसका सुलेख दिल्ली के प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने किया था। अब यह दस्तावेज़ भारत की ससंद के पुस्तकालय में रखा है और इसको खास हीलियम से बने केस के अंदर संरक्षित किया गया है।

कला की बारीकियां

भारत के पहले संविधान को बड़ी नज़ाकत के साथ तैयार किया गया था। इसमे किए गए सुलेख को होल्डर और निब से लिखा गया था, जिसके लिए सुलेखक ने कोई शुल्क नहीं लिया था। इसकी कलाकृतियों को शांतिनिकेतन के विद्यार्थियों ने नंदलाल बोस के मार्गदर्शन में पूरा किया था। प्रीएंबल पेज को बेओहर राममनोहर सिन्हा ने बनाया था। इनके अलावा कला भवन के राजस्थान से आए एक कलाकार क्रिपाल सिंह शेखावत ने भी योगदान दिया, जिन्होंने इस काम को करने के बाद वापस जाकर ‘जयपुर ब्लू पॉट्टरी’ को एक बार फिर से जीवन दिया।

भारतीय संविधान – कला का एक स्वरूप
बेहतरीन कला का संगम  | इमेज: ट्विटर / हिन्दू एग्ज़िस्टन्स

कैसा दिखता है यह दस्तावेज़?

संविधान के कई पन्नों को बेहद स्टाइलिश बॉर्डर, हेडर और बैकड्रॉप के साथ सजाया गया है। चमड़े पर उभरे बॉर्डर, सामने और पीछे के कवर के जटिल पैटर्न को सोने से बनाया गया है, जो अजमेर के भित्ति चित्रों की याद दिलाते हैं।

राष्ट्रीय अनुभव की दिखेंगी झलकियां

संविधान के प्रत्येक भाग की शुरुआत में, नंदलाल बोस ने भारत के राष्ट्रीय अनुभव और इतिहास के एक चरण या दृश्य को दिखाया है। कुल मिलाकर 22 कलाकृति और चित्रों को बड़े पैमाने पर लघु शैली में प्रस्तुत किया गया है। इतिहास की विभिन्न अवधियों में से सिंधु घाटी में मोहनजोदड़ो, वैदिक काल, गुप्त और मौर्य साम्राज्य और मुगल से लेकर राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतिनिधित्व किया हैं। ऐसा कर के, नंदलाल बोस ने हमें चार हज़ार वर्षों के इतिहास, परंपरा और संस्कृति की यात्रा कराई है।

वैदिक काल को भी किया शामिल

वैदिक काल का प्रतिनिधित्व गुरुकुलों के एक दृश्य और रामायण व महाभारत के चित्रों की मदद से किया गया है। इसके अलावा बुद्ध और महावीर के जीवन के चित्रण हैं, साथ ही अशोक और विक्रमादित्य के दरबार के दृश्य हैं। चोला कांस्य परंपरा के अनुसार नटराज की एक सुंदर रेखा खींची गई है। भारतीय इतिहास की कई और ज़रूरी शख्सियतों में अकबर, शिवाजी, गुरु गोबिंद सिंह, टीपू सुल्तान और लक्ष्मीबाई शामिल हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में दांडी मार्च करते गांधी जी, और नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी नज़र आते हैं। इसके अलावा हिमालय, रेगिस्तान और सागर के दृश्य भी शामिल हैं।

भारतीय संविधान कला का एक अदभुत भंडार है, जिसको शांति निकेतन और कला भवन ने बनाकर, सही मायनों में इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से लिख दिया गया है।

इमेज: विकिमीडिया / नेशनल इंटरेस्ट 

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