भारत के पहले प्रधानमंत्री चाचा नेहरू की दिलचस्प बातें

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आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को चाचा नेहरू के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि उन्‍हें बच्चों से काफी लगाव था। बच्चों के प्रति उनके इसी प्यार और स्नेह की वजह से भारत में उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। पंडित नेहरू हमेशा बच्चों के प्रति प्यार और उन्हें महत्व देने की बात करते थे। वह कहते थे कि आज के बच्चे कल के भारत की नींव रखेंगे। जिस तरह हम उन्‍हें बड़ा करेंगे, वैसा ही देश का भविष्य भी होगा।

महात्मा गांधी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत की विदेशी नीतियों को डिज़ाइन किया था। वे महात्मा गांधी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्हें आधुनिक भारत का वास्तुकार भी माना जाता है। 15 अगस्‍त 1947 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में लाल किले पर तिरंगा फहराने का सौभाग्‍य पहली बार उन्‍हें मिला था। उन्होंने भारत में आधुनिक उद्‌योगों की आधारशिला रखी और किसानों के लिए नदी-घाटी परियोजनाओं की शुरूआत के साथ पंचवर्षीय योजना शुरू की। वे भारत को आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने शहरों के विकास के साथ-साथ गांवों के विकास पर भी ज़ोर दिया। नेहरू जी के गुणों को भारत के लोग आज भी याद करते हैं।

इमेजः विकिमिडिया

चाचा नेहरू की खास बातें

जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। बच्‍चों से बेइंतहा प्‍यार की वजह से उनके जन्‍मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

पंडित नेहरू ने अंग्रेजी के साथ भारतीय संस्कृति जानने के लिए हिंदी और संस्कृत का भी संपूर्ण ज्ञान प्राप्त किया। भारत को एक स्वतंत्र देश के रूप में देखने का उनका जुनून हद तक था। उन्‍हें कई बार अंग्रेजी हुकूमत ने हिरासत में भी लिया।

वह प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ एक अच्छे राजनेता, बुद्धिजीवी और एक स्कॉलर थे। उन्होंने अर्थव्यवस्था, विज्ञान, टेक्नोलॉजी, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और शिक्षा की बड़ी योजनाओं से देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने का काम किया।

पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहचान एक शानदार लेखक के तौर पर भी होती है। उन्होंने कई किताबें लिखीं, जिनमें ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’, ‘ग्लिम्प्स ऑफ़ वर्ल्ड हिस्ट्री’ और उनकी आत्मकथा ‘टुवार्ड फ्रीडम’ शामिल थी। अपनी बेटी इंदिरा गांधी को लिखे गए पत्रों का एक संग्रह, भी प्रकाशित हुआ, जिसका नाम ‘एक पिता का अपनी बेटी के लिए खत’ था।

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इमेजः विकिमीडिया

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