महिलाओं की मेहनत से नदी को मिला जीवनदान

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देश के लगभग आधे हिस्से में लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं। पीने का साफ पानी ढ़ूंढने के लिये लोग कई-कई किलोमीटर पैदल चलते है और दूसरी तरफ हम अपने प्राकृतिक संसाधनों को गंदा करते जा रहे है। पानी की समस्या को समझते हुये कुछ लोगों ने खुद ही पहल करके पानी के प्राकृतिक स्रोतों को साफ करने का जिम्मा उठाया है। तमिलनाडू के वेल्लोर में बीस हज़ार महिलाओं ने नदी की सफाई करके उसे नया जीवन दिया।

15 साल से सूखी थी नदी

कभी लोगों की प्यास बुझाने वाली वेल्लोर की नागनदी पिछले 15 सालों से सूखी पड़ी है। इसी वजह से गांव के कई परिवार गांव छोड़कर जाने को मज़बूर हो गये क्योंकि न तो पीने का पानी था और न ही खेतों की सिंचाई के लिये पानी की बूंद थी। लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि अब वेल्लोर पास पीने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी है और यह सब 20 हज़ार महिलाओं की कोशिश से संभव हुआ है।

बारिश के पानी से हुआ कमाल

वेल्लोर की नदी का यह कायाकल्प सिर्फ 4 सालों में हुआ है। दरअसल, सरकारी योजना के साथ मिलकर महिलाओं ने 3,500 रीचार्ज कुंए और बड़ी संख्या में गिट्टी की मेढ़ें बनाईं। इससे बारिश के पानी का बहाव धीरे होने लगा। रीचार्ज कुओं की मदद से बारिश के पानी को जमीन के नीचे जमा किया जाता है। इससे ज़मीन के नीचे का जल स्तर बढ़ता है। इन्हीं कोशिशों का नतीजा यह निकला कि सूख चुकी नागनदी 2018 में फिर से बहने लगी।

महिलाओं की मेहनत से नदी को मिला जीवनदान
गांव में  छाई हरियाली  | इमेज : फाइल इमेज

कई एनजीओ भी साथ आई

नागनदी को नया जीवन देने में एनजीओ ने भी पहल की और गांव की महिलाओं को नदी की सफाई की मुहिम में जोड़ा। दरअसल, नदी तभी बहेगी जब भूमिगत जल होगा। इसलिये सिर्फ नदी का बहाव ज़रूरी नहीं है, बल्कि ज़मीन के नीचे पानी का स्तर बढ़ाना भी ज़रूरी है।  ऐसा बारिश के पानी के बहाव को कम करके किया जा सकता है। यह बात एनजीओ ने लोगों को समझाई। अब माना जा रहा है कि इस साल बारिश होने पर नदी और अच्छी तरह बहने लगेगी।

महिलाओं को मिला रोज़गार

इस पहल से जहां नदी तो साफ हो ही चुकी है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को भी रोज़गार मिला। नदी को नया जीवन देने के प्रोजेक्ट को सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इस काम में लगी महिलाओं को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना ऐक्ट के तहत रजिस्टर किया गया। इससे वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी है। वेल्लोर की महिलाओं और संस्था की इस पहल से दूसरी जगहों के लोगों को भी प्रेरणा लेनी चाहिये। लोगों को अपने इलाके में मौजूद पानी के प्राकृतिक स्रोतों की सफाई पर ध्यान देना चाहिये।

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