मां से सीखें ज़िंदगी के 10 ज़रूरी सबक

मां पहली शिक्षक होती है, जो बच्चों को जीवन के कुछ ज़रूरी सबक सिखाती है
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किताबें और ज़िंदगी के अनुभव तो हमें बहुत कुछ सिखाते ही हैं, लेकिन प्यार, समर्पण और भावनाओं के जो सबक मां अपने बच्चों को सिखाती है, वह उन्हें नेक और ईमानदार इंसान बनाता है। हर कोई अपनी मां से ज़िंदगी के कुछ बेहद ज़रूरी सबक सीख सकता है।

निःस्वार्थ प्यार

मां अपने बच्चों से निःस्वार्थ प्यार करती है। इस प्यार के बदले उसकी कुछ पाने की ख्वाहिश नहीं होती। मां की तरह ही हर किसी को अपने परिवार और करीबियों से निःस्वार्थ प्रेम की भावना रखनी चाहिए, इससे संबंधों की मधुरता बनी रहती है।

मुस्कुराकर हालात का सामना

मां चाहे कितनी भी दुखी और परेशान क्यों न हो, अपने बच्चों के सामने वह हमेशा मुस्कुराती रहती है और यही संदेश देती है कि मुश्किल से मुश्किल हालात का सामना भी हंसकर करना चाहिए।

दूसरों के लिए जीना

एक मां हमेशा खुद से पहले अपने बच्चों और परिवार की खुशी चाहती है और उनकी खुशी में ही उसे सुकून मिलता है। मां का यह गुण बच्चों को भी दूसरों के लिए जीना सिखाता है। बड़े होकर वह भी दूसरों की खुशी को अहमियत देते हैं और दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करते हैं।

काम के प्रति समर्पण

सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक मां लगातार अपनी सारी ज़िम्मेदारिया पूरी शिद्दत से निभाती रहती है, भले ही वह कितनी भी थक क्यों न जाए, लेकिन बच्चों के लिए खाना बनाने के लेकर घर को व्यवस्थित करने तक किसी से पीछे नहीं हटती। यह देखकर बच्चे अपना हर काम पूरी तन्मयता से करते हैं और काम के प्रति समर्पण का यही गुण जीवन में आगे बढ़ने में मदद करता है।

धैर्य रखना

बिना धैर्य के सफलता नहीं मिलती, इसकी बदौलत ही इंसान कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहता है और धैर्य का सबक एक मां ही सिखाती है। बच्चे के बार-बार गलती करने पर भी वह बिना गुस्सा हुए धीरे-धीरे वह उसे न सिर्फ चलना, बल्कि पढ़ना-लिखना सब सिखाती है। बच्चा भले ही कितनी भी ज़िद्द क्यों न करें, मां शांत रहती है।

वादे पूरे करना

चाहे उपहार देने का वादा हो या छुट्टी के दिन आपकी पसंदीदा मिठाई बनाने का वादा मां अपने वादे से कभी नहीं मुकरती, वह हर वादा पूरा करती है। निजी ज़िंदगी हो या प्रोफेशनल अपनों और अपने सहयोगियों का विश्वास जीतने के लिए बहुत ज़रूरी है कि आप किसी से किया वादा पूरा करें।

सही गलत में फर्क करना सिखाना | इमेज : फाइल इमेज

अनुशासन

सुबह समय पर उठने से लेकर, नाश्ता-खाना और स्कूल जाने तक मां बच्चों को हर काम समय पर करने की हिदायत देती रहती है और अनुशासन का यह सबक ज़िंदगी भर उनके काम आता है।

समय की अहमियत

किसी भी काम में सफलता के लिए वक्त का पाबंद होना जरूरी है। जैसे मां बिना अलार्म के सुबह 6 बजे से उठकर अपने तय रूटीन का पालन करते हुए हर काम करती जाती है, सबको समय पर नाश्ता, खाना, बच्चों को स्कूल भेजना आदि। इससे बच्चे भी समय की कद्र करना सीख जाते हैं।

पारिवारिक मूल्य

व्यवसायिक सफलता के साथ ही बहुत जरूरी है कि आप एक अच्छे और नेक इंसान भी बने रहें। बड़ों का सम्मान, अपनी परंपराओं का पालन, छोटों से प्यार और विनम्रता से बात करने जैसे गुण मां ही सिखाती है। करियर में सफलता के साथ ही जरूरी है उस सफलता का जश्न मनाने के लिए अपनों का साथ और इसके लिए जरूरी है पारिवारिक मूल्यों की अहमियत समझना।

भावनाओं की कद्र करना

चोट लगने पर कोई और आपकी मरहम-पट्टी तो कर देता है, लेकिन उस चोट से आपको कितना दर्द हो रहा है यह सिर्फ एक मां ही महसूस कर सकती है। वह बिना कुछ कहे ही आपकी भावनाओं को समझ लेती है। मां से मिला यह सबक आपके रिश्ते को मज़बूती देता है और आपको एक विनम्र इंसान बनाता है।

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