यह है मेरा पर्सनल टाइम

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इंसान का जीवन घड़ी की सुई के साथ दौड़ लगाता है। सुबह अलार्म बजते ही वो उठ तो जाता है, लेकिन दिनभर के काम खत्म करके फिर रात में वह कब सोएगा, इसका अंदाज़ा उसे भी नहीं रहता। चाहे कितनी भी कोशिश कर लें कि ऑफिस का काम खत्म करके ही वह घर आए, लेकिन फिर भी घर आकर ऑफिस संबंधी काल्स और ई-मेल्स खत्म होने का नाम नहीं लेते। इस वजह से वह घर आकर भी परिवार के साथ टेंशन-फ्री समय नहीं बिता सकता। धीरे-धीरे यह सब उसका लाइफ-स्टाइल बनता जा रहा है, जो स्ट्रेस संबंधी बीमारियों का एक बहुत बड़ा कारण है।

संसद में पेश हुआ है बिल

घर आकर भी लंबे समय तक प्रोफेशनल डिमांड्स पूरी करने से व्यक्ति के निजी जीवन पर बुरा असर पड़ सकता है। इस बात की गंभीरता को समझते हुए सासंद सुप्रिया सुले ने संसद में ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ नाम का एक प्राइवेट मेंबर्स बिल पेश किया है। उनका मानना है कि इसके लागू होने सो कोई भी व्यक्ति ऑफिस टाइम के बाद कॉल लेने से या ई-मेल पढ़ने/उसका जवाब देने से मना कर सकता है और इसके लिए उस पर कोई ऐक्शन नहीं लिया जा सकेगा।

काम में तालमेल है ज़रूरी  | इमेजः फाइल इमेज

क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

भारत में पेश हुए ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल’ की तरह के कुछ प्रावधानों को फ्रेंच सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए लागू किया गया है। इसी तरह का बिल न्यूयॉर्क में भी पेश किया गया है और जर्मनी में इस पर चर्चा की गई है।

इस दिशा की ओर कदम बढ़ाते हुए एक एंप्लॉयर वेलफेयर एंड लेबर कमिटी की स्थापना की जाएगी। इस कमिटी में संचार और श्रम मंत्री भी शामिल होंगे। यह कमिटी निर्धारित काम करने के घंटों के बाद डिजिटल उपकरणों के प्रभाव के बारे मे एक अध्ययन प्रकाशित करेगी और साथ ही एंप्लॉई-एंप्लॉयर नेगोसिएशन पर चार्टर भी तैयार करेगी।

ज़िम्मेदारी होगी तो थोड़ा बहुत तनाव भी हो सकता है, लेकिन उस तनाव को बेअसर करने के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं।

* बॉडी को करें डी-स्ट्रैस

-होल फूड खाएं

-नियमित व्यायाम करें

-पूरी नींद लें

* माइंड को करें डी-स्ट्रैस

-कृतज्ञता अपनाएं

-मेडिटेशन करें

-‘नो’ बोलना सीखें

* अपने जीवन का उद्देशय न भूलें

-सोशल बनें

-रचनात्मक बनें

-अध्यात्मिक बनें

आपका जीवन केवल ऑफिस के काम तक सीमित नहीं है। दुनिया में बहुत सी चीज़ें हैं, जो आपका इंतज़ार कर रही हैं। आपको बस अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के बीच सही तालमेल बनाना है, फिर देखिए यह ज़िंदगी और भी प्यारी लगने लगेगी।

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