वात दोष आपको बना सकता है जल्दबाज़ और डरपोक

अपने खान-पान और जीवनशैली में थोड़े से बदलाव लाकर वात दोष को कर सकते हैं नियंत्रित
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क्या आपको अक्सर टोका जाता है कि आप हर चीज़ में बहुत जल्दबाज़ी करते हैं या कोई भी निर्णय तुरंत ले लेते हैं, जिसकी वजह से कभी आपको पछताना भी पड़ता है, तो हो सकता है कि आपके इस व्यवहार का कारण वात दोष हो।

क्या है वात दोष

यह दोष वायु और आकाश के मिलने से होता है। वात यानी वायु, आपके शरीर में सभी तरह की गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है। इस की वजह से आपके शरीर की सभी धातुएं काम करती हैं जैसे आपका ब्लड प्रेशर, पसीना आना, शरीर से बेकार चीज़ों का मल-मूत्र के ज़रिए निकलना आदि। आपके शरीर के किसी भी एक हिस्से का दूसरे हिस्से से जो संपर्क है, वो भी वात के कारण ही है और शरीर के हर खाली हिस्से में वात मौजूद होता है। इससे आप समझ सकते हैं कि वात किसी भी दोष को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा सकता है। अगर किसी जगह पर पहले से ही कोई दोष मौजूद हो तो वो और भी बढ़ जाता है।

मुख्यतौर से वात आपके शरीर में पेट या कोलन में पाया जाता है। इसके अलावा यह छोटी-बड़ी दोनों आंतो में, कमर, टांग, जांघ, हड्डियों और नाभि के निचले हिस्से में पाया जाता है।

वात प्रकृति वाले लोगों के शरीर में रूखापन, दुबलापन, नींद की कमी और धीमी-भारी आवाज़ पाई जाती है।

वात दोष आपके स्वभाव पर क्या असर डालता है

  • वात प्रकृति के लोग बहुत जल्दबाज़ी करते हैं।
  • ऐसे लोगों में निर्णय लेने की जल्दबाज़ी देखी जा सकती है।
  • ये जल्दी डर जाते हैं।
  • किसी से बहुत जल्दी चिड़ भी जाते हैं।
  • किसी की बातों को जितनी जल्दी समझते हैं, उतनी ही जल्दी भूल जाते हैं। 
वात दोष
शरीर में वात को संतुलित करना है ज़रुरी | इमेज : फाइल इमेज

वात व्यक्तित्व के लोग ऊर्जावान, जीवंत, मिलनसार, खुले विचारों वाले, और फ्री-स्पिरिट के होते हैं। ऐसे लोग परिवर्तन को आसानी से सीखते हैं। ये लोग सतर्क होते हैं और अपनी बात स्पष्ता के साथ सामने रखते हैं। संतुलित वात वाले लोगों की नींद लंबी और हल्की होती है और पाचन भी संतुलित होता है।

कैसे रखें वात को संतुलित

अपने शरीर में वात को संतुलित करने के लिए इन आदतों में बदलाव करना होगा।

  • खान-पान में सुधार करें – घी-तेल जैसी चीज़ों से बचें। गेंहूं, अदरक, गुड़ और तिल से बनी चीज़ें खाएं। सोया मिल्क पिएं, मूंग दाल, राजमा, गाजर, चुकंदर, पालक, शकरकंद खाएं। साबुत अनाज से परहेज करें, जाड़ों में ठंडी चीज़ें न खाएं और कच्चे केले और नाशपाती न खाएं।
  • जीवनशैली में बदलाव करें – एक निश्चित समय पर उठे और सोएं। रोज़ धूप में ज़रूर टहलें, शांत जगह पर रोज़ ध्यान करें। गरम पानी से नहाएं और गुनगुने तेल से नियमित मसाज करवाएं।
  • नियमित व्यायाम करें – जिस कसरत से आपके शरीर को मज़बूती मिले, उस पर खास ध्यान दें।
  • योग के आसन करें – उत्तानासन, पश्चिमोत्तानासन, बालासान, धनुरासन, व सूर्य नमस्कार।

इन चीज़ों का पालन कर के आप अपने वात को संतुलित रख सकते हैं।

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