हैंडलूम बुनाई से संवार रही है ज़िंदगी

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गुजरात के कच्छ में महिलायें अब सिर्फ दूसरों की मदद ही नहीं, बल्कि खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खुशी से हैंडलूम बुनकर का काम कर रही हैं। पहले उनके काम को न तो पहचान मिली थी और न ही पैसे मिलते थे, लेकिन बदलते वक्त के साथ सब बदल गया और अब तो कच्छ का हैंडलूम बुनकर उद्योग महिलाओं के बिना अधूरा है।

अहम है महिलाओं का योगदान

कच्छ के अवधनगर इलाके की एक महिला बुनकर का कहना है कि पुरूष हमारे बिना वनात (हैंडलूम बुनाई की प्रक्रिया) कर ही नहीं सकते। महिलायें हमेशा से इस बुनाई प्रक्रिया की रीढ़ की हड्डी रही हैं, लेकिन पहले इस सेक्टर में महिलाओं के काम की कोई कद्र नहीं थी और न ही उन्हें काम के पैसे ही मिलते थे। हालांकि अब महिलायें अपने हक के लिए आवाज़ उठाना सीख गई हैं। इसके साथ ही बुनाई क्षेत्र में हुये बदलाव, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से ज़्यादा संपर्क ने महिलाओं के हालात बदल दिये हैं।

प्लास्टिक पर बुनाई

पहले महिलायें करघे पर बुनाई के काम में संकोच करती थी, लेकिन अब वो पूरे आत्मविश्वास के साथ बुनाई का काम कर रही हैं। कुछ महिलायें तो आजीविका के लिए एक्रेलिक और काला कॉटन और यहां तक की प्लास्टिक पर भी बुनाई कर रही है। इससे एक फायदा यह भी हो रहा है कि प्लास्टिक के रूप में कचरा कम होगा। दरअसल, प्लास्टिक पर बुनाई का आइडिया कच्छ के इनोवेशन ग्रुप खमीर ने दिया था, जिससे महिलाओं में बुनाई के नए कौशल विकसित हो और वह बाज़ार को समझ सकें।

हैंडलूम बुनाई से संवार रही है ज़िंदगी
बुनकर बन आत्मनिर्भर हो रही महिलायें  | इमेज: खमीर

अन्य महिलाओं को रोज़गार

हंसाबेन मेरिया,कांकुबेन अमृतलाल वंकर, जयश्रीबेन हरिजन जैसी महिलाओं ने एक्रेलिक और कॉटन बुनाई में दक्षता हासिल कर ली है और अब वो उद्यमी बन चुकी हैं। ऐसी महिलायें अपनी जैसी अन्य महिलाओं को नौकरी देकर आत्मनिर्भर बना रही हैं। अपनी पहुंच और नेटवर्क बढ़ाने के लिए यह देश-दुनिया की सैर करती हैं और जगह-जगह एग्ज़िबिशन करती हैं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को हैडलूम बुनाई के बारे में पता चले।

घर में लगाया करघा

कुछ लोगों ने तो घर में ही लूम (करघा) लगवा दिया है ताकि उनके घर की महिलायें आराम से घर बैठे अपना काम कर सकें। हैंडलूम बुनाई में महिलाओं को मिली नई पहचान का ही नतीजा है कि आजकल की लड़कियां भी इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं। दो बेटियों के पिता का कहना है कि फैक्ट्री में जाकर काम करने से अच्छा है कि बेटियां घर पर ही करघे पर काम करें। यह ज़्यादा सुरक्षित और आरामदेह है।

परंपरा से जुड़े रहना

बुनाई के डिज़ाइन और उत्पादों की नई ऊर्जा और परिदृश्य पहले से ही पनप चुके वनात को बदल रहे हैं। आज के ज़माने में जब लोग नौकरी और कमाई के चक्कर में अपनी परंपराओं से दूर जा रहे हैं, ऐसे में महिलाओं के धैर्य और दृढ़संकल्प की बदौलत हैंडलूम बुनाई मेनस्ट्रीम व्यवसाय का अच्छा विकल्प बन गया है। इसने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है।

इमेज: खमीर

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