6 किताबें आपके बच्चों को सिखाएंगी जीवन के सबक

जीवन की सीख देती है बच्चों की ये किताबें
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क्या आपके बच्चे को किताब पढ़ने का शौक है? अगर हां, तो उसे कुछ हिंदी की किताबों से भी परिचय ज़रूर करवाएं। भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीय भी हिंदी की अहमियत समझते हैं। वो हर कोशिश करते हैं कि उनके बच्चे अपनी भाषा, अपनी संस्कृति के बारे में समझें और किताबों से अच्छा माध्यम क्या होगा। हिंदी में कहानी की किताबें आपके बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति दोनो के करीब ले आती हैं। हिंदी भाषा 550,000,000 लोगों द्वारा बोली जाती है, और इस बात की अहमियत समझते हुए ज़्यादा से ज़्यादा पब्लिशर्स हिंदी में कहानी की किताबों को छापने के लिए प्राथमिकता देते हैं।

चलिए आपको कुछ ऐसी किताबें बताते है, जो आपके बच्चे को कहानी के साथ-साथ चुपके से हमारे देश की संस्कृति भी सिखाएंगी।

बैंगनी जोजो

रंगों की पहचान दिलाती किताब | इमेज : बिलिंगुअल किड्स पॉट

यह किताब समीरा ज़िया कुरेशी ने लिखी है और तीन साल से ऊपर के बच्चों के लिए है। इस कहानी में जोजो नाम का एक कुत्ता अपने ऊपर हुए बैंगनी रंग को देखता है, और उसे रंगने वाले लोगों को ढूंढता है। इस कहानी से बच्चे हिंदी पढ़ने के साथ-साथ रंगों की पहचान भी सीखते हैं।

नन्हीं कहानियां

यह किताब सोरितो गुप्तो ने लिखी है और चार साल से बड़े बच्चों बच्चों के लिए है। यह चार कहानियों की किताबों का सेट है जो अपने ही अंदाज़ में बच्चों को जानवरों के माध्यम से सीख दे जाती हैं।

तेनाली रमन

मैपल प्रेस द्वारा प्रकाशित यह किताब 7 साल से बड़े बच्चों के लिए है। इसमें कृष्णदेव महाराज के दरबार में तेनाली रमन नाम का दरबारी अपनी बुद्धिमानी से लोगों की समस्याओं को सुलझाने में मदद करता है। समस्या को वह बड़ी ही चतुराई से सुलझाता है, जिससे बच्चों को अच्छे और बुरे की पहचान करने में मदद मिलेगी।   

क्या में छोटी हूं

सवालों के जवाब है ढ़ूंढती | इमेज : बिलिंगुअल किड्स पॉट

इस किताब को फिलिप विंटरबर्ग और नजा विचमैन ने पांच साल और बड़े बच्चों के लिए लिखा है। इस कहानी में तानिया एक सवाल ‘क्या मैं छोटी हूं’ का जवाब ढूंढने निकल जाती है और अपनी राह में कई तरह के जानवरों से मिलती है।

पतंग पेड़

जीवन में आगे बढ़ने की देताी है प्रेरणा |इमेज : बिलिंगुअल किड्स पॉट

अवंति मेहता की लिखी इस किताब में एक पेड़ की कहानी है, जो हर मौसम में  अलग – अलग परेशानियों से जूझता है और फिर उस मुश्किलों के आसान जवाब भी देता है। हालांकि किताब 7 साल की उम्र के बच्चों के लिए है। लेकिन अगर आपके बच्चे का किताबे पढ़ने का शौक नया है, तो आप उसे ये किताब दे सकते हैं।

पंचतंत्र

यह कहानियों का समूह तीन साल से 10 साल के बच्चों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। ऐसा माना जाता है कि ये कहानियां प्राचीन भारत के समय में लिखी गई थी। हालांकि इसके लेखक के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है, लेकिन संस्कृत के विद्वान विष्णु शर्मा को इनका श्रेय दिया जाता है। इन कहानियों में बच्चे डर से जीतना, निष्पक्षता और न्याय, दोस्ती और कई रोज़मर्रा में काम आने वाले सबक सिखाएंगी

बच्चों को उपहार के तौर पर किताबे देना सिखाएं ताकि उनकी अपनी भाषा औऱ संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ सके।

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