आध्यात्मिक विकास के लिए करिए 8 उपाय

खुद से जुड़कर शांति और आनंद को प्राप्त करें
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आध्यात्मिक विकास हमारी काल्पनिक और असत्य अवधारणाओं को दूर करने की एक प्रक्रिया है।  यह हमारे विश्वास और अच्छे विचारों को जागरूक करता है। यह प्रक्रिया खुद को खुद से जोड़ती है, जो पहले से ही हमारे अंदर मौजूद है, लेकिन अहंकार और नेगेटिव विचारों के कारण हम अपने व्यक्तित्व को पहचान नहीं पाते हैं।

आध्यात्मिक विकास क्या है?

यह आंतरिक जागृति की ऐसी प्रक्रिया है, जो मन और अहंकार से परे जाना और यह महसूस करना कि हम असल में कौन हैं? जीवन के सभी क्षेत्रों में सभी के लिए आध्यात्मिक विकास का बहुत महत्व है। आध्यात्मिक विकास सभी के लिए एक बेहतर और एक समान जीवन जीना का तरीका है,  जो तनाव, डर और चिंता से मुक्त जीवन का आधार बनता है।

आध्यात्मिक विकास हमें यह सीखने में मदद करता है कि परिस्थितियों और नेगेटिव विचार हमारे आंतरिक अस्तित्व और मन की स्थिति को प्रभावित न करने दें। यह हमें संयम और शांत रहने में मदद करता है और आंतरिक शक्ति को बढ़ाता है।

आध्यात्मिक विकास कैसे करें?

1- आध्यात्मिक और प्रेरणादायक किताब पढ़ें

अच्छे विचारों वाली कहानी या किस्से वाले किताब को पढ़ने से विचार भी पॉज़िटिव बनते हैं। किताबों में आप जो पढ़ते हैं, उसके बारे में सोचे और पता करें कि आप अपने जीवन में उन जानकारियों का उपयोग कैसे कर सकते हैं।

2- हर रोज़ कम से कम 15 मिनट मेडिटेशन

यदि आप ध्यान करना नहीं जानते हैं, तो केवल कुछ मिनट बिना किसी हरकत के केवल शांत बैठ जाएं। ऐसी किताबें या Thinkright.me  के ऐप का उपयोग करे, जो आपको मेडिटेशन सिखा सकते हैं। मेडिटेशन के ज़रिये एकाग्रता अभ्यास करें और अपने मन को शांत करना सीखें।

4 – स्वीकार करना सीखे

सच्चाई को देखने की कोशिश करें और स्वीकार करें। दुनिया को पॉज़िटिव नज़रिये से देखे। जब आप इस विचार को स्वीकार कर लेंगे, तो जीवन और उन घटनाओं और परिस्थितियों के प्रति आपके दृष्टिकोण को बदल देगा जिनसे आप गुजरते हैं।

5- अपने भीतर देखो

अक्सर अपने आप में और अपने दिमाग में देखें, और यह पता लगाने की कोशिश करें कि ऐसा क्या है जो आपको सचेत और जीवंत महसूस कराता है। यह सुख और मन की शांति के जीवन की कुंजी है।

6- पॉज़िटिव सोचो

यदि आप खुद को नकारात्मक सोचते हुए पाते हैं, तो तुरंत सकारात्मक सोच की ओर बढ़ें। जो आपके मन में प्रवेश करता है उस पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें। पॉज़िटिविटी के दरवाज़ा खोलें और नकारात्मक के लिए इसे बंद करें।

7- खुश रहने की आदत डालें

जीवन के हर चीज़ में अच्छा, सुंदर और पॉज़िटिव देखने की कोशिश करें। इससे आपको मन की एक सुखद स्थिति विकसित करने में मदद मिलेगी। खुशी आपके अंदर से आती है, जब आप नेगेटिव विचारों और भावनाओं को अपने मन में नहीं आने देते, तो ये मन में बाहरी परिस्थितियों से चोट नहीं पहुंचाते।

आपके पास जो कुछ भी है उसके लिए और जो कुछ भी आप प्राप्त करते हैं या प्राप्त करते हैं उसके लिए धन्यवाद कहकर देखों, मन में सुखद का अहसास होगा।

8-अपनी इच्छा शक्ति का प्रयोग करें

रोज़मर्रा के छोटे-छोटे मामलों में भी अक्सर अपनी इच्छाशक्ति और निर्णय लेने की क्षमता का प्रयोग करें। व्यक्तिगत रूप से आपसे संबंधित मामलों में अपने निर्णय खुद लें। यह आपको मज़बूत करेगा और आप अपने दिमाग पर नियंत्रण कर पाएंगे।

आध्यात्मिक विकास जिम्मेदारियों से बचने का बहाना नहीं है। यह एक मज़बूत, खुश और अधिक ज़िम्मेदार व्यक्ति बनने और बनाने का एक तरीका है। एक संतुलित जीवन के लिए बहुत ज़रूरी है कि हम न केवल शरीर, भावनाओं से, बल्कि और मन की भी आवश्यकताओं का ध्यान रखें और यही आध्यात्मिक विकास की भूमिका है।

और भी पढ़िये :  खुद को और दूसरों को माफ करना सिखाता है मेडिटेशन

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