जीवन में पॉजिटिविटी के लिए जताएं आभार

शुक्रिया कहने या आभार जताने की आदत बनाने से जीवन बेहतर बनता है
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कहने को तो “शुक्रिया” एक शब्द मात्र है लेकिन असल में यह कई वाक्यों का सार है। अगर आपने कभी इस शब्द का इस्तेमाल किया हो, तो सामने वाले के चेहरे पर एक खुशी से भरी मुस्कुराहट भी ज़रूर महसूस की होगी  क्योंकि आभार जताना एक कला है। एक ऐसी कला जिसमें सामने वाले के मन को मोह लेने की शक्ति है।

आभार जताना रोजमर्रा के जीवन में कैसे है सहायक?

मनोविज्ञान और मनोचिकित्सक यह बात सिद्ध कर चुके हैं कि आभार जताने से बहुत सारे शारीरिक और मानसिक फायदे प्राप्त होते हैं। कुछ महत्वपूर्ण फायदे हैं-

आशावादी नज़रिया बनाने में सहायक

 मानव व्यवहार पर शोध करने वाले डॉक्टर आभार जताने की आदतऔर पॉज़िटिव दृष्टिकोण के बीच पर्याप्त संबंध साबित कर चुके हैं। अगर आप धन्यवाद कहने की आदत डालते हैं, तो आप नकरात्मकता से दूर रहते हैं और जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण अधिक स्पष्ट होता है।

डिप्रेशन से दूरी

आभार जताना दूसरे के साथ-साथ खुद के लिए भी लाभदायक होता है, क्योंकि इससे आपका दृष्टिकोण बड़ा होता है। मानसिक समस्याएं एंग्जायटी, डिप्रेशन आदि से राहत मिलती है और खुशी बढ़ती है।

संबंधों में गहराई

यह हम सब जानते हैं अगर आप अपने पार्टनर या दोस्तों को धन्यवाद देना सीख लेते हैं, तो निश्चित तौर पर उनके साथ आपके संबंध बेहतर होते हैं। इसका सकारात्मक असर आपकी मानसिक सेहत पर पड़ता है।

शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार

हावर्ड जैसे संस्थान इस बात को प्रमाणित कर चुके हैं कि अगर आप शुक्रिया कहने या आभार जताने की आदत पैदा करते हैं, तो इससे रक्तचाप, शुगर आदि में सुधार होता है और बेहतर नींद प्राप्त होती है।

आभार जताने को कैसे बनाये आदत

आभार जताना कोई साधारण कार्य नहीं है। यह किसी-किसी के ही स्वभाव का हिस्सा बन पाता है। आपको भी यह टेक्नीक ज़रूर सीखनी चाहिए, इसके लिए निम्न तरीके अपनाएं-

परिवार और दोस्तों को कहें शुक्रिया

आदतों के निर्माण में परिवार का सदा ही महत्वपूर्ण योगदान होता है। परिवार की मदद लेकर यह आदत भी आप बड़ी आसानी से बना सकते हैं। जब आप किसी मौके पर शुक्रिया कहना भूल जाओ तो बस आपको अपने परिवार से टोकने के लिए कहना है।

स्टीकर तकनीक

रिमाइंडर लगाने की यह विधि आपने कभी न कभी ज़रूर अपनाई होगी। इस विधि में आपको अपने फोन, डिनर टेबल, हॉल जहां मेहमान आते हो जैसी जगहों पर नोट्स लगाने हैं, ताकि आपको याद रहे कि आपको धन्यवाद देना है। इस तरह धन्यवाद कहने की प्रक्रिया कुछ ही हफ्तों में आपकी आदत में बदल जाएगी।

हो सकता है आभार जताते समय कई बार आप में संकोच या अहम का भाव आता हो। लेकिन ध्यान रखें आभार जताना या धन्यवाद कहना आपकी परिपक्वता को दर्शाता है। यह आपमें ज़िम्मेदारी का भाव पैदा करता है और आपके व्यक्तित्व को उदार बनाता है। इसलिए पॉज़िटिव जीवन के लिए इस आदत को ज़रूर अपनाएं।

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