बच्चों की करें मदद ताकि बना पाएं वह अपनी अलग पहचान

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“मैं ऐसा क्यों हूं”, “क्या मुझे इन सब के जैसा होना चाहिए, नहीं मैं ऐसा ही ठीक हूं। लेकिन कुछ गलत हो गया तब क्या ये फिर मुझपर हंसेंगे?  

ये कुछ सवाल है जो बढ़ती उम्र के साथ अपनी व्यक्तिगत पहचान को लेकर बच्चों के दिमाग में अक्सर कौंधते ही हैं। शायद अपनी पहचान को लेकर भी आपके दिमाग में भी कभी ऐसे प्रश्न आये होंगे। खैर ये वही समय है जब आपको जागरूक पैरंट्स का किरदार निभाते हुए उसके इन प्रश्नों का उत्तर देना होगा तथा उनके लिए एक ऐसे माहौल का निर्माण करना होगा जहां उनके व्यक्तित्व को उभरने का मौका मिले। वैसे भी जैसे-जैसे समाज में सहिष्णुता की कमी होती जा रही है ऐसे में ये और भी ज़रूरी है कि आपका बच्चा अपनी व्यक्तिगत पहचान के प्रति आश्वस्त रहे। तो आइए जानते एक पैरंट्स के तौर पर बच्चे के लिए क्या करना चाहिए-

बात-चीत करें

ध्यान रखें जब कभी आपका बच्चा आपसे बात करना चाहे तो उसे ध्यान से सुनें। इसके दो फायदे हैं- पहला उसे खुद की अहमियत का पता चलेगा और दूसरा ये कि अगली बार से अपनी फीलिंग या नज़रिया बताने में हिचकिचाएगा नहीं। धीरे-धीरे जैसे-जैसे वो बड़ा होता जाएगा तब न केवल उसके पास बातचीत करने की समझ होगी बल्कि दूसरे की बातों को सम्मान करने का नज़रिया भी होगा।

एक्स्प्लोर और एक्सपीरियंस करने में करें उसकी मदद

एक पेरेंट्स के तौर पर अगर आप अपने बच्चे को आज़ाद छोड़ते हैं ताकी वह नए अनुभव कर सके और दुनिया को देखने का नया नज़रिया बना सके, तो इससे बेहतर तोहफा उसके लिए और कुछ भी नहीं हो सकता। क्योंकि ये अनुभव न केवल उसकी क्षमताओं को बढ़ाते हैं बल्कि एक व्यक्तित्व का निर्माण भी करते हैं।

निर्णय लेने की आज़ादी

अगर शुरुआती तौर पर घर के अंदर कुछ कामों में बच्चों को निर्णय लेने देते हैं तो यह उनको ज्यादा ज़िम्मेदार बनाता है। इसके अलावा बच्चों को प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए दें, साथ ही उन्हें मोटिवेशन या कुछ केस स्टडी बताएं ताकि वह घबराएं नहीं और खुल के प्रदर्शन करें।

सम्मान

यह एक ऐसी भावना है जिसकी हर कोई कामना करता है फिर छोटा सा बच्चा ही क्यों न हो। हो सकता है उसकी पसंद दूसरों से कुछ अलग हो लेकिन अगर आप अपने बच्चे की पसंद का सम्मान करते है तो उसमें दुनिया को फेस करने की ताकत बढ़ जाती है।

असफलताओं को करें सेलिब्रेट

कहते है असफलताएं इंसान को सफलताओं से भी ज्यादा सिखाती हैं। इसलिए दबाव बनाने की बजाय बच्चों के साथ गलतियों का विश्लेषण करें ताकि अगली बार वह और  अधिक तैयारी से आगे बढ़े।

कहा जाता है बचपन की नींव जितनी अच्छी होती है आगे जाकर वह बच्चा उतनी अच्छी पर्सनालिटी बनकर निखरता है। इसलिए इन बातों को अपने बच्चों के लिए अपनाएं, जिससे वह एक अलग पहचान बनाकर जीवन  में लगातार आगे बढ़ता रहे।

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