मानसिक और दिल की सेहत के लिए खतरनाक है तनाव, जानिए इससे निपटने के आसान तरीके

जीवनशैली में बदलाव से तनाव काफी हद तक कम किया जा सकता है
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स्ट्रेस यानी तनाव एक ऐसा शब्द है जिससे आज के दौर में शायद ही कोई अछूता हो। किसी को प्रमोशन की टेंशन, तो किसी को एग्ज़ाम की, किसी को घर और बच्चों को मैनेज करने की चिंता तो किसी को नौकरी छोड़ने पर तनाव हो सकता है। तनाव के कारणों की लिस्ट बहुत लंबी है। कुछ समय के लिए तनाव होना सामान्य है, लेकिन जब यह क्रॉनिक यानी लंबे समय के लिए बना रहे तो इसका आपकी सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए समय रहते तनाव से निपटना ज़रूरी है।

मॉर्डन लाइफस्टाइल में क्यों बढ़ रहा है तनाव?

बढ़ती अपेक्षाएं, दूसरों से आगे निकलन की होड़, कम समय में बहुत कुछ पाने की चाह, बच्चों के साथ नौकरी मैनेज करने का दवाब ऐसे ही बहुत से कारण हैं जो मौजूदा दौर में लोगों का तनाव बढ़ा रहे हैं। चाहकर भी आप तनाव से पूरी तरह बच नहीं सकतें। यह कुछ देर के लिए होता है तो चिंता की बात नहीं है क्योंकि यह स्वाभाविक है, लेकिन लंबे समय तक किसी बात की चिंता रहे तो इसका असर आपकी मानसिक सेहत और दिल की सेहत पर भी पड़ने लगता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

आप हमेशा मायूस रहते हैं, किसी काम में मन नहीं लगता, चीज़ें भूलने लगते हैं, क्रिएटिविटी खत्म हो जाती है, नींद नहीं आती, तनाव धीरे-धीरे अवसाद की ओर ले जाता है, जो बहुत ही गंभीर स्थिति है। व्यक्ति को हमेशा अकेलापन महसूस होता है। तनाव की स्थिति में कोर्टिसोल हार्मोन का स्राव होता है जिसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है।

दिल की सेहत पर असर

एक अध्ययन के मुताबिक, लंबे समय तक तनाव में रहना आपके दिल की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है। यह कार्डिवस्कुलर डिसीज, कोरोनरी हार्ट डिसीज और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देता है। आपने गौर किया होगा कि अधिक तनाव में होने पर आपकी धड़कनें और सांसें तेज़ चलने लगती हैं। दरअसल, तनावपूर्ण स्थिति में दिमाग को एपिनेफ्रीन और नॉरपेनेफ्रिन हार्मोन के अधिक उत्पादन का संकेत जाता है। ये दोनों ही हार्मोन तनावपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए आपको तैयार करके हैं जिसके परिणामस्वरूप सांसें तेज़ चलने लगती हैं, धड़कन बढ़ जाती है, मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है और शरीर में ऊर्जा की आपूर्ति भी बढ़ जाती है।

दिल को कैसे रखें तनाव से सुरक्षित?

तनाव से बचने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में थोड़े बहुत बदलाव करने होंगे।

  • रोज़ाना कम से कम 30 मिनट की कसरत करें। इससे तनाव कम होगा और आपका मूड अच्छा रहेगा।
  • रिलैक्सेशन तकनीक का सहारा लें। यह कुछ भी हो सकती है जैसे मेडिटेशन, योगा, ताई ची, अरोमाथेरपी, डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज़, मसाज आदि।
  • जिस काम से आपको खुशी और सुकून मिलें वह करें। जैसे संगीत सुनना, डांस, किताब पढ़ना, पसंदीदा धारावाहिक देखना, गार्डन में सैर करना, अपने पालतू जानवर के साथ समय बिताना।
  • तनाव से दूर रहने के लिए नींद बहुत ज़रूरी है। अच्छी नींद के लिए रात में सोने से पहले गैजेट्स से दूर रहें और मेडिटेशन करें।
  • दोस्तों व परिवार के साथ समय बिताएं और खुलकर बात करें। भले ही आप पूरे हफ्ते व्यस्त रहते हैं, लेकिन छुट्टी के दिन तो ऐसा कर ही सकते हैं न।
  • यदि आपको लगे कि समस्या ज़्यादा बढ़ गई है, तो मनोचिकित्सक की सलाह लें।

अधिक सोचने की आदत पर विराम लगाते हुए वर्तमान पल में जीना सीखना भी तनाव से बचने का कारगर तरीका हो सकता है।

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