बच्चों के लिए मेडिटेशन क्यों है ज़रूरी

बच्चों को मेडिटेशन सिखाने का तरीका है बड़ा आसान
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आजकल के बच्चों की ज़िंदगी पहले जैसी नहीं रह गई, तभी तो छोटी उम्र से ही वह तनाव और घबराहट का शिकार हो रहे हैं। ऐसे माहौल में उनके लिए मेडिटेशन बहुत ज़रूरी है। मेडिटेशन के ज़रिए छोटी उम्र से ही वह अपनी भावनाओं पर काबू करना, मानसिक शांति और वर्तमान पल में जीना सीख जाते हैं। इससे बड़े होने पर ज़िंदगी की समस्याओं से तालमेल बिठाना उनके लिए आसान हो जाता है। कुछ लोगों को लगता है कि बच्चों को मेडिटेशन सिखाना बहुत मुश्किल काम है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। बस एक बार आप कोशिश करके तो देखिए, बच्चे खुद ब खुद ध्यान लगाना सीख जाएंगे।

बच्चों के लिए मेडिटेशन के फायदे

  • किसी चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने में आसानी होती है, यानी वह पढ़ाई भी मन लगाकर करते हैं।
  • एकाग्रता बढ़ती है।
  • नींद अच्छी आती है।
  • सकारात्मक तरीके से चीज़ों को देखते हैं।
  • दिमाग शांत होता है और खुश रहते हैं।
  • गुस्सा नहीं आता।
  • आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • वर्तमान में जीना सीख जाते हैं।

मेडिटेशन बच्चों के लिए भी उतना ही फायदेमंद और ज़रूरी है जितना कि बड़ों के लिए, लेकिन हां बच्चों को मेडिटेशन सिखाने का तरीका थोड़ा अलग होता है। उन्हें आसान और मज़ेदार तरीके से ध्यान लगाना सिखाएं ताकि वह बोर न हों, क्योंकि यदि कोई काम उन्हें पसंद नहीं आएगा तो वह दोबारा नहीं करेंगे।

बच्चों से कराएं मेडिटेश की प्रैक्टिस | इमेज : फाइल इमेज

किस उम्र से सिखाएं मेडिटेशन?

आप 3-4 साल की उम्र से ही बच्चों को मेडिटेशन की थोड़ी-बहुत ट्रेनिंग दे सकते हैं। ज़रूरी नहीं है कि वह सही तरीके से करें, बस शुरुआत करना ज़रूरी है। 7-8 साल की उम्र और उससे बड़े बच्चों को आप ब्रिदिंग और मंत्र मेडिटेशन सिखा सकती हैं, जबकि टीनेजर्स को मेडिटेशन की अलग-अलग तकनीक बताई जा सकती है।

कैसे सिखाएं बच्चों को मेडिटेशन?

बच्चों को मेडिटेशन सिखाना थोड़ा मुश्किल काम इसलिए क्योंकि आपको उनके स्तर पर आकर चीज़ों को समझना पड़ेगा, वैसे कुछ आसान तरीकों से आप उन्हें मेडिटेशन सिखा सकती हैं।

सुबह की सैर पर ले जाएं

जब आप सुबह सैर पर जाएं तो बच्चे को भी लेकर जाएं और थोड़ी देर सैर करने के बाद एक शांत जगह पर पद्मासन में बैठ जाएं। बच्चे को भी उसी तरह बैठने के लिए कहें और उनसे कहें कि आंखें बंद कर लें और किसी भी चीज़ के बारे में न सोचे। बैठते समय वह पूरी तरह से रिलैक्स होने चाहिए और रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी हो इस बात का ध्यन रखें। यदि ध्यान लगाने में दिक्कत हो रही है तो कोई सुकुन देने वाला म्यूज़िक लगा सकती हैं।

सांसों पर ध्यान केंद्रित करना

5-6 साल या इससे बड़ी उम्र के बच्चों को आप सांस लेते और छोड़ते समय उस पर ध्यान लगाना सिखा सकती हैं। उनसे कहें कि पहले आरामदायक मुद्रा में बैठ जाएं और सांस लेकर मन में 3 तक गिनें फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ें। कुछ देर ऐसा करने के बाद बच्चे से पूछें कि उन्हें कैसा महसूस हो रहा है। यदि वह दिलचस्पी न दिखाएं तो कहानी बनाकर सुनाएं जिसमें कहानी के किरदार (बच्चे/जानवर) मेडिटेशन करते हैं।

वॉकिंग मेडिटेशन

यदि आपका बच्चा बैठना नहीं चाहता है, तो उसे पार्क में ले जाएं और धीरे-धीरे चलने को कहें। चलते समय अपने हर कदम पर ध्यान देने और हाथों की पोजिशन पर ध्यान देने के लिए कहें। इससे बच्चे में अवेयरनेस बढ़ती है।

किसी चीज़ पर ध्यान केंद्रित करना

इसमें पहले तो 2-3 मिनट तक बच्चे को आंखें बंद करके अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहें और फिर उन्हे कहें कि वह अपने किसी भी प्रिय शख्स (खिलाड़ी, टीचर, संगीतकार आदि) के चेहरे की कल्पना करे और उसी पर फोकस करे। यदि कोई विचार आता है तो उस पर ध्यान न दे, बस उस चेहरे पर ही कुछ देर तक स्थिर होकर ध्यान केंद्रित करे।

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