अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस – 8 मार्च को मनाने की वजह

महिलाओं को खास महसूस कराने और सम्मानित करने का दिन है महिला दिवस
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एक रानी की तरह सोचिए। रानी असफलता से नहीं डरती, क्योंकि वह सफलता की एक सीढ़ी है।

ओपरा विनफ्रे का यह कथन दुनियाभर की सभी महिलाओं को अपनी ताकत और मज़बूती दिखाने का आईना है। आज महिलाएं रूढ़िवादी दरवाज़ों को तोड़कर सफलता के नए आयाम लिख रही है, लेकिन 19वीं सदी में ऐसा नहीं था। क्या ऐसी वजहें रही, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का जन्म हुआ, आइये आगे के लेख में पढ़ते हैं।

कैसे हुई महिला दिवस की शुरुआत?

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत की कहानी काफी दिलचस्प है। दरअसल महिलाओं ने अपने अधिकारों की मांग के लिए आंदोलन चलाया। साल 1908 में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में हज़ारों महिलाओं ने रैली निकाली। वह पुरुषों के समान वेतन, अधिकार और वोट के अधिकार की मांग कर रही थी। महिलाओं के इस विरोध प्रदर्शन का ही असर था कि करीब एक साल बाद 1909 में अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने पहला महिला दिवस मनाया।

इसके बाद 1911 में चार देशों ऑस्ट्रि‍या, डेनमार्क, जर्मनी और स्विटजरलैंड में भी लाखों महिलाएं नौकरी में समानता (पुरुषों के समान वेतन), सरकारी संस्थाओं में बराबरी और वोट डालने के अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आई। इन देशों में पहली बार 19 मार्च 1911 को महिला दिवस मनाया गया। हालांकि आधिकारिक दौर पर संयुक्त राष्ट्र ने 1975 अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को मान्यता दी गई और उस साल यानी पहले औपचारिक अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम थी ‘सेलीब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फॉर द फ्यूचर।’

समानता के अधिकार के रूप मनाया जाता है महिला दिवस | इमेज : फाइल इमेज

8 मार्च ही क्यों?

जानकारों की मानें तो महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का ख्याल अमेरिकी सामाजिक कार्यकर्ता क्लारा ज़ेटकिन नामक महिला का था। हालांकि उन्होंने इसके लिए कोई तारीख नहीं बताई थी। अन्य यूरोपीय देशों की तरह ही रूस में भी महिलाओं ने अपने अधिकारों और शांति के लिए हड़ताल की। यह हड़ताल 1917 में हुई थी और रूसी महिलाएं ‘ब्रेड एंड पीस’ यानी भोजन और शांति की मांग करते हुए 4 दिनों तक हड़ताल पर थी। इसकी वजह से रूस के सम्राट ज़ार निकोलस को अपने पद से हटना पड़ा और वहां एक अस्थायी सरकार बनाई गई जिसने महिलाओं को वोट करने का अधिकार दिया।

जानकारों के अनुसार जब रूस में ये हड़ताल हुई थी, तो वहां जूलियन कैलेंडर का इस्तेमाल होता था और उसके अनुसार हड़ताल 23 फरवरी को हुई थी। जबकि उस समय दुनिया के अन्य देशों में ग्रेगोरियन कैलेंडर का उपयोग होता है जिसमें तारीख 8 मार्च थी। इसलिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को 8 मार्च को मनाया जाने लगा। रूस की कम्यूनिस्ट पार्टी के संस्थापक व्लादिमीर लेनिन ने महिलाओं के इस आंदोलन को बहुत महत्वपूर्ण माना और 8 मार्च महिला दिवस को रूस में आधिकारिक छुट्टी की घोषणा की। साल 2014 के बाद से 100 से अधिक देशों में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा।

महिला दिवस की शुरुआत महिलाओं ने अपने समानता के अधिकार के तौर पर की, इसलिए इस दिन महिलाओं को उनके अधिकारों और लैंगिक समानता के प्रति जागरूक करने का भी मंच बन गया है।

और भी पढ़िये : हर क्षेत्र में स्टीरियोटाइप को तोड़ती महिलाएं

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