कभी-कभी डर अच्छा है, जानिये 5 कारण

डर के आगे जीत है क्योंकि इससे चीज़ों को सामना करने की शक्ति मिलती है।
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डर इंसान का स्वाभाविक भाव है, जो सबको लगता है और जिससे हर कोई बचना चाहता है। देखा जाएं तो डर अच्छा है, क्योंकियह हमें खतरे से सावधान करता है और इससे निपटने के लिए तैयार करता है। इसलिए कभी- कभी डर अच्छा है।

सामना करने की शक्ति

जब व्यक्ति खतरे को महसूस करता है, तो दिमाग तुरंत प्रतिक्रिया करता है और तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करने वाले संकेत भेजता है। यह संकेत शारीरिक प्रतिक्रियाओं का कारण बनता है। ये शारीरिक संवेदनाएं डर का सामना करने में मदद करता है। डर से व्यक्ति कमजोर नहीं, बल्कि उसे आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है।

खुद की रक्षा करना

डर एक ऐसा संकेत है, जो व्यक्ति को खतरे से सावधान करता है। डर के कारण ही व्यक्ति अपने आसपास के खतरों के बारे जागरूक रहता है और अपनी देखभाल भी करता है। इस सर्तकता से वह खुद को सुरक्षित रखता है। बिना डर के खतरा ही रहता है। अगर डर नहीं होगा तो व्यक्ति के पास लड़ने के लिए उर्जा, शक्ति और ध्यान नहीं रहेगा।

डर का डटकर सामना करें | इमेज : फाइल इमेज

आज में जीना

भविष्य के अनचाहे परिणामों बारे में सोचकर व्यक्ति हमेशा डरता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है कोरोना का ये पल। कहीं कोरोना न हो जाए? थोड़ी-सी सर्दी या खासी क्या हुई है, तो जांच कर लेते हैं। सेहत के साथ कोई लापरवाही नहीं करना है। इस डर से लोग खुद की सेहत पर ध्यान दे रहे है और आज में जीने के लिए हर संभव काम कर रहे हैं।     

आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार

डर वास्तविक या काल्पनिक बाधाओं की जांच करने के लिए व्यक्ति को मज़बूर करता है, जो उसके लक्ष्यों को प्राप्त करने से रोक रहे हैं। अगर व्यक्ति अपने सपनों को पूरा करने के बारे में कुछ बड़ा करने की सोचता है, तो उससे पहले थोड़ा बहुत डर मन में आ ही जाता है। जो लक्ष्य प्राप्त करने में बाधा बनता है, लेकिन उसी डर से व्यक्ति दोगुनी मेहनत और लगन से लक्ष्य  पाने की कोशिश करता है। 

केंद्रित रहता है ध्यान

जब भी व्यक्ति को किसी प्रकार का डर सताता है, वह यह जानने की कोशिश करता है कि इसे कैसे दूर करें। डर का कारण जानने के बाद व्यक्ति उसे दूर करने के लिए सारा ध्यान लगा देता है। उसकी यही कोशिश रहती है कि किस चीज़ से डर लगता है और पूरा ध्यान इस बात केंद्रित रहता है। इसके ज़रिये वह खुद को मज़बूत और निखारता है। डर व्यक्ति के सोच में है। जो डर को खुद पर हावी होने देता है, डर उसी को और डराता है। जब भी किसी चीज़ से डर लगे, तो खुद पर हावी न होने दें। डर से भागे नहीं, बल्कि उसका डटकर सामना करें।

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