मध्य भारत के दो राज्यों के नाम का क्या है मतलब?

जानिये मध्य भारत के राज्यों के नाम का मतलब
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अगर इतिहास की बात करें, तो भारत के मध्य राज्य आपको अतीत के उस झरोखे में ले जाएंगे, जहां आप इतिहास की कई दिलचस्प बातों को जान पाएंगे। इतिहास और कला-संस्कृति में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह काफी ज़्यादा मायने रखता है, तो देर किस बात की चलिये जानते हैं इस इतिहास और संस्कृति के बारे में –

मध्य प्रदेश

भारत के बीचो – बीच बसा राज्य मतलब मध्य राज्य। भारत के मैप में यह प्रदेश बीच में होने के कारण इसे मध्य प्रदेश नाम दिया गया है। आज़ादी के पहले देश के ज़्यादातर राज्य मध्य प्रदेश के रूप में ही जाने जाते थे।

मध्य प्रदेश पर कई राजवंश के राजाओं ने शासन किया। प्राचीन काल के मौर्य, राष्ट्रकूट और गुप्त वंश से लेकर बुन्देल, होल्कर, मुग़ल और सिंधिया जैसे लगभग चौदह राजवंशों का राज हुआ है। कई राजाओं के शासन के कारण यहां कला और वास्तुशैली के विभिन्न प्रकार विकसित हुए। खजुराहो की मूर्तियां, ग्वालियर का शानदार किला, उज्जैन और चित्रकूट के मंदिर या ओरछा की छतरियां सभी वास्तुकला के अच्छे उदाहरण है।

पथरों पर बनी प्राचीन कला | इमेज : फाइल इमेज

खजुराहो, सांची और भीमबेटका को यूनेस्को ने विश्व विरासत  स्थल घोषित किया है। मध्य प्रदेश की आदिवासी संस्कृति मध्य प्रदेश के टूरिस्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां मुख्य रूप से गौंड और भील आदिवासी रहते हैं। जिसकी आदिवासी कला और कलाकृतियां टूरिस्ट के आकर्षण का प्रमुख स्त्रोत है। लोक संगीत और नृत्य देश की विरासत है।

छत्तीसगढ़

वैसे तो अनेक कहानियां छत्तीसगढ़ के नाम से जुड़ी है लेकिन असल कारण था गोंड राजाओं के 36 किले। इन 36 किलों को गढ़ भी कहा जाता है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ी देवी मंदिर में 36 स्तंभ है,  इन सभी कारणों से इस राज्य का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा।  इस राज्य को मुख्य रूप से दक्षिण कोसाला के नाम से जाना जाता था, जिसका उल्लेख रामायण और महाभारत में मिलता है। राज्य के कई हिस्सों में की गई पुरातात्विक खुदाई से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ की सभ्यता प्राचीन है।

तीरछगढ़ के सुंदर झरनों का शांत वातावरण | इमेज : फाइल इमेज

यहां प्राकृतिक सुंदरता की कोई सीमा नहीं है। यहां जंगल, ऊंचे पहाड़ और झरनों की भरमार है। कुछ झरनों में चित्रकूट प्रपात, तीरथगढ़ प्रपात, चित्रधारा प्रपात, ताम्रा घूमर प्रपात, कांगेर धारा, अकुरी धारा और गावर घाट प्रपात आदि झरने शामिल हैं, जिनकी अपनी कहानी है। इन्हीं में से एक है तीरथगढ़ झरना। यह पहाड़ी के बीच से बहती है, इसकी जलधारा सीधे एक छोटे मंदिर पर गिरती है। इस जगह के आस-पास एक हजार साल पुराने हिन्दु सभ्यता के अवषेश बिखरे है। तीरथगढ़ एक सुंदर पिकनिक जगह के रूप में जाना जाता है। जहां बहते झरने मन को शांत करते हैं।

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