पांता भात है इम्यूनिटी बूस्टर – भुवनेश्वर मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट

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हमारे देश की विविधता यहां के ज़ायकों में भी देखी जा सकती है। यहां के ज़ायके खाने में स्वादिष्ट भी हैं और सेहत के लिए अच्छे भी। इसीलिए हमारे देश के खाने दुनियाभर में मशहूर हैं। इसी कड़ी में ओडिशा की पखाल भात या पांता भात का नाम भी आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्या है पांता भात?

पखाल भात (फर्मेंटेड राइस), चावल की एक डिश है। जिसे बहुत समय तक सिर्फ गरीब वर्गों का खाना माना जाता रहा है। बंगाल-असम-ओडिशा में यह सदियों से खाया जाता रहा है। इसकी प्राचीनता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि मुगल काल और दूसरे समय की अन्य किताबों में इस भोजन का ज़िक्र मिलता है।

क्यों है खास? पखाल भात या पांता भात चर्चा में है इसका कारण है ‘ऑस्ट्रेलिया मास्टरचेफ प्रतियोगिता’ के सीजन 13 के फाइनल में एक बांग्लादेशी शेफ किशवर चौधरी द्वारा पखाल भात का बनाया जाना। तब से पखाल भात को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोग जानने लगे है।

इसका दूसरा कारण है कोविड महामारी को देखते हुए भुवनेश्वर एआईआईएमएस (AIIMS) द्वारा इस खाने के औषधीय गुणों के कारण इसे इम्यूनिटी बूस्टर का दर्जा दिया जाना।

इसके अलावा ओडिशा के जगन्नाथपुरी मंदिर में छप्पन भोगों में इस चावल को भी रखा जाता है। जिस कारण इसका धार्मिक महत्व भी है।

पांता भात है खास | इमेज: फाइल इमेज

सेहत के लिए है फायदेमंद

पखाल भात या पांता भात अपने स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक गुणों के लिए जानी जाती है। यह आसानी से पचने वाला खाना है। दही के साथ बना खमीर वाला चावल सेहत के लिए खासकर पेट के लिए फायदेमंद होता है। गर्मी के मौसम में तो बहुत फायदेमंद है क्योंकि यह खाना शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बना के रखता है।

रेसिपी

पखाल भात बनाना बहुत ही आसान है। ज़्यादा पानी में पके चावलों को रात में पानी में भिगो कर रख दें। सुबह इनमें जब थोड़ा खमीर चढ़ जाए तो फिर दही,नमक, मीठी नीम, धनिया, मिर्च,नीबू आदि के साथ इन चावलों को खायें। इसी को ओडिशा में पखाल भात,गीली भात या बंगाल में पांता भात बोला जाता है।

एक तरफ भारत के खानपान आज दुनियाभर में अपनी छाप छोड़ रहा है। दूसरी तरफ हमारे देश में ही इन ज़ायको पर ध्यान नहीं दिया जाता। हमारे देश के हर प्रांत का कुछ अनोखा और अद्भुत ज़ायका है। ज़रूरत

है तलाशने की और उसके बारे में जानने की। तो आइए अपनी छिपी हुई संस्कृति को पहचाने और मज़ा लें इन मजेदार ज़ायकों का।

और भी पढ़िये : विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है खाएं हर दिन इतना नमक

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